दोस्त की प्रेमिका बनी जुगाड नम्बर वन

Antarvasna, sex stories in hindi: अपनी जिंदगी में ही मैं इतना ज्यादा उलझा हुआ था कि औरों के लिए जैसे मेरे पास समय ही नहीं होता था मेरी पत्नी को हमेशा मुझसे यही शिकायत रहती थी कि तुम मेरे लिए बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते हो। मैं अपनी पत्नी को हमेशा समझाता था और कहता संजना ऐसा नहीं है मैं अपने काम में कुछ ज्यादा ही व्यस्त हूं इसलिए मैं तुम्हें समय नहीं दे पाता हूं। मैंने ऐसा कभी सोचा नहीं था कि मैं अपनी पत्नी और अपने बच्चों को समय नहीं दे पाऊंगा परंतु अपनी जॉब की व्यस्तता से समय निकाल पाना मेरे लिए मुश्किल होने लगा था और कहीं ना कहीं इससे मेरे पारिवारिक रिश्तो पर भी असर पड़ने लगा था। मेरी पत्नी को हमेशा ही मुझसे यह शिकायत रहती थी लेकिन उसके बावजूद भी मुझसे जितना हो सकता था मैं उसके लिए उतना समय निकालता। एक दिन मैं कार ड्राइव करते हुए अपने ऑफिस जा रहा था तभी मेरा फोन बजा मैंने जब फोन पर देखा तो मेरे दोस्त गौरव का फोन आ रहा था मैंने उस वक्त तो फोन नहीं उठाया लेकिन जब मैं ऑफिस पहुंचा तो मैंने गौरव को कॉल बैक किया।

गौरव का फोन मुझे करीब 5 वर्षों बाद आया था मैंने गौरव को कहा आज तुमने मुझे कैसे फोन कर लिया तो गौरव मुझे कहने लगा सुनील तुम तो किसी को भी फोन नहीं करते हो और तुम्हारा नंबर भी मेरे पास नहीं था वह तो मैंने तुम्हारा नंबर अजीत से लिया। मैंने गौरव को कहा खैर तुम यह बात छोड़ो आज तुमने मुझे फोन कैसे किया तो गौरव मुझे कहने लगा सुनील हम लोगों को एक दूसरे से मिले हुए ना जाने कितने वर्ष हो चुके हैं कॉलेज की पढ़ाई के बाद तो हम लोग एक दूसरे को मिले ही नहीं हम लोगों को आपस में मिलना चाहिए। मैंने गौरव को कहा कि गौरव तुम ठीक कह रहे हो गौरव ने मुझसे पूछा तुम रहते कहां पर हो तो मैंने गौरव को बताया कि मैं इस वक्त मुंबई में हूं गौरव मुझे कहने लगा तुम तो लगता है मुंबई में ही सेटल हो चुके हो। मैंने गौरव को कहा हां गौरव बस यही समझो मैं अपनी फैमिली के साथ मुंबई में ही रहता हूं गौरव मुझे कहने लगा मैं जब मुंबई आऊंगा तो तुमसे जरूर मुलाकात करूंगा। मैंने गौरव को कहा तुम जब भी मुंबई आओ तो मुझे फोन करना गौरव और मेरी बात उस दिन काफी देर तक हुई। हमेशा की तरह ही मैं अपने ऑफिस से काम कर के घर लौटा तो संजना मुझसे कहने लगी कि सुनील बच्चों की फीस जमा करनी थी।

जब भी घर लौटो तो कोई ना कोई खर्चा तो संजना बता ही दिया करती थी मैंने संजना को कहा ठीक है संजना मैं तुम्हें कल पैसे दे दूंगा। मैं अपने रूम में चला गया और कुछ देर अपने रूम पर ही बैठा रहा संजना मुझे कहने लगी कि आप रूम में क्या कर रहे हैं मैं संजना से कहने लगा कि मैं कुछ काम कर रहा था तो संजना कहने लगी कि कभी मेरे लिए भी आप समय निकाल लिया कीजिए। मैंने संजना को कहा ठीक है अभी आता हूं मैंने अपने लैपटॉप को अपनी मेज पर रखा और मैं संजना के साथ बैठ गया संजना और मैंने उस दिन काफी देर तक बात की। संजना कहने लगी कि सुनील आप तो बहुत ज्यादा ही बिजी रहते हैं संजना को हमेशा ही मुझसे इस बात की शिकायत रहती थी आखिरकार उसकी शिकायत भी बिल्कुल सही थी क्योंकि मैं संजना को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाता था इसी वजह से तो संजना मुझे हमेशा कहती की आप मुझे बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते हैं। अगले दिन सुबह मैंने संजना को चेक दे दिया और कहा इसे तुम स्कूल में जमा करवा देना तो संजना कहने लगी कि ठीक है मैं इस चेक को स्कूल में दे दूंगी और हमेशा की तरह ही मैं अपने ऑफिस निकल गया। हमेशा की भागदौड़ भरी जिंदगी से जैसे मैं परेशान हो चुका था और मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था, मैं अपने लिए भी समय नहीं निकाल पा रहा था। मैं अपनी जॉब से खुश तो नहीं था लेकिन मेरी मजबूरी थी कि मुझे जॉब करनी थी। गौरव का मुझे फोन आया और गौरव कहने लगा कि मैं तुमसे मिलना चाहता हूं मैंने गौरव को कहा क्या तुम मुंबई आए हुए हो तो गौरव कहने लगा हां सुनील मैं मुंबई में ही हूं। मैंने गौरव को कहा तुम कहां रुके हो तो गौरव कहने लगा मैं तुम्हें अपने होटल का एड्रेस भेज देता हूं तो तुम मुझसे मिलने के लिए यहीं आ जाना। मैंने गौरव को कहा अभी तो मैं ऑफिस में ही हूं लेकिन जैसे ही मैं फ्री हो जाऊंगा तो तुम्हें फोन करता हूं गौरव कहने लगा ठीक है जब तुम फ्री हो जाओगे तो मुझे कॉल करना।

मैं अपने ऑफिस का काम खत्म कर के घर निकलने की तैयारी में था लेकिन मुझे ध्यान आया कि मुझे गौरव को फोन करना है मैंने गौरव को फोन किया और गौरव ने मुझसे पूछा कि तुम कहां पर हो। मैंने गौरव को कहा मैं अपने ऑफिस से तो निकल चुका हूं लेकिन फिलहाल तो मैं ट्रैफिक में फंसा हुआ हूं गौरव कहने लगा मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। इतने वर्षों बाद मैं गौरव से मिलने जा रहा था जब मैं गौरव से मिला तो गौरव मुझे कहने लगा सुनील तुमसे इतने वर्षों बाद मिलना अच्छा लग रहा है। मैंने गौरव को कहा गौरव लेकिन तुम बिल्कुल भी नहीं बदले हो गौरव मुझे कहने लगा सुनील तुम भी कहां बदले हो बस थोड़े से मोटे जरूर हो गए हो। मैंने गौरव को कहा यार ऑफिस में सुबह से शाम तक बैठा रहता हूं तो मोटा तो हो ही जाऊंगा ना गौरव इस बात पर हंसने लगा हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और एक दूसरे से बात कर रहे थे। मैंने गौरव के बारे में पूछा तो गौरव ने मुझे अपने बारे में बताया और उसने मुझे अपने परिवार की तस्वीर भी दिखाई।

गौरव और मैं साथ में बैठ कर बात कर रहे थे हमारी कुछ पुरानी बातें ताजा हो रही थी। जब गौरव ने मुझे अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताया तो मैं चौंक गया। मैने गौरव से कहा तुम दिव्या के बारे में बात कर रहे हो? वह मुझे कहने लगा हां दिव्या से तो मैं अभी भी संपर्क में हूं और उससे मेरी बात होती है मैंने गौरव से पूछा लेकिन दिव्या कहां रहती है? वह कहने लगा दिव्या तो यही मुंबई में रहती है अब वह एक हाई प्रोफाइल कॉल गर्ल बन चुकी है मैं यह बात सुनकर चौंक गया। मैंने गौरव को कहा गौरव तुम क्या सच कह रहे हो वह मुझे कहने लगा हां मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं मेरी उस से बात अभी भी होती है। मैंने उसे कहा जब वह हर प्रोफाइल कॉल गर्ल बन गई है तो तुम उसे यहां क्यों नहीं बुला लेते? गौरव मुझे कहने लगा मैंने उसे यहां बुला लिया है बस कुछ देर बाद वह पहुंचती ही होगी जब गौरव ने मुझसे यह बात कही तो मेरे मन ही मन में लड्डू फूटने लगे मैं खुश हो गया। मैं दिव्या को पहले भी जब देखता था तो उसके साथ मुझे शारीरिक संबंध बनाने का मन करता ही था मैं उसे चोदने के लिए तैयार था। जब वह आई तो उसने जो कपड़े पहने हुए थे उसमें वह बड़ी हॉट लग रही थी मैंने जब उस से हाथ मिलाया तो उसके मुलायम हाथ को मैने चूम लिया। गौरव ने उसे अपनी गोद में बैठा लिया जब गौरव ने उसे अपनी गोद में बैठाया तो थोड़ी देर बाद वह मुझसे कहने लगी क्या तुम भी मेरे साथ आज अपनी रात को रंगीन करोगे? मैंने उसे कहा लगे हाथ में भी तुम्हें आज चोद डालता हूं गौरव को भी अब इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि दिव्या भी कॉल गर्ल बन चुकी थी। जब वह गौरव के लंड को चूस रही थी तो मैं यहां सब देख रहा था। मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को चूसो तो उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू किया मुझे बड़ा मजा आने लगा और उसे भी बहुत आनंद आ रहा था। वह बहुत ज्यादा खुश नजर आ रही थी गौरव ने उसके कपड़े खोल दिए और उसे चोदना शुरू किया वह बड़ी तेजी से उसे धक्के मार रहा था मैं यह सब देख रहा था कुछ देर तक तो गौरव ने उसके साथ सेक्स किया गौरव ने तक मजे लिए जब तक गौरव का मन भर नहीं गया।

गौरव मुझे कहने लगा तुम दिव्या के साथ चूत चुदाई का खेल सकते हो। मैने दिव्या से कहा तुम मेरे लंड को दोबारा से चूसो दिव्या ने मेरे लंड को दोबारा से अपने मुंह के अंदर लिया। वह बड़े अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी मैं उसके बड़े स्तनों की तरफ देख रहा था उसके स्तनों को दबाने मे बड़ा मजा आता। जब मै उसके स्तनो का रसपान कर रहा था उससे मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था वह भी बहुत ज्यादा खुश नजर आ रही थी। मैंने बहुत देर तक उसके साथ ऐसा ही किया लेकिन जब मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा मैं अपने आपको रोक ना सका मैंने दिव्या की कोमल और मुलायम चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया वह चिल्ला उठी। मेरा लंड उसकी चूत के अंदर जाने लगा था मैं उसके पैरों को खोल कर उसे धक्के मारने लगा मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था मुझे बड़ा मजा आता जिस प्रकार से मैं उसे धक्के मारता।

वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी मैं बहुत ज्यादा खुश था वह अपने पैरों पर खोलती और मैं उसे लगातार तेजी से धक्के मारता थोड़ी देर बाद उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया। जब उसने मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में जकडा तो मैंने उसे कहा लगता है तुम्हारी चूत से कुछ ज्यादा गर्म पानी बाहर की तरफ निकलने लगा है। वह मुझे कहने लगी तुम अपने पानी को भी मेरी चूत के अंदर गिरा दो मैंने अपने वीर्य को दिव्या की चूत के अंदर ही गिरा दिया उसे बहुत मजा आया जिस प्रकार से मैं दिव्या की चूत के मजे ले पाया और वह भी बड़ी खुश थी। पूरी रात हम दोनों ने दिव्या के साथ चूत चुदाई का खेल खेला दिव्या के बारे में जब मुझे पता चला कि वह एक कॉल गर्ल है इस से मुझे खुशी मिलती। मैंने दिव्या का नंबर ले लिया था जब गौरव चला गया तो उसके बाद भी मैं दिव्या को कई बार अपने पास बुला लिया करता हूं।