दोस्त बनी रखैल मेरी

Antarvasna, hindi sex stories: संजना का मुझे फोन आता है और वह कहती है कि अविनाश क्या तुम फ्री हो तो मैं संजना से कहता हूं कि हां संजना तुम कहो ना क्या तुम्हे कोई जरूरी काम था। वह कहने लगी कि नहीं मैं तुमसे यह पूछ रही थी कि तुम फ्री हो तो मैं तुमसे फिर बात करूं मैंने संजना को कहा हां संजना बताओ क्या बोलना था। वह मुझे कहने लगी कि बच्चों की स्कूल की छुट्टियां पड़ी है तो मैं सोच रही थी कि हम लोग कहीं घूमने के लिए जाएं मैंने संजना को कहा हां ठीक है संजना मैं तुम्हें सोच कर इस बारे में बताता हूं। मैं शाम को जब घर लौटा तो मैंने अपनी पत्नी को बताया कि मुझे संजना का फोन आया था मेरी पत्नी मुझे कहने लगी कि संजना क्या कह रही थी। मैंने अपनी पत्नी को कहा कि संजना कह रही थी कि बच्चों की छुट्टियां पड़ी है तो हम लोग कहीं घूमने के बारे में सोच रहे थे क्या हमें भी उनके साथ जाना चाहिए। मेरी पत्नी कहने लगी कि क्यों नहीं हमें भी उन लोगों के साथ जाना चाहिए।

मेरी पत्नी के कहने पर मैंने संजना को उस वक्त फोन किया और संजना से कहा कि हम लोग कहां जा रहे है तो संजना कहने लगी कि मेरे पति के दोस्त का होटल मनाली में है तो हम लोग सोच रहे हैं कि वही घूमने के लिए जाएं। मैंने संजना को कहा ठीक है तो फिर हम लोग मनाली जाने का प्लान बनाते हैं संजना कहने लगी ठीक है मैं अपने पति को बता दूंगी कि अविनाश भी हमारे साथ आ रहा है। संजना और मेरी दोस्ती कॉलेज के दौरान हुई थी हम दोनों की दोस्ती शादी के बाद भी वैसी ही है जैसी की शादी से पहले थी। हमेशा ही संजना मेरे सुख दुख में मेरे साथ खड़ी हुई है मुझे वह वक्त भी याद है जब मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी संजना उस वक्त जॉब करती थी और मैं नौकरी की तलाश कर रहा था संजना ने मेरी बहुत मदद की थी उसने मेरी पैसों को लेकर मदद की और मुझे उसने हमेशा ही अपना सच्चा दोस्त माना है।

मैं भी संजना के साथ हमेशा से ही खड़ा हूं संजना के साथ मेरी दोस्ती को करीब 10 वर्ष हो चुके हैं लेकिन इन 10 वर्षों में संजना बिल्कुल वैसी ही है वह बिल्कुल भी बदली नहीं है। हम लोगों मनाली जाने की तैयारी में थे मेरी पत्नी मुझे कहने लगी कि अविनाश आप मेरे साथ थोड़ा मदद तो कीजिए मैंने अपनी पत्नी को कहा ठीक है मैं भी तुम्हारे साथ पैकिंग में तुम्हारी मदद करता हूं। मैंने अपनी पत्नी के साथ पैकिंग में मदद की पापा मुझसे पूछने लगे बेटा तुम लोग कहां जा रहे हो तो मैंने पापा को कहां पापा हम लोग बच्चों को लेकर मनाली जा रहे हैं। पापा को अस्थमा की समस्या है इसलिए पापा को अपने साथ ले जाना थोड़ा मुश्किल होता है पापा की देखभाल के लिए मैंने घर में एक नौकरानी को रखा है वह पापा की देखभाल करती हैं। पापा मुझे कहने लगे कि बेटा तुम लोग अपना ध्यान रखना और आराम से जाना मैंने पापा को कहा हां पापा आप चिंता मत कीजिए। मैंने संजना को फोन किया और कहा संजना कल सुबह तुम लोग कितने बजे तक हमारे घर पर आ जाओगे संजना मुझे कहने लगी कि हम लोग सुबह 5:00 बजे तक तुम्हारे घर पर पहुंच जाएंगे। हम लोग सुबह 5:00 बजे तैयार हो चुके थे और हम लोग तैयार होकर मनाली जाने की तैयारी में थे सुबह 5:00 बजे संजना के पति कार लेकर हमारे घर पर पहुंच गए हम लोग कार से ही मनाली जाने वाले थे क्योंकि चंडीगढ़ से मनाली की दूरी ज्यादा नहीं है। हम लोगों ने अपना सामान रखा और हम लोग मनाली के लिए निकल चुके थे मैंने संजना से कहा तुमने यह बहुत ही अच्छा प्लान बनाया बच्चे भी वैसे काफी जिद कर रहे थे और मुझे कह रहे थे कि आप हमें कहीं घुमाने के लिए कहीं ले चलो इस बहाने कम से कम बच्चों का भी थोड़ा मन लगा रहेगा। जब हम लोग मनाली पहुंचे तो मनाली में संजना के पति गौतम के दोस्त हमें मिले और उन्होंने हमारे लिए रहने की सारी व्यवस्था करवा रखी थी उनका होटल काफ़ी बड़ा है। मैंने संजना से कहा यहां पर काफी अच्छा मौसम है तो संजना कहने लगी हां लेकिन हम लोग बहुत थक चुके थे और मैं सोच रहा था कि पहले नहा लेता हूं। अब मैं नहाने के लिए बाथरूम में गया और नहाकर मैं जैसे ही बाहर आया तो मेरी पत्नी कहने लगी कि चलिये हम लोग कुछ खा लेते हैं। मैंने संजना को फोन किया और कहा संजना हम लोग कुछ खा लेते हैं तो हम लोग होटल के ही रेस्टोरेंट्स में चले गए और वहां पर हम लोगों ने खाने का आर्डर करवाया जैसे ही हम लोगों ने खाने का ऑर्डर दिया तो थोड़ी देर बाद खाना खा चुका था।

हम लोग सब साथ में बैठकर लंच कर रहे थे गौतम मुझसे कहने लगे अविनाश मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी मैंने गौतम से कहा हां कहिए ना आपको क्या कहना था। गौतम मुझसे कहने लगे अविनाश मैं तुमसे यह कह रहा था कि तुम एक बार हमारे घर पर अपने साथ अपने भैया को भी लाए थे मैंने गौतम से कहा हां वह मेरे ममेरे भाई हैं। गौतम मुझे कहने लगे कि क्या तुम उनका नंबर मुझे दे दोगे मैंने गौतम से कहा हां मैं उनका नंबर तुम्हें दे देता हूं मैंने उनका नंबर गौतम को दे दिया गौतम को शायद उनसे कुछ काम रहा होगा इसलिए गौतम ने उनका नंबर मुझसे ले लिया था। अब हम सब लोग लंच कर चुके थे और हम लोग अपने रूम में आराम करने लगे इतने समय बाद मुझे बड़ी अच्छी नींद आई थी क्योंकि मौसम भी बहुत सुहावना था और मुझे अच्छा भी लग रहा था बच्चों के साथ आने की खुशी भी थी कि कम से कम बच्चों के साथ तो इतने समय बाद हम लोग कहीं घूमने के लिए आप आए हैं। यह सब संजना की वजह से ही हो पाया क्योंकि संजना यदि मनाली आने का प्लान नहीं बनाती तो शायद हम लोग भी कहीं घूमने के लिए नहीं जाते।

मेरी जब आंख खुली तो मैंने देखा बच्चे भी सोए हुए थे और मेरी पत्नी भी लेटी हुई थी मैं अपना फोन लेकर बाहर लॉन में चला गया। वहां पर मैंने अपने फोन को अपनी जेब से निकाला और अपने पापा को फोन किया मैंने पापा से पूछा आपकी तबीयत तो ठीक है पापा कहने लगे हां अविनाश बेटा मेरी तबीयत ठीक है। मैं लॉन में ही बैठा हुआ था थोड़ी देर बाद संजना और गौतम मेरे पास आए मैंने उन्हें कहा बच्चे कहां है तो वह कहने लगे कि बच्चे तो सो रहे हैं। हम लोगों ने चाय का आर्डर दिया और हम तीनों चाय पी रहे थे थोड़ी देर बाद मेरी पत्नी भी आ गई और हम सब लोग आपस में बैठकर बात कर रहे थे हम लोगों ने अगले दिन का प्लान भी बना लिया था और अगले दिन हम लोग ट्रैकिंग पर जाने वाले थे। अगले दिन सुबह के वक्त हम लोग टूरिस्ट गाइड के साथ ट्रैकिंग पर निकल चुके थे ट्रैकिंग का सफर हमारा बड़ा ही अच्छा रहा जब हम लोग वापस लौटे तो सब लोग थक चुके थे। गौतम कहने लगा मुझे नींद आ रही है इसलिए गौतम जल्दी सो गए संजना उठी हुई थी मैं संजना के साथ बैठा हुआ था। संजना और मैं आपस में एक दूसरे से बात कर रहे थे लेकिन संजना के स्तनों की दीवार मुझे बार-बार दिखाई देती संजना के स्तनों के बीच मैं जो लकीर थी उसे देखकर मैंने संजना को कहा तुम्हारे स्तन दिखाई दे रहे हैं। वह अपने कपड़ों से अपने स्तनों को ढकने लगी तब तक मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी मैंने जब संजना के स्तनों पर हाथ लगाया तो संजना मुझे कहने लगी अविनाश यह सब ठीक नहीं है। मैंने संजना को कहा संजना हम लोग अच्छे दोस्त हैं और यदि हम लोगों के बीच सेक्स हो भी जाता है तो इसमें कोई आपत्ति वाली बात नहीं है। संजना को मैंने अपनी बातों से ही गर्म कर दिया था वह मेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए बेताब थी इतने सालों में मैंने कभी संजना के बारे में कभी भी गलत नहीं सोचा था लेकिन आज मौका था मैं इस मौके को छोड़ना भी नहीं चाहता था।

मैंने संजना के कपड़े उतारकर उसके स्तनों का रसपान किया उसके स्तनों को चूसने में मुझे मजा आ रहा था और उसके स्तनों को मैंने बहुत देर तक अपने मुंह के अंदर लेकर चूसा। संजना मुझे कहने लगी मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है गौतम बहुत गहरी नींद में था मैंने संजना की चूत को चाटना शुरू किया और उसकी चूत को चाट कर मुझे मजा आ रहा था जैसे ही संजना की चूत के अंदर मैंने अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी मेरा लंड संजना की चूत के अंदर जा चुका था। जिस प्रकार से मैं संजना के साथ शारीरिक सुख का आनंद ले रहा था उससे मुझे बड़ी खुशी हो रही थी मैं लगातार तेजी से संजना को धक्के मार रहा था मै संजना के स्तनों को भी चाट रहा था। मैंने उसके स्तनों पर अपने दांत के निशान भी मार दिए थे संजना अपने आपको बिल्कुल रोक नहीं पा रही थी वह पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी जिस प्रकार से मैंने संजना की चूत के मजे लिए उस से वह बड़ी खुश थी वह मुझे कहने लगी तुम मेरी गांड भी मार लो मेरे पति तो मेरी गांड हमेशा ही मारते हैं मुझे गांड मरवाने का शौक हो चुका है।

संजना की बात सुनकर मैंने भी उसकी गांड के अंदर अपने लंड को डाला मुझे भी अच्छा लग रहा था। मैं संजना की गांड के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था मुझे बहुत अच्छा लगता। जैसे ही मैं संजना की गांड के अंदर बाहर अपने लंड को करता तो संजना मुझसे अपनी गांड को लगातार टकराए जा रही थी वह मुझे कहती मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने संजना को कहा तुम्हारी गांड मारने में आज मुझे बड़ा मजा आ रहा है और तुम्हारे साथ जिस प्रकार से मे मजे ले रहा हूं उस से मुझे लग रहा है ज्यादा देर तक मैं तुम्हारे सामने टिक नहीं पाऊंगा और मेरा वीर्य पतन हो जाएगा। थोड़ी ही देर बाद मेरा वीर्य मेरे अंडकोषो से बाहर आने लगा जैसे ही मैंने अपने वीर्य को संजना की गांड में गिराया तो वह खुश हो गई। हम लोगों का मनाली का सफर भी अच्छा रहा संजना भी मेरी हो चुकी थी संजना मेरी दोस्त नहीं बल्कि वह मेरी रखेल बन चुकी थी।