दो लंड अब मेरे थे

Antarvasna, sex stories in hindi: कॉलेज के दौरान मेरा और निखिल का प्यार परवान चढ़ा हम दोनों का प्यार तो परवान चढ़ चुका था और निखिल ने जब मुझे पहली बार अपने दिल की बात कही तो मैंने भी निखिल के रिश्ते को तुरंत ही स्वीकार कर लिया। हम दोनों के कॉलेज खत्म होने के बाद मैं हमेशा से सोचा करती थी कि मैं एक कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी करूंगी और फिर एक अच्छी कंपनी में मेरा सिलेक्शन हुआ। निखिल भी जॉब करने लगे हम दोनों बहुत खुश थे हम दोनों की शादी भी बड़े धूमधाम से हुई और हमारे दोस्त भी हमारी शादी में आए हुए थे मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि सब कुछ इतना अच्छा चलेगा। मेरी शादी शुदा जिंदगी बहुत अच्छी चल रही थी निखिल मेरा बहुत ध्यान रखते लेकिन अचानक से पता नहीं निखिल को क्यों ऐसा लगा कि उन्हें अपनी नौकरी छोड़कर अपना कोई बिजनेस शुरू करना चाहिए जिस वजह से उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। मैंने उन्हें मना किया कि आप अपनी नौकरी से रिजाइन मत दीजिए लेकिन निखिल ने मेरी एक न सुनी और उन्होंने अपनी नौकरी से रिजाइन कर दिया।

उन्होंने अपनी नौकरी से रिजाइन किया तो उसके बाद वह अपना कोई बिजनेस शुरू करना चाहते थे उसके लिए वह रात दिन एक करने को तैयार थे। रात को निखिल कई बार सोते भी नहीं थे मैं निखिल को हमेशा कहती कि निखिल इतना भी काम मत कीजिए कि आप की तबीयत खराब हो जाए लेकिन निखिल के मन में ना जाने क्या चल रहा था। निखिल कोई प्रोजेक्ट बना रहे थे वह चाहते थे कि उनका प्रोजेक्ट बन जाए और उसके बाद उन्हें कोई इन्वेस्टर मिले जो कि उनके ऊपर पैसा लगाने को तैयार हो सके। उसके लिए उन्होंने एक प्रोजेक्ट तैयार कर लिया लेकिन उसके बाद उन्हें कोई इन्वेस्टर नहीं मिल पाया जिस वजह से निखिल बहुत ज्यादा चिड़चिडे होने लगे और उनके स्वभाव में पूरी तरीके से बदलाव आ गया। जो निखिल हमेशा मुझे देख कर खुश हो जाते थे और मेरे दुख में वह हमेशा मुझे खुश करने की कोशिश करते अब वह निखिल पूरी तरीके से बदल चुके थे।

घर का खर्चा भी मैं ही चला रही थी और काफी समय हो गया था जब निखिल को कोई इन्वेस्टर्स भी नहीं मिला था और निखिल के पास कोई नौकरी भी नहीं थी निखिल बहुत ज्यादा परेशान और हताश हो चुके थे। हालांकि वह अपने चेहरे पर कभी गुस्से को नहीं लाते थे लेकिन अपने आप में ही निखिल खोए रहते जिस वजह से निखिल अब पूरी तरीके से बदल चुके थे। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ऐसे मौके पर मुझे क्या करना चाहिए निखिल से जब भी मैं कुछ बात करती तो वह मुझ पर ही गुस्सा हो जाया करते। मैंने निखिल को काफी समझाने की कोशिश की और कहा निखिल आप छोटी-छोटी बात पर गुस्सा मत हुआ कीजिए लेकिन निखिल मेरी बात नहीं मानने वाले थे और वह अपने काम के जुनून के आगे किसी की भी नहीं सुनते। निखिल अब पूरी तरीके से टूट चुके थे और उनके पास अब और कोई रास्ता भी नहीं था मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी मैंने अपने कुछ पुराने दोस्तों को फोन किया मैं चाहती थी कि वह निखिल को समझाएं। मुझे तो ऐसा लग रहा था कि क्या पता निखिल उनसे मिलकर थोड़ा खुश हो जाएं लेकिन जब हम सब लोग साथ में मिले तो निखिल के चेहरे पर बिल्कुल भी खुशी नहीं थी। मैंने निखिल को बहुत समझाने की कोशिश की परंतु निखिल अब मेरी बात बिल्कुल भी नहीं समझते थे और मैं बहुत ही ज्यादा परेशान हो गई थी मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए मुझसे जो हो सकता था मैं वह निखिल के लिए करने को तैयार थी। निखिल और मैं अपनी शादी के बाद बेंगलुरु में ही शिफ्ट हो गए थे लेकिन दिन ब दिन हम दोनों के बीच झगड़े भी होने लगे थे जिस वजह से मेरे काम पर भी अब असर पड़ने लगा था। मैंने निखिल को बहुत समझाने की कोशिश की कि वह मुझसे बेवजह झगड़ा ना किया करें लेकिन निखिल को अपने काम के चलते शायद अच्छा नहीं लग रहा था इस वजह से वह मुझसे झगड़ने लगते। निखिल अपने कमरे में ही रहते थे वह बिल्कुल भी कमरे से बाहर नहीं निकलते थे जब भी मैं निखिल से कुछ बात करती तो वह मुझ पर ही भड़क जाते थे।

निखिल से बात करना मुझे अच्छा नहीं लगता था और मैं अंदर ही अंदर परेशान होने लगी थी मैं भी मानसिक तौर पर टूट चुकी थी मेरे पास भी शायद ऐसा कोई नहीं था जो कि मुझे समझ पाता। मैंने अपनी मम्मी से इस बारे में बात की काफी समय बाद अपनी मम्मी को मैंने इस बारे में बताया तो मुझे थोड़ा अच्छा लगा क्योंकि मैं किसी से अपनी बात तो शेयर कर पा रही थी निखिल तो मुझे समझने को तैयार नहीं थे उन्हें सिर्फ अपने काम की चिंता थी। उन्होंने जो प्रोजेक्ट बनाया था उसके लिए उन्हें अभी तक कोई इन्वेस्टर नहीं मिल पाया था जिस वजह से वह रात दिन चिंता में डूबे रहते। मैं कई बार कहती कि निखिल आप इतना मत सोचा कीजिए लेकिन निखिल कहां मेरी बात मानने वाले थे वह तो सिर्फ और सिर्फ अपनी परेशानी में ही डूबे हुए थे और उनके पास शायद कोई जवाब भी तो नहीं था। मैं अपने कॉलेज के दोस्त वीरेन से मिली जब मैं वीरेन से मिली तो मुझे अच्छा लगा वीरेन से मिलकर मुझे ऐसा लगा कि शायद वह मुझे समझ पा रहा है क्योंकि वीरेन ही एक ऐसा था जो कि मुझे समझता था। मैंने वीरेन को निखिल के बारे में बताया वीरेन बहुत ज्यादा चिंतित था और वह कहने लगा कि मैंने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था कि निखिल इतना ज्यादा परेशान हो जाएगा। वीरेन यह बात सुनकर मुझे कहने लगा कि सुहानी तुम चिंता मत करो मैं कोई ना कोई रास्ता जरूर निकाल लूंगा।

वीरेन पर मुझे हमेशा से ही पूरा भरोसा था और मुझे इतना तो मालूम था कि वह कोई ना कोई रास्ता जरूर निकाल लेगा। मुझे तो कोई रास्ता निकलता हुआ नजर नहीं आ रहा था वीरेन मुझे मिलने के लिए अक्सर घर पर आता रहता था। जब भी वीरेन मुझसे मिलने के लिए घर पर आता तो मैं उससे हमेशा ही पूछती क्या तुमने कुछ सोचा तो वह कहता सुहानी मुझे थोड़ा समय दो। निखिल के साथ अब मुझे घुटन होने लगी थी मैं बहुत ज्यादा परेशान होने लगी थी वीरेन और मैं घर पर थे उस वक्त वीरेन ने मुझे गले लगा कर कहा सुहानी तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा। इतने समय बाद किसी ने मुझे गले लगाया था और मुझे अच्छा लगा जिस प्रकार से वीरेन ने मुझे गले लगाया और मेरे अंदर की आग उसने जगाया मैं सिर्फ वीरेन के साथ अब सेक्स संबंध करना चाहती थी। मैं यह सोचने लगी क्या यह सब ठीक है परंतु मेरे अंदर से आवाज आई यह सब ठीक है वीरेन के साथ मुझे सेक्स करना ही था क्योंकि मैं निखिल मेरी जरूरतो को पूरा नहीं कर पा रहा था निखिल तो मेरी तरफ देखता ही नहीं था मैं बहुत ज्यादा तड़प रही थी मेरी चूत से पानी लगातार निकलता ही रहता था। वीरेन जब मुझसे मिलने के लिए घर पर आया तो मैं वीरेन की तरफ देख रही थी वीरेन ने मुझे कहा तुम आज मेरी तरफ ऐसे क्या देख रही हो? मैंने उसे कहा आज तुम बहुत अच्छे लग रहे हो। वह मुझे कहने लगा अच्छा तो मैं हमेशा से ही लगता हूं मैंने जब वीरेन के कंधे पर हाथ रखा तो उसने भी मेरी जांघ पर हाथ रखा। जब उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा तो मैंने उसे कहा मुझे तुम आज अपना बना लो और मुझे शारीरिक सुख की अनुभूति दो वह मुझे कहने लगा सुहानी तुम कैसी बात कर रही हो। वीरेन इस बात के लिए तैयार नहीं था लेकिन मैंने उसे इस बात के लिए तैयार किया और वीरेन ने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसे अपने हाथ में लिया काफी समय बाद में किसी के मोटे लंड को देख रही थी मैंने उसे अपने मुंह में ले लिया और चूसना शुरू किया।

मैं मुंह के अंदर लेकर सकिंग करती तो मुझे बहुत मजा आता और वीरेन को भी अच्छा लग रहा था जैसे ही वीरेन ने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मैं चिल्ला उठी इतने समय बाद किसी का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हो रहा था। मैं वीरेन का साथ अच्छे से दे रही थी वह मेरे पैरों को खोलता और मुझे तेजी से चोदता। जब वीरेन ने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा तो उसके बाद उसने जो गति पकड़ी उससे मेरी हालत खराब हो गई मैं चिल्लाने लगी मेरा बदन पूरी तरीके से हिलने लगा मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी। मैंने वीरेन को कहा मुझे आज तुम्हारे साथ सेक्स करने में मजा आ रहा है निखिल ने तो मेरी तरफ देखना ही बंद कर दिया है और मेरी जवानी को मैं ऐसे ही बर्बाद होने नहीं देना चाहती। वह मुझे कहने लगा मैं तुम्हारे बदन को ऐसे ही बर्बाद नहीं होने दूंगा तुम्हारी जवानी को मैं आज पूरी तरीके से खिला कर रख दूंगा।

उसने अपने वीर्य को मेरे चूत के अंदर गिराया तो मैंने अपनी योनि को साफ़ किया और वीरेन के लंड को मैंने दोबारा से अपने मुंह में ले लिया मैं वीरेन के लंड को अपने मुंह में लेकर बहुत खुश थी उसके लंड को मैं बड़े अच्छे से चूस रही थी अब उसे भी अच्छा लगने लगा और उसने मेरी चूत के अंदर दोबारा से अपने लंड को घुसाया और मुझे तेज गति से धक्के मारने लगा। मुझे जिस तेज गति से वीरेन धक्के मार रहा था उससे मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसने मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया था मैं काफी समय बाद इतने अच्छे तरीके से किसी के साथ शारीरिक सुख का मजा ले पा रही थी मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। मेरी और वीरेन की खुशी ज्यादा देर तक टिक ना सकी क्योंकि वीरेन का वीर्य बड़ी तेजी से बाहर निकला और जिस गति से वीरेन ने मेरी चूत के अंदर अपने वीर्य को गिराया उससे मैं खुश हो गई। वीरेन मुझसे मिलने के लिए आता तो वह मेरे साथ सेक्स जरूर किया करता था और निखिल कि मदद भी वीरेन ने की निखिल भी अब मुझसे अच्छे से बात करने लगा था। मैं निखिल के साथ भी अब संभोग का आनंद लेती और वीरेन के साथ भी मै संभोग का आनंद लिया करती थी।