डिवोर्स की खुशी में मेरी दोस्त ने मुझसे चूत मरवाई

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मेरा नाम राजीव है और मैं एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं। मेरी उम्र 38 वर्ष हो चुकी है। मेरी शादी को भी 6 वर्ष बीत चुके हैं। मेरा घर भी अच्छे से चल रहा है और मेरी पत्नी भी मेरा बहुत ही साथ देती है। वह हर बार और हमेशा मेरे साथ खड़ी होती है। मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब वह मेरी हर चीजों को समझती है और मुझे भी बहुत अच्छे से समझाती है। कभी मैं अगर गुस्सा हो भी जाता हूं तो वह मुझसे माफी मांग लिया करती है। हम दोनों का रिलेशन बहुत ही अच्छे से चल रहा है। एक दिन मुझे मेरे कॉलेज की लड़की मिली उसका नाम कविता है। मैं उसे कॉलेज के समय में बहुत पसंद करता था और वह हमारे ग्रुप की ही लड़की थी। मैं उससे अपने दिल की बात भी कहना चाहता था लेकिन मैं उसे कभी कह नहीं पाया था। जब वह मुझे मिली तो वह बहुत ही परेशान दिख रही थी।

मैंने उसे पूछा क्या हो गया, तो वह कहने लगी कि मेरा आकाश के साथ रिलेशन बिल्कुल भी अच्छे से नहीं चल रहा है और वह मुझसे हमेशा झगड़ा करता रहता है। मैंने उसे कहा कि तुम दोनों के बीच में तो बहुत ज्यादा प्रेम था लेकिन अब क्या हो गया है। तुम लोगों ने लव मैरिज की उसके बावजूद भी तुम्हारा रिलेशन अच्छे से नहीं चल रहा है। कविता कहने लगी कि आकाश को पता नहीं क्या हो गया, वह बिल्कुल भी अच्छे से बात ही नहीं करता। उसे कुछ भी सीधे तरीके से कहो तो वह उस बात को उल्टा ही घुमा देता है और बात का मतलब ही बदल देता है। वह ना तो किसी चीज को समझना चाहता है और ना ही उसे कोई समझा सकता है। वह मुझे कहने लगी कि हमारे पुराने दिन कितने अच्छे थे, जब हम कॉलेज में थे। हम लोगों का ग्रुप बहूत ही अच्छे से था। सब लोग आपस में एक दूसरे से बहुत ही अच्छे तरीके से रहते थे और ना ही कभी किसी के साथ झगड़ा किया करते थे।

किसी को भी और लोगी से कोई मतलब नही रहता था। मैंने भी उससे कहा कि वह बात ही पुरानी है लेकिन अब तो सब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं। सब अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जी रहे हैं लेकिन तुम्हारे लाइफ में तो प्रॉब्लम ही चल रही है। थोड़ी देर बाद कविता हमारे घर से जा चुकी थी। रात को मैं सोच रहा था कि मैं कविता से कितना प्यार करता था लेकिन आकाश ने उसे मुझ से पहले प्रपोज कर दिया और उसने आकाश के साथ ही शादी कर ली। वह आकाश के साथ कितनी खुश थी। मैं उसे कुछ कह भी नहीं पाया और उस समय मुझे बहुत ज्यादा तकलीफ हुई क्योंकि हम लोग एक साथ ही रहते थे और एक ही ग्रुप के थे। इस वजह से मैं उसे कुछ भी नहीं बता पाया लेकिन अब जब मैंने उसकी कहानी सुनी तो मुझे बहुत ही बुरा लगा। मुझे आकाश से बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह इस तरीके से व्यवहार करेगा। फिर मैंने सोचा कि मैं कल आकाश से मिलता हूं और उससे बात करता हूं। कि तुम्हारे बीच में झगड़ा किस चीज को लेकर है।

मैं अगले दिन आकाश से मिलने उसके घर चला गया। वहां पर कविता भी थी। दोनों ही आपस में बिल्कुल भी बात नहीं कर रहे थे। मैंने आकाश से कहा कि तुम्हारे घर पर कैसा चल रहा है। वह कहने लगा कुछ ठीक नहीं चल रहा। अब उसने भी मुझसे कहा कि कविता मुझसे हमेशा झगड़ा करती रहती है। मैं यह बात नहीं समझ पा रहा था कि गलती किसकी है और कौन सही है। मैंने आकाश को समझाने की कोशिश की लेकिन वह कहने लगा, मेरी गलती बिल्कुल भी नहीं है। तो मैं क्यों किसी चीज को समझू। मैंने उसे कहा कि यदि तुम बात को मान लोगे तो तुम छोटे नहीं हो जाओगे और उसे तुम्हारा रिलेशन भी बचा रहेगा लेकिन आकाश मुझे ही उल्टा कहने लगा और कहने लगा की तुम्हें हमारे परिवार के झगड़ों में पढ़ने की जरूरत नहीं है। तुम अपने काम से काम रखो।

जब उसने यह बात कही तो मुझे बहुत बुरा लगा और मैं वहां से चला गया। कविता दौड़ते हुए मेरे पीछे आए और कहने लगी कि तुमने देख लिया आकाश का व्यवहार किस तरीके का हो गया है। वह इसी तरीके से मुझसे भी बात करता है और हमेशा ही किसी ना किसी बात को लेकर मुझसे भी झगड़ता रहता है। मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गई हूं। मैने उसे बहुत समझाया लेकिन वह बिल्कुल भी समझने को तैयार नहीं है। मुझे भी अपनी जिंदगी को अच्छे से जीना है और मैं सोच रही हूं कि आकाश को डिवोर्स दे दूं। मैंने उसे कहा कि अभी कुछ समय उसे और दो क्या पता वह बातों को समझ जाएं और तुम दोनों का रिलेशन अच्छे से चल पड़े। उसने मुझे कहा कि, मुझे नहीं लगता कि उसे अब कुछ समझ आने वाली है। लेकिन फिर भी मैं उसे तुम्हारे कहने पर एक मौका देकर देखती हूं। यदि वह इस बार भी ऐसा ही करेगा तो मैं अपने घर वापस चली जाऊंगी। अब मैं भी अपने काम में बिजी हो गया और बहुत समय बाद मुझे कविता मिली। जब कविता मुझे मिली तो वह कहने लगी कि मैंने आकाश को डिवोर्स देने के लिए कह दिया है और अब मैं अपने घर पर ही रहती हूं। कविता मुझे कहने लगी कि मुझे बहुत ही अकेला महसूस होता है। अगर तुम मुझे कुछ समय दे पाओ तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा। अब मैं उसे अपने ऑफिस से आने के बाद थोड़ा समय दे दिया करता हूं और हम लोग कहीं शांत जगह पर घूमने चले जाते हैं। हम दोनों की बहुत ही अच्छे से बात होती है।

एक बार कविता ने मुझे फोन किया और कहने लगी कि मुझे तुमसे कुछ जरूरी काम है क्या तुम मुझसे मिल सकते हो। मैंने उसे कहा ठीक है तुम मुझे मिल जाओ मैं उससे मिलने चला गया। वह मुझे कहने लगी कि मेरा  आकाश के साथ डिवोर्स हो चुका है मैं इस बात से बहुत ज्यादा खुश हूं और मैं तुम्हारे साथ आज समय बिताना चाहती हू। मैंने उसे कहा तो तुम्हारी क्या प्लानिंग है वो कहने लगी कि मेरे दोस्त का घर खाली है तो आज हम वहीं पर रुकेंगे। मैंने उसे कहा ठीक है अब हम दोनों वहां चले गए। उसने उस दिन बहुत ही ज्यादा शराब पी ली और मैंने भी शराब पी रखी थी। अब वह मेरे रूम में आ गई और कहने लगी कि मैं आज तुम्हारे साथ ही सो जाती हूं मुझे बहुत ही अकेला महसूस हो रहा है। वह मेरे बगल में ही लेट गई और उसने एक पतली सी नाइटी पहनी हुई थी। जब वह मेरे बगल में लेटी तो उसकी चतडे मेरे लंड पर लगने लगी और मेरा मन खराब हो गया था। मैंने अब उसे कस कर पकड़ लिया और उसके स्तनों को उसकी नाइटी से बाहर निकालते हुए चूसना शुरू कर दिया। मैं उसे बहुत देर से चूसता जाता उसके स्तन बहुत बड़े और गोल गोल थे मै उन्हें बहुत देर से चूस रहा था। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था जब मैं उसे अपने मुंह में लेकर चूसता जाता।

वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गई और उसने भी मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसे बहुत ही अच्छे से सकिंग करना शुरु कर दिया। वह इतने अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी कि मेरा पानी झड़ने लगा। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसकी चूत में उंगली डाल दी और ऐसे ही अंदर बाहर करने लगा। थोड़े समय बाद मैंने अपने लंड को उसकी योनि में डाल दिया और जैसे ही मैंने उसकी योनि में डाला तो वह बड़ी तेज आवाज में चिल्लाती जाती। वह इतनी तेज चिल्ला रही थी कि मेरे कानों में उसकी आवाज जाती तो मैं उसे और भी तेज गति से चोदने लगता। मैं इतनी तीव्र गति मे उसे झटके मार रहा था कि उसका पूरा शरीर हिलने लगा और उसे बहुत ही मज़ा आ रहा था। वह भी पूरे मजे में आ चुकी थी और अब वह झड़ने वाली थी तो उसने अपने पैरों को कसकर मुझे उनके बीच में जकड़ लिया और मैं भी बड़ी तीव्र गति से धक्के देते जाता। उसी झटको के बीच में ना जाने मेरा वीर्य कब गिर पड़ा और मुझे मालूम ही नहीं पड़ा। वह सीधा ही उसकी योनि के अंदर चला गया और मुझे बहुत ही आनंद की अनुभूति हुई। मुझे ऐसे लगा ना जाने मेरी इच्छा कितने समय बाद पूरी हो रही है और कविता भी मुझे कहने लगी मुझे तुमसे अपनी चूत मरवा कर बहुत ही मजा आ रहा है। अब कविता का जब भी मन होता तो वह मुझे फोन करके बुला लेती है और मैं उसे चोद आता था।