डांस की दीवानी

kamukta, desi kahani

मेरा नाम अरुण है और मेरी उम्र 26 साल है। मुझे नशे की बहुत गंदी आदत थी। जिसकी वजह से मेरे घर वाले बहुत परेशान रहते थे। मुझे कुछ भी समझ नहीं आता था कि मैं नशे में कहां जा रहा हूं या मेरे साथ क्या हो रहा है। नशे के चलते मेरे घरवालों ने मुझे कई बार नशा मुक्ति केंद्र भी भेज दिया लेकिन मेरा नशा छूट ही नहीं रहा था। मैं खुद भी चाहता था कि मैं यह नशा छोड़ दूं लेकिन मुझसे यह सब हो ही नहीं रहा था। मेरे घर वालों ने उसके बावजूद भी मेरा बहुत साथ दिया और हर जगह वह मेरे साथ ही खड़े रहे। मेरे घर में मेरे माता-पिता और मेरे एक बड़े भैया हैं। उन सब लोगों ने मेरा बहुत ही साथ दिया है लेकिन उसके बावजूद भी मैं नशे से दूर नहीं हो पाया। जिसकी वजह से मेरे सारे दोस्तों ने भी मेरा साथ छोड़ दिया और अब मैं ज्यादा से ज्यादा घर पर ही रहता था लेकिन मुझे अब डिप्रेशन होने लगा था और मैं डिप्रेशन का शिकार भी होने लगा था। मैं दिन भर सिर्फ चिंता में ही डूबा रहता था। मेरे दिमाग में टेंशन रहती था। मेरा शरीर भी बहुत कमजोर हो गया था। जिससे मेरे घर वाले बहुत चिंतित हो गए थे। हमारे ही परिचय में मेरे भैया के एक दोस्त थे, तो उन्होंने हमे एक डॉक्टर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वहां शायद मेरा इलाज अच्छे से हो सके।

मेरे पिताजी मुझे उन डॉक्टर के पास ले गए। वह एक लेडी डॉक्टर थी। बहुत ज्यादा अच्छे से बात कर रही थी और उन्होंने मुझसे अच्छे से बात की। उन्होंने मुझसे पहले तो यह पूछा कि मैं नशे की लत में कैसे पड़ा। मैंने उन्हें सारा कुछ अपने बारे में बताया। कि मैं अपने दोस्तों के साथ पहले जाया करता था। उन्हें भी नशे की आदत थी। उसके बाद हम सबको नशे की लत लगती गई। उनमें से एक दो तो मर भी चुके हैं। वह बहुत ही ज्यादा नशा करते थे। वह डॉक्टर हमसे अच्छे से बात करने लगी। फिर उसने मेरे घर वालो को बताया कि मुझे कुछ दिन के लिए वही हॉस्पिटल में रखना पड़ेगा। उन्होंने मुझे हॉस्पिटल में कुछ दिनों के लिए रख लिया। वह मुझसे एक दोस्त की तरीके से बर्ताव करती थी। मैंने उनका नाम पूछा तो उनका नाम कुसुम था। वह एक शादीशुदा महिला थी। अब वह भी काफी चीजें मेरे बारे में जान चुकी थी तो वह मुझसे एक दोस्त के तरीके से बात किया करती थी। मुझे भी काफी समय बाद कोई ऐसा मिला था। जिससे कि मैं खुल कर बात कर सकता था। जितने दिन भी मैं वहां पर रहा तो मैंने उनसे काफी अच्छे तरीके से बात की। मेरे नशे की लत धीरे-धीरे छूटने लगी थी। जिससे मेरे घर वाले भी बहुत खुश थे और कुसुम मैडम भी बहुत खुश थी। मेरा नशा पूरी तरीके से छूट चुका था और अब मैं अपने घर पर वापस आ गया था। मेरे घर वालों ने डॉक्टर का बहुत ही शुक्रिया किया और मैं अपने नशे से पूरे तरीके से आजाद हो चुका था। मैं कभी-कभी उन्हें मिलने उनके हॉस्पिटल चला जाया करता था। वह भी मेरे एक मित्र की तरह ही बन चुकी थी। तो वह हमेशा मुझसे पूछती रहती थी कि अब तुम्हारा स्वास्थ्य कैसा है। मेरी सेहत में भी सुधार होने लगा था और मैं अच्छे से अपनी जिंदगी जी पा रहा था।

एक दिन में डॉक्टर कुसुम को मिलने उनके क्लीनिक में चला गया। वह मुझे देखकर बहुत खुश हुई जैसे ही मैं उनके क्लीनिक पहुंचा तो वह मुझे पूछने लगी कि अब तुम्हारा स्वास्थ्य कैसा है। मैंने उन्हें बताया कि मेरा स्वास्थ्य तो बहुत ही अच्छा है और अब मैं काफी अच्छे से जीवन में जी पा रहा हूं। यह सब आप की ही बदौलत है यदि आप मेरी मदद नहीं करती तो शायद मैं इस नशे की लत से नहीं निकल सकता था। मैंने उन्हें कहा कि आपने मेरी बहुत ज्यादा मदद की है। वह मुझे कहने लगी वह तो मेरा फर्ज था इस वजह से मैंने तुम्हारी मदद की यह सब तो मैंने करना ही था यदि मैं नहीं करती तो कोई और डॉक्टर करती। लेकिन मैंने उन्हें बोला कि जिस तरीके से आपने मुझे समझाया और मेरा साथ दिया उससे मुझे बहुत ही अच्छा लगा।

मैंने उन्हें अपने दिल की बात बताई और कहने लगा कि आप मुझे बहुत ही अच्छी लगती हो आपका नेचर भी एकदम शांत स्वभाव है जो कि मुझे अपनी और आकर्षित करता है। बातों बातों में मैंने उनसे पूछ लिया क्या आपकी शादी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मेरी शादी तो हो चुकी है लेकिन मेरा डाइवोर्स हो गया है। मैंने उन्हें बताया आप जैसी महिला को कोई किस तरीके से छोड़ सकता है। मुझे यकीन नहीं आ रहा लेकिन उन्होंने कहा कि हां मेरा डाइवोर्स हो चुका है और अब मैं सिंगल ही रहती हूं। मैं यह सुनकर थोड़ा सोच में पड़ गया कि इन्हें कैसे कोई छोड़ सकता है। तभी मैंने देखा कि उनकी गांड पर कुछ लगा हुआ था और मैंने तुरंत जाकर उनकी गांड पर हाथ मार दिया और उन्हें कहने लगा कि आपकी गांड पर कुछ लगा हुआ है। जैसे ही मैंने हाथ लगाया तो वह एकदम से डर गई। वह मेरे गले लग गई मुझे उनके स्तन बहुत ही अच्छे लग रहे थे जब वह मेरे छाती से रगड़ रहे थे मुझे पूरा महसूस हो रहा था उनके स्तनों का रगड़ना मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब वह अपने स्तनों को ऐसे ही मुझसे लगा रही थी। मैंने भी तुरंत उनकी गांड को पकड़ लिया और बड़ी ही तेजी से दबा दिया। जैसे ही मैंने उनकी गांड को दबाया तो वह एकदम से उछल गई और मुझे कहने लगी कि तुम यह क्या कर रहे हो। मैंने मैडम से कहा कि यह मेरे अंदर से सेक्स भावना जाग उठी थी इसलिए मैं आप की गांड को दबा रहा हूं। वह यह सुनकर काफी डर गई और मुझे कहने लगी क्या तुम मेरी चूत मारोगे मैंने उन्हें हां कह दिया और तुरंत ही अपने लंड को बाहर निकाल लिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो उसे देखकर वह डर गई और कहने लगी मैंने आज तक इतना मोटा लंड कभी नहीं देखा है।

जब उन्होंने यह सब मुझे कहा तो मेरी छाती और ज्यादा चौड़ी हो गई। जैसे ही उन्होंने अपने हाथ में लंड लिया तो मेरा लंड बहुत ज्यादा बड़ा होता चला गया। वह मेरे लंड को बड़े प्यार से हिलाने लगी हिलाते हिलाते उन्होंने ऐसे ही अपने मुंह में मेरे लंड को ले लिया और उन्होंने सकिंग करना शुरू कर दिया। जब वह सकिंग कर रही थी तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। उन्होंने थोड़ी देर तक की ऐसे ही सकिंग करना जारी रखा और मैंने उनके कपड़ों को उतारना शुरू किया। जब मैंने उनके कपड़ों को उतारा तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। अब मैंने उनके स्तनों को देखा तो मैं उन्हें देखता ही रह गया वह इतने ज्यादा गोरे थे कि जैसे ही मैं उन पर अपने हाथ लगाता तो एकदम से लाल हो जाते। मैंने बड़ी तेजी से उन्हें दबाना शुरू किया और कुछ देर में अपने मुंह में भी ले लेता। मैंने उनके निप्पल को भी अपने मुंह में लेना शुरू किया और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उन्हें टेबल पर लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया। जैसे ही मैंने दोनों पैरों को चौड़ा किया तो उनकी चूत मुझे दिखाई दे रही थी। उसमें एक भी बाल नहीं था और मैं भी उसे चाटने लगा।

जब मै चाट रहा था तो उनकी पूरी चूत गिली हो गई। अब मैं उनकी चूत मे उंगली से अंदर बाहर करने लगा मैंने बहुत देर तक अंदर बाहर करना जारी रखा। मैने उनकी चूत मे अपने लंड को अंदर घुसा दिया जब मैंने अपने लंड को अंदर डाला तो उनके मुंह से चिख निकलने लगी और वह कहने लगी तुम तो बड़े ही अच्छे से कर रहे हो। यह सुनकर मुझे और भी अच्छा लगने लगा।  मैं और तेजी से धक्का मारता तो उनकी आवाज मेरे कानों में आ रही थी वैसे ही उन्हें बड़ी तेजी से झटके मारने लगा। मैंने जब उनकी चूतड़ों को पकड़ा तो उनका शरीर थोड़ा गर्म हो चुका था। अब उन्होंने मुझे अपने पैरों के बीच में बड़ी तेजी से कस कर जकड़ लिया लेकिन मैंने भी उतनी तेज झटके मारने शुरू कर दिए थे। उनके स्तन हिलते जाते मै उन्हें अपने हाथों से दबा रहा था। मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब मैं उनके स्तनों को अपने हाथ से दबा रहा था। उनकी चूत की गर्मी मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हुई और मेरा वीर्य पतन हो गया। मैंने अपना सारा माल उनकी योनि में डाल दिया। वह भी मुझसे बहुत खुश थी और कुछ समय बाद मैंने उनसे शादी कर ली। अब वह मेरी पत्नी बन चुकी है और मैं उनकी हमेशा चूत मारता हूं।