चूत में कभी कभी

antarvasna sex stories, desi kahani

मेरा नाम संतोष है और मैं एक बहुत बड़ा व्यापारी हूं। मेरे घर में मेरी पत्नी अनुराधा और मेरे दो छोटे बच्चे हैं। जो कि बोर्डिंग स्कूल में ही पढ़ते हैं और वह बहुत कम ही घर पर आते हैं। मेरी पत्नी अनुराधा का भी अपना ही कपड़ों का छोटा सा कारोबार है। इसलिए वह भी ज्यादातर समय वही पर रहती है और हम दोनों ही अपने कामों में व्यस्त रहते हैं। मैं फिर भी अब थोड़ा समय निकाल लेता हूं क्योंकि शुरुआती दौर में मैंने बहुत ज्यादा मेहनत की थी इस मुकाम तक पहुंचने के लिए। मुझे बहुत ज्यादा पापड़ बेलने पड़े। मुझे अभी भी यह बात पता है की किस तरीके से मैं यहां तक पहुंचा हूं लेकिन अब मैं सब कुछ सेट कर चुका हूं। इसलिए मैं थोड़ा समय अपने लिए भी निकालना चाहता हूं। परंतु मेरी पत्नी अनुराधा के पास अब समय नहीं होता है। जब पहले उसके पास मेरे लिए समय था तब तो  मैं उसे समय नहीं दे पाया और अब मेरे पास उसके लिए टाइम है तो वह मेरे लिए अब टाइम नहीं निकाल पाती। मुझे कई बार इस बारे में सोचकर बहुत ज्यादा दुख भी होता है कि मैंने उसके साथ गलत किया है। क्योंकि वह मुझसे हमेशा ही कहती रहती थी कि तुम्हें मुझे टाइम देना चाहिए लेकिन मैं तब भी उसे टाइम नहीं दे पाता था और कुछ ना कुछ कहकर उसे टाल ही देता था। परंतु समय के साथ मुझे भी एहसास होने लगा कि मुझे उसे थोड़ा समय देना चाहिए था।

हमारा एक ड्राइवर है जिसका नाम संजय है। वह हमारे घर पर बहुत पहले से काम कर रहा है। जब मैंने शुरुआती दौर में अपने काम को मैंने शुरू किया था तब से वह मेरे साथ ड्राइवर है और वह बहुत ही ईमानदार व्यक्ति है। उसे जब भी कुछ भी आवश्यकता पड़ती तो मैं उसे हर एक चीज के लिए हां कह देता और उसे मैंने कभी भी आज तक कुछ भी चीज के लिए मना नहीं किया था लेकिन अब अनुराधा के पास भी समय नहीं हो पाता था कि वह घर का काम संभाल सके और ना ही मुझे कुछ काम करना आता था। इस वजह से 1 दिन मैंने संजय से बात रखी थी की  क्या तुम्हारी पहचान में कोई घर का काम संभालने वाली मिल जाएगी। वह कहने लगा कि साहब मेरी पत्नी भी कुछ दिनों से काम ढूंढ रही थी। तो अगर आप उसे ही अपने घर पर काम पर रख लें तो मेरे लिए भी अच्छा हो जाएगा। तो मैंने उसे तुरंत ही हां कह दिया और इस बारे में मैंने अनुराधा से भी बात की। वह कहने लगी कि ठीक है। वह घर का भी काम कर लिया करेगी और कुछ समय मेरे साथ मेरे ऑफिस भी चल लिया करेगी। मैंने उसे कहा ठीक है तुम उसे अपने ऑफिस भी ले जाया करना जब तुम्हें कुछ ऑफिस का काम हो। अब संजय अगले दिन अपनी पत्नी को मुझ से मिलाने के लिए ले आया।

उसने जब मुझे अपनी पत्नी से मिलाया तो उसका नाम मीना था। वह ज्यादा पढ़ी-लिखी तो नहीं थी पर मैंने उसे घर का सारा काम समझा दिया कि तुम्हें किस तरीके से घर में काम करना है। वह भी समझ गई कि घर में क्या काम है। अब वह भी हमारे घर में एक सदस्य की तरह ही थी और हमारे घर का अच्छे से काम कर रही थी। संजय भी इस बात से बहुत ज्यादा खुश था और वह मुझे कहने लगा कि साहब आपके हम पर बहुत ज्यादा उपकार हैं। जब भी मुझे आपकी जरूरत पडी तब आपने हमेशा मेरा साथ दिया है। मैंने उसे कहा तुम मुझे इस बात से शर्मिंदा मत करो। तुम भी मेरे साथ इतने समय से हो जब मैंने शुरुआती दौर में काम शुरू किया था। तब तुम्हे मेरी स्थिति के बारे में तो पता ही था।  मैंने कितनी मुश्किल से अपने काम की शुरुआत की है। मेरे पास तो पैसे भी नहीं हुआ करते थे और मुझे लोगों के पैसे भी देने पड़ते थे लेकिन उसके बाद तुमने कई बार अपनी सैलरी के लिए मुझे कुछ नहीं कहा। कभी थोड़ा बहुत आगे पीछे भी हो जाती तो तुम उस चीज को अट्जस्ट कर लेते थे। मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे घर पर और कौन-कौन है। वह कहने लगा कि मेरे घर पर मेरी मां हैम जो कि मेरे बच्चों का ध्यान रखती है। मैंने उसे कहा चलो यह तो बहुत अच्छी बात है कि तुम्हारे घर पर तुम्हारी मां भी है। अब जब मैं घर वापस लौटता तो मीना मेरे लिए खाना बना कर रखती थी। और अनुराधा को आने में काफी देर हो जाती तो वह भी आकर खाना खा ली थी। कभी कबार वह भी उसे अपने ऑफिस में ले जाया करती थी और ऑफिस का भी उसे काम सिखाने लगी थी। वह अब काफी सारे काम सीख गई। मैं भी अपने काम के सिलसिले में कभी कबार अन्य शहरों में चला जाया करता था और जब वापस लौटता तो मैं देखता क्या अनुराधा घर पर नहीं है। वह अपने काम पर जा चुकी होती थी। कुछ दिनों के लिए हमारे बच्चे घर पर छुट्टी मनाने आए। उस दौरान थोड़ा समय निकालकर अनुराधा घर पर ही रही और मीना ने भी उनका बहुत ज्यादा ध्यान दिया। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था कि हमारे बच्चे घर पर हैं और उनके साथ हमने बहुत अच्छा टाइम बिताया लेकिन अब उनकी छुट्टियां खत्म होने वाली थी और वह वापस अपने स्कूल जाने वाले थे। मुझे थोड़ा बुरा भी लग रहा था उन्हें इस वक्त भेजते हुए लेकिन मैं क्या करता अब मुझे अपने अकेलेपन का भी एहसास होने लगा। क्योंकि बच्चे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे और अनुराधा भी अपने काम पर ही लगी रहती थी।

एक दिन मैं घर पर ही था तो मीना  सफाई कर रही थी और जब वह सफाई कर रही थी तब उसके बड़े बड़े स्तन मुझे दिखाई दे रहे थे। जिससे कि मैं उसकी तरफ मोहित होने लगा। मैंने तुरंत ही उसे अपनी बाहों में भर लिया वह भी थोड़ा शर्माने लगी। फिर मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हें कुछ पैसे दूंगा तुम आज मेरा मन बहला दो। वह मेरी बातों को मान गई और उसने अपने ब्लाउज को खोलते हुए अपने स्तनों को मेरे मुंह के अंदर डाल दिया। जैसे ही उसने अपने स्तनों को मेरे मुंह में डाला  मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और वह ऐसे ही अपने स्तनों को मेरे मुंह के अंदर डाले जा रही थी। अब मैंने भी उसके स्तनों को कसकर पकड़ लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया। मैंने बहुत देर तक उसके स्तनों का रसपान किया। उसके बाद मैंने उसके होठों को भी किस करना शुरू कर दिया। अब मैंने उसकी साड़ी को ऊपर करते हुए उसे अपने बिस्तर पर लेटा दिया। थोड़ी देर तक तो मैंने उसकी चूत मे उंगली कि जिससे कि उसका पानी निकलने लगा। मैंने तुरंत ही अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया। जैसे ही मैंने उसकी चूत मे अपने लंड को डाला वह बड़ी तेज गति से चिल्लाने लगी। वह मुझे कहने लगी साहब लगता है आप मेरी आज चूत का भोसड़ा बना कर रहेंगे। मैंने उसे कहा तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारे साथ कुछ नहीं करूंगा लेकिन मैं उसे बहुत ही गंदे तरीके से चोद रहा था। जिससे कि उसका पूरा शरीर हिल रहा था और उसके स्तनों को मैंने अपने मुंह में ले लिया और मैं बहुत देर तक उसे ऐसे ही चूसता रहा। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था वह भी मेरा साथ देने लगी और ऐसे ही अपनी चूतड़ों को मटकाने लगी लेकिन मेरी इच्छा नहीं भर रही थी।

मैंने उसके दोनों पैरों को कस कर दबा दिया और उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाना शुरू किया। मैं ऐसा चाहता था कि उसके अंदर ही घुस जाऊं लेकिन ऐसा संभव नहीं था। मैंने ऐसे ही उसे झटके मारना आरंभ कर दिया। मैंने बड़ी तीव्र गति से उसे चोदना शुरू किया जिससे कि वह बड़ी तेज चिल्लाती जाती और मुझे कहने लगी कि आपके साथ सेक्स करने में मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा है। मैंने भी अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह के अंदर डाल दिया। उसने इतने अच्छे से मेरे लंड को चूसा की मेरा सारा वीर्य उसके मुंह के अंदर ही गिर गया और मुझे बहुत ज्यादा शांति मिली। मुझे ऐसा लगा जैसे मानो कितने समय बाद मैंने अच्छे से सेक्स किया हो और उसने मेरी सारी इच्छाओं को पूरा कर दिया था। मैंने उसके बदले उसे कुछ पैसे भी दिए जिससे वह बहुत खुश हो गई और कहने लगी मैं अबसे आपकी हर इच्छा पूरी कर दिया करूंगी। जब भी आपको कुछ भी आवश्यकता हो तो आप मुझे बता देना। यह कहते हुए वह वहां से चली गई। मेरा जब भी मन होता तो मैं उसकी चूत मे अपने लंड को डाल देता और उसे कुछ पैसे दे देता।