चूत मरवाकर अपनी इच्छा पूरी की

antarvasna chudai, kamukta

मेरा नाम कविता है में बिजनौर के रहने वाली हूं, मेरी शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं परंतु मैं अपने पति से बिल्कुल भी खुश नहीं हूं। मेरे पति का नाम दिनेश है और जब हमारी शादी हुई थी उस वक्त वह बहुत ही अच्छे से मेरे साथ रहते थे परंतु जैसे जैसे वक्त बीतता गया तो वह मुझे अब बिल्कुल भी समय नहीं देते हैं। मेरी एक 3 साल की लड़की है। मेरे पति मुझे बिल्कुल समय नहीं देते इसलिए मुझे बहुत ही बुरा लगता है। मैंने कई बार उनसे इस बारे में बात की लेकिन वह कहते हैं यदि मैं काम नहीं करूंगा तो फिर घर का खर्चा कैसे चलेगा इसीलिए मैं अब उन्हें ज्यादा नहीं बोलती और मैं भी अब सिर्फ अपने घर के काम में लगी रहती हूं। हम लोग बिजनौर में काफी समय से रह रहे हैं।

मेरे पति के माता पिता गांव में ही रहते हैं, वह कभी कबार हमसे मिलने आ जाते हैं। मेरे पति ने कई बार उनसे इस बारे में बात की, की आप हमारे पास ही रहने आ जाइए परंतु वह आना नहीं चाहते और कहते हैं कि हम लोग गांव में ही खुश हैं इसी वजह से वह लोग हमारे पास नहीं आते। मैंने भी उनसे कई बार कहा कि आप लोग हमारे पास ही रह लीजिए लेकिन उन्होंने मेरी भी बात नहीं मानी। दिनेश का व्यवहार बिल्कुल ही बदल गया है, वह पहले की तरह बिल्कुल नहीं रह गए। पहले हम लोग हफ्ते में एक बार घूमने चले जाया करते थे परंतु अब वह मुझे कहीं भी नहीं लेकर जाते है मुझे बहुत बुरा लगता है। मैं अपनी छोटी बच्ची की देखभाल करती हूं और मैं घर पर अकेली हूं क्योंकि वह अपने काम पर चले जाते हैं इसलिए मैं घर पर बोर होती हूं। शाम को मैं टहलने के लिए चली जाती हूं क्योंकि पड़ोस में कुछ महिलाएं मेरी दोस्त हैं इसलिए मैं घूमने के लिए उनके साथ ही चली जाती हूं। मेरे माता-पिता भी बिजनौर में ही रहते हैं लेकिन मुझे उनके पास जाने का भी समय नहीं मिल पाता क्योंकि मुझे अपनी छोटी बच्ची की देखभाल करनी होती है और शाम को दिनेश घर आ जाते हैं तो उनके लिए खाना भी बनाना होता है इसी वजह से मैं इन्हीं कामों में उलझ कर रह गई हूं।

मैं अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं निकाल पाती, ना ही मैं अपने आपसे खुश हूं। शादी से पहले मैं प्राइवेट बैंक में नौकरी करती थी लेकिन शादी के बाद मैं कहीं भी नौकरी नहीं कर पा रही हूं और ना ही मैं किसी नौकरी के लिए अप्लाई कर सकती हूं। मेरी जितनी भी सहेलियां हैं वह सब अपने पति के साथ कहीं ना कहीं घूमने जाते हैं और वह लोग मुझे अपनी फोटो भेजते रहते हैं, मैं जब उनकी फोटो देखती हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है कि कम से कम उनके पति उन्हें घुमाने के लिए लेकर जा रहे हैं परंतु मेरे पति के पास तो बिल्कुल भी समय नहीं है। दिनेश सुबह घर से जल्दी चले जाते हैं और शाम को भी वह देरी से ही घर लौटते हैं। एक दिन मैं छत में टहल रही थी तो मेरी बच्ची भी मेरे साथ ही थी, तभी सामने वाले घर से एक लड़का मुझे बहुत देर से घूर कर देख रहा था। मैंने पहले तो उसे इग्नोर करने की कोशिश की पर जब वह बहुत देर से मुझे एक टक नजरों से देख रहा था तो मैंने उसे कहा तुम मुझे इतनी देर से क्यों देख रहे हो वह कहने लगा कि मैं आपकी बच्ची को देख रहा हूं, वह बहुत ही अच्छी है। अब वह हमसे बात करने लगा। मैंने उसे पूछा कि तुम यहीं रहते हो, वह कहने लगा नहीं मैं कुछ दिनों पहले ही यहां आया हूं। मैंने उसे पूछा कि तुम यहां पर क्या करते हो तो वह कहने लगा मैं यहां पर होटल में काम करता हूं और मुझे अभी कुछ ही समय हुआ है यहां आए हुए। मैंने उस लड़के का नाम पूछ लिया उसका नाम राज है। मैंने उसे बोला कि तुम आज अपने काम पर नहीं गए, वह कहने लगा कि मेरी रात को शिफ्ट होती है मैं रात के समय ही जाता हूं और सुबह लौट आता हूं। मैं जब भी शाम के समय टहलने जाती तो राज मुझे अक्सर दिख जाता था और वह भी मुझसे मेरे हाल-चाल पूछ लिया करता था। वह मुझसे एक दिन पूछने लगा आपके पति क्या करते हैं, मैंने उसे बताया कि मेरे पति अपना ही काम है और वह अपना ही कारोबार देखते हैं। वह मुझे कहने लगा की यह तो बहुत ही अच्छी बात है कि आपके पति का अपना ही कारोबार है, नहीं तो हम लोग तो बहुत परेशान हो गए हैं, नौकरी से हमें बिल्कुल भी फुर्सत नहीं मिल पाती।

मैंने उसे कहा कि मेरी पति कौन सा मुझे वक्त दे पाते हैं, उनके पास भी बिल्कुल समय नहीं होता और वह सुबह ही घर से चले जाते हैं और शाम को देर से घर लौटते हैं। जब मैंने राज से यह बात कही तो वह कहने लगा क्या वाकई में आपके पति आपको बिल्कुल भी समय नहीं देते, मैंने उसे कहा नहीं, उनके पास बिल्कुल भी समय नहीं होता यह कहते हुए वह चला गया और मैं भी छत से अपने बच्चे को लेकर नीचे अपने घर पर आ गई। एक दिन मेरी एक सहेली का फोन आया और वह कहने लगी कि हम लोग विदेश घूमने के लिए जा रहे हैं, मैंने उसे कहा कि तुम्हारे पति तो बहुत अच्छे हैं। यहां तो मेरे पति कहीं भी मुझे घुमाने के लिए नहीं लेकर जाते, उनके पास तो मेरे लिए बात करने का भी समय नहीं है। जब मैंने उसे यह बात कही तो मुझे बहुत ही दुख हो रहा था। मेरी सारी सहेलियां बहुत खुश थी और मैं अंदर ही अंदर से बहुत ज्यादा दुखी थी क्योकि मेरे पति के पास मेरे लिए बिल्कुल भी समय नही है। मेरी दिनचर्या बस मेरे घर तक ही सीमित रह गई थी और कभी मैं सब्जी लेने के लिए शाम के वक्त अपनी बगल की सहेलियों के साथ चली जाती थी या फिर मुझे कभी-कभार छत पर राज मिल जाता था और मैं उसे ही थोड़ी देर बात कर लिया करती। मैंने एक दिन घर पर पोर्न मूवी देखी तो उस दिन मेरा मूड बहुत ज्यादा खराब हो गया था क्योंकि मेरे पति तो मुझे बिल्कुल भी चोदते नहीं थे।

मैं जब कपड़े लेने के लिए छत पर गई तो राज वहां पर खड़ा था मैं उससे बात करने लगी और मैं अपने स्तनों को दबा रही थी। मैंने उसे कहा कि मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा अब वह मेरे घर आ गया और जब वह मेरे घर पर आया तो मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए जब उसने मेरी योनि को देखा तो मेरी चूत से पानी टपक रहा था। उसने काफी देर तक मेरे होठों को चूसना जारी रखा और उसके बाद उसने मेरे स्तनों का रसपान किया। वह बहुत ही अच्छे से मेरे स्तनों का रसपान कर रहा था और मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था जब वह मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था। उसने मुझे अब बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मेरी योनि को चाटने लगा। मेरी योनि से बहुत ज्यादा पानी बाहर की तरफ निकल रहा था और वह पूरा पानी चाट लेता उसने बहुत देर तक मेरी योनि को चाटा जिससे कि मेरे अंदर की उत्तेजना बहुत बढ़ चुकी थी। राज ने अपने लंड को निकालते हुए मेरे मुंह में डाल दिया मैंने उसके लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले लिया और बहुत अच्छे से चूसने लगी। मैंने काफी देर तक उसके लंड को चूसा जिससे कि उसका भी पानी मेरे मुंह में गिरने लगा। वह पूरी उत्तेजना में आ गया और उसने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मेरी योनि के अंदर जैसे ही अपने लंड को डाला तो मैं चिल्लाने लगी और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। जब वह अपने लंड को मेरी योनि के अंदर बाहर कर रहा था तो मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मेरे अंदर से कई सालों की गर्मी बाहर निकल रही है और वह मुझे बड़ी तेजी से झटके दिए जा रहा था। राज ने मुझे इतनी तेज तेज झटके दिए कि मेरा पूरा शरीर हिल जाता और उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। अब वह मुझे इतनी तेजी से धक्के मारता कि मेरे चूचे हिलने लगते और मेरी पूरी चूतडे लाल होने लगी थी। वह मेरे स्तनों को भी अपने हाथों से दबा रहा था और उसने काफी देर तक मेरे यौवन का रसपान किया लेकिन कुछ देर बाद वह मेरी गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और राज का वीर्य मेरी योनि के अंदर ही गिर गया। उसके बाद से अक्सर राज मेरी इच्छा पूरी करने के लिए मेरे घर पर आ जाता है।