चूत मारी चोरी से

Antarvasna, sex stories in hindi: मैं अपनी दीदी से मिलने के लिए दिल्ली गया हुआ था दिल्ली मुझे कुछ जरूरी काम भी था और मैंने सोचा कि क्यों ना मैं दीदी से भी मिल लूं और फिर मैं दीदी से भी मिला। दीदी काफी ज्यादा खुश थी और कुछ समय पहले ही जीजा जी का भी प्रमोशन हुआ था वह भी काफी खुश थे। दीदी की शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं और वह लोग अब दिल्ली में ही रहते हैं इससे पहले जीजा जी अपने परिवार के साथ लखनऊ में रहा करते थे लेकिन उनका ट्रांसफर दिल्ली में हो जाने के बाद उन्होंने दिल्ली में ही घर ले लिया और वह लोग अब दिल्ली में ही रहने लगे हैं। मैं जब उस दिन रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था तो जैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म पर आई तो मैं मैं ट्रेन में बैठा तो मैंने देखा कि मेरे सामने ही एक लड़की अपना सामान रख रही है। वह अपना सामान रख रही थी तो मैंने उसे कहा कि क्या आपको भी लखनऊ जाना है तो वह मुझे कहने लगी कि हां मुझे भी लखनऊ जाना है। मैं उस लड़की की तरफ देख रहा था और वह अब अपनी सीट पर बैठी तो ना चाहते हुए भी मेरी नजर बार-बार उस लड़की की तरफ जा रही थी जिससे कि वह अपने आप को बहुत ही ज्यादा असहज महसूस कर रही थी।

मुझे भी यह अच्छा नहीं लगा इसलिए मैं सबसे ऊपर वाली बर्थ पर चला गया और वहां पर मैं अपने मोबाइल में गाने सुनने लगा लेकिन फिर भी मेरा ध्यान उस लड़की की ओर ही जा रहा था। ना जाने उस लड़की में ऐसी क्या बात थी जो कि मेरा ध्यान बार बार उसकी तरफ ही खिंचा चला जा रहा था और मुझे काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था जब मैं उस लड़की को देख रहा था और मैं काफी ज्यादा खुश भी था। जब मैंने उस लड़की से बात करनी शुरू की तो वह भी मुझसे बात करने लगी वह लड़की अपने आप को कंफर्टेबल महसूस करने लगी थी और वह मेरे साथ अच्छे से बात करने लगी थी उसे मुझसे बात करना अच्छा लगने लगा था। मैंने उस लड़की का नाम पूछा तो उसने मुझे अपना नाम बताया उसका नाम महिमा है और महिमा से बात करके मुझे काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था। जब महिमा मुझसे बात कर रही थी तो मैं भी काफी ज्यादा खुश था हम दोनों की बातें उस दिन काफी देर तक हुई।

जब मैंने उस दिन महिमा से कहा कि क्या तुम्हारा नंबर मुझे मिल सकता है तो महिमा ने मुझे अपना नंबर दे दिया। मुझे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हुआ कि महिमा मुझे अपना नंबर दे देगी लेकिन महिमा मुझे अपना नंबर दे चुकी थी। जब हम लोग लखनऊ रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो मैंने महिमा से कहा मैं तुमसे जल्दी मुलाकात करूंगा महिमा कहने लगी कि हां क्यों नहीं हम लोग जरूर एक दूसरे को मिलेंगे। कुछ दिनों बाद मैंने जब महिमा को फोन किया तो महिमा का नंबर ही नहीं लग रहा था मुझे लगा कि शायद महिमा ने मुझे अपना गलत नंबर दे दिया और महिमा चाहती ही नहीं थी कि वह मुझे अपना नंबर दे इसलिए मैंने उसके बाद उसे फोन नहीं किया। काफी समय हो गया था मैंने महिमा से फोन पर बात ही नहीं की थी लेकिन एक दिन महिमा का मुझे फोन आया तो मैंने महिमा से कहा कि मैंने तुम्हें पहले फोन किया था लेकिन तुम्हारा नंबर लगा नहीं था। महिमा ने मुझे कहा कि दरअसल मेरा फोन खराब हो गया था और इसी वजह से मैंने भी तुम्हें फोन नहीं किया मैंने महिमा से पूछा तुम कैसी हो तो महिमा ने मुझे बताया मैं तो अच्छी हूं।

महिमा ने मुझे कहा कि आप कैसे हैं मैंने महिमा को कहा मैं भी अच्छा हूं महिमा और मैं एक दूसरे से फोन पर बातें कर रहे थे तो मुझे महिमा से बात कर के काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था और महिमा को भी मुझसे बात कर के बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था। हम दोनों ने एक-दूसरे से काफी देर तक बातें की उसके अगले दिन भी महिमा का मुझे फोन आया और अब हम दोनों एक दूसरे से फोन पर रोज बातें करने लगे थे। मैं जब भी महिमा से फोन पर बातें नहीं करता तो मुझे ऐसा लगता जैसे कि मेरा दिन अधूरा ही रह गया हो और मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता लेकिन अब मैं और महिमा एक दूसरे से फोन पर काफी ज्यादा बातें करने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे से इतने ज्यादा बातें करने लगे मैं चाहता था मैं महिमा से मुलाकात करूं। मैंने जब महिमा को मिलने के लिए कहा तो महिमा भी मेरी बात मान गई और वह जब मुझे पहली बार मिली तो महिमा काफी ज्यादा खुश थी और मैं भी काफी ज्यादा खुश था। मैंने और महिमा ने उस दिन साथ में काफी अच्छा समय बिताया यह पहला दिन था जब हम दोनों एक दूसरे को मिल रहे थे इससे पहले ट्रेन में भी हम लोगों की बात कुछ खास नही हुई थी और हम लोग उस दिन पहली बार ही एक दूसरे को मिले थे उस दिन महिमा ने मुझसे इतनी खुलकर बातें नहीं की थी लेकिन अब महिमा मुझसे खुलकर बातें करने लगी थी और हम दोनों की मुलाकातों का सिलसिला बढ़ने लगा था।

हम दोनों एक दूसरे से ज्यादा से ज्यादा मिलने की कोशिश किया करते जब भी हम दोनों एक दूसरे को मिलने की कोशिश करते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता जिससे कि मैं काफी ज्यादा खुश हो जाता और महिमा भी बहुत ज्यादा खुश हो जाती। हम दोनों  के बीच दोस्ती काफी ज्यादा अच्छी हो गई थी लेकिन अब यह प्यार में बदलने लगी थी। मैं महिमा को प्यार करने लगा था और महिमा मुझे प्यार करने लगी थी लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि महिमा के परिवार वाले बहुत ही ज्यादा पुरानी मानसिकता के हैं। जब उन्हें महिमा और मेरे बीच के रिश्ते के बारे में पता चला तो उन लोगों ने हम दोनों का मिलना और फोन पर भी बातें बंद करवा दिया। महिमा से मेरा किसी भी प्रकार से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था काफी समय हो गया था मैंने महिमा से बात भी नहीं की थी लेकिन एक दिन महिमा का मुझे फोन आया और उस दिन उसने मुझसे बात की तो मुझे काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था। महिमा ने मुझसे चोरी छुपे ही फोन पर बातें की थी और मैं काफी ज्यादा खुश था कि महिमा से मेरी इतने समय बाद ही सही लेकिन फोन पर बातचीत हो गयी। मैंने उस दिन महिमा से कहा कि क्या तुम मुझसे मिल सकती हो?

महिमा ने कहा हां क्यों नहीं। उस दिन महिमा मुझसे किसी प्रकार से मिलने के लिए आ गई और वह जब मेरे घर पर आई तो उस दिन घर पर कोई भी नहीं था। मैंने महिमा से कहा तुम्हें कितने दिनों बाद में देख रहा हूं। वह मुझसे मिलकर बहुत ज्यादा खुश थी उसने मुझे गले लगाकर कहा मैं तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करते हूं। मैंने महिमा को कहा मैं भी तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करता हूं। महिमा मुझे कहने लगी हां मुझे पता है। महिमा ने उस दिन मुझे किस कर लिया जब उसने मुझे किस किया तो मुझे भी काफी ज्यादा अच्छा लगा और महिमा को भी बहुत ज्यादा अच्छा लगा। मैं महिमा के गुलाबी होठों को चूम कर उसे पूरी तरीके से उत्तेजित किया जा रहा था और वह भी बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। मैने महिमा की गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ाकर रख दिया था महिमा बहुत ही ज्यादा खुश थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है मैंने महिमा को कहा मुझे आज बहुत ही अच्छा लग रहा है। यह कहकर जब मैंने महिमा के स्तनों को दबाना शुरू किया तो महिमा की गर्मी बढने लगी वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी। महिमा मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है मैंने महिमा को कहा मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। अब हम दोनों को ही इतना अधिक मज़ा आने लगा था कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था और महिमा भी रह नहीं पा रही थी। मैंने महिमा के बदन से उसके कपड़े उतारकर महिमा के स्तनों को चूसना शुरू किया तो महिमा पूरी तरीके से गरम हो गई। वह अपनी उंगली को चूत पर लगाने लगी महिमा बार-बार अपनी उंगली को अपनी चूत पर लगाने की कोशिश कर रही थी जिससे कि मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी।

मैंने महिमा से कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। महिमा ने अपने पैरों को चौडा कर लिया। उसने अपने पैरों को चौड़ा किया और उसकी योनि से पानी बाहर निकल रहा था। महिमा की चूत से इतना ज्यादा पानी निकल रहा था मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाकर अंदर डाला जैसे ही महिमा की योनि के अंदर मेरा मोटा लंड चला गया तो मैंने महिमा से कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। महिमा को बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था मैंने महिमा की योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया। महिमा की योनि के अंदर मैने अपने मोटे लंड को घुसाने के बाद मैंने महिमा की योनि के अंदर बाहर लंड को करना शुरू कर दिया। महिमा को बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा वह जोर से चिल्लाने लगी। महिमा की योनि से बहुत ज्यादा खून निकल रहा था मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। मैंने महिमा के पैरों को आपस में मिला लिया जब मैंने महिमा के पैरों को आपस में मिलाया तो मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैं महिमा को बड़ी तेज गति से धक्के मारने लगा मैं महिमा को तेजी से धक्के मार रहा था।

महिमा को बहुत ज्यादा मजा आ रहा था जब मैं उसे तेज गति से चोद रहा था। महिमा की योनि के अंदर बाहर मेरा लंड होता जा रहा था जिससे कि मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और महिमा के अंदर की गर्मी भी बहुत अधिक होने लगी थी। मैंने महिमा से कहा मुझे तुम्हारी चूत मार कर बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। महिमा ने मुझे कहा तुम मेरी योनि के अंदर ही अपने माल को गिरा दो। मैंने महिमा की योनि के अंदर ही अपने माल को गिराकर महिमा की इच्छा को पूरा कर दिया। महिमा बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी जिस प्रकार से मैंने महिमा की चूत मारकर उसकी इच्छा को पूरा किया उससे वह बहुत ही ज्यादा खुश थी। मैं भी बहुत ज्यादा खुश हो गया था महिमा ने मुझे कहा मुझे अब चलना चाहिए। महिमा की चूत से खून निकल रहा था महिमा उस दिन घर चली गई। हम दोनों एक दूसरे को चोरी से मिलने लगे अभी भी हम दोनों एक दूसरे को बहुत ज्यादा प्यार करते हैं लेकिन महिमा के परिवार वाले अभी भी हमारे रिश्ते को स्वीकार नहीं कर पाए हैं परंतु हम दोनों एक दूसरे को हमेशा ही खुश करने की कोशिश किया करते हैं।