चूत का भोसडा बनाने का मजा

Antarvasna, hindi sex story: एक दिन दिव्या मेरे पास आई, दिव्या मेरे कॉलेज की फ्रेंड है और उस दिन मैं घर पर ही था दिव्या हमारे पड़ोस में रहती है। जब वह घर पर आई तो मैंने उसको पूछा कि दिव्या आज काफी दिनों बाद तुम घर पर आ रही हो तो वह मुझे कहने लगी कि हां सुरेश मुझे तुमसे कुछ काम था। हम लोगों का कॉलेज खत्म हो चुका था और हम सब लोग नौकरी की तलाश में थे दिव्या ने मुझे बताया कि कल हमारे कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट आने वाला है। मैंने दिव्या को कहा कि हां इसके बारे में मुझे जानकारी है तो वह मुझसे कहने लगी कि सुरेश मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है तो मैंने उससे कहा हां दिव्या कहो ना तुम्हें मुझसे क्या बात करनी है। उसने मुझे रोहन के बारे में बताया और कहा कि वह रोहन से प्यार करती है और आज तक कभी भी उसे वह अपने दिल की बात कह नहीं पाई थी लेकिन वह चाहती थी कि मैं उसकी मदद करूं।

रोहन चंडीगढ़ का रहने वाला है और दिव्या को डर था कि कहीं वह अपने घर चला गया तो उसके बाद शायद उसका उससे कभी भी संपर्क नहीं हो पाएगा इसी डर के चलते उसने मेरी मदद मांगी। मैंने उससे कहा कि ठीक है कल कॉलेज कैंपस प्लेसमेंट के बाद मैं तुम्हें रोहन से मिलवा देता हूं तो वह कहने लगी ठीक है। हम लोगों का जब कॉलेज केंपस प्लेसमेंट हुआ तो मेरा एक कंपनी में सिलेक्शन हो चुका था और मैं बहुत ही ज्यादा खुश था शायद यह दिव्या और रोहन की किस्मत थी कि उन दोनों का सिलेक्शन एक ही कंपनी में हुआ और अब वह दोनों एक साथ ही रहने वाले थे। उस दिन जब मैंने उन दोनों को मिलवाया तो दिव्या पहले तो शरमा रही थी वह रोहन से कुछ कह नहीं पाई। हम लोगों ने अपने कॉलेज की पढ़ाई साथ में की थी लेकिन उसके बावजूद भी दिव्या उससे बिल्कुल भी बात नहीं कर पा रही थी मुझे ही उन दोनों की पहल शुरू करनी पड़ी और मैंने रोहन और दिव्या की बात कराई। उसके बाद दिव्या और रोहन साथ में बैठे हुए थे हम लोग हमारे कॉलेज की कैंटीन में बैठे थे और हमारा यह कॉलेज का आखिरी दिन था। उसके बाद उन दोनों के बीच ना जाने क्या बात हुई और वह दोनों काफी खुश होकर एक दूसरे से बात कर रहे थे। थोड़े ही समय बाद मैं अपनी जॉब के लिए चेन्नई चला गया और दिव्या और रोहन साथ में बेंगलुरु में जॉब कर रहे थे।

एक दिन मुझे दिव्या का फोन आया तो उसने मुझे बताया कि रोहन और उसने शादी करने का फैसला कर लिया है मैंने उन दोनों को उनकी शादी के लिए बधाई दी और कहा यह तो बड़ी अच्छी बात है अगर तुम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया है। मैंने उस दिन दिव्या से काफी देर तक फोन पर बात की और कहा कि चलो आखिर तुम्हे तुम्हारा प्यार मिल ही गया। वह कहने लगी कि सुरेश यह सब तुम्हारी वजह से ही हो पाया है तुम तो जानते हो कि मैं कितनी शर्मीली किस्म की हूं और रोहन से मैं हमारे कॉलेज के दौरान बात कर ही नहीं पाई लेकिन तुम्हारी वजह से हम दोनों की बात हुई और अब हम दोनों ने शादी करने का निर्णय ले लिया है। मैं बहुत ही ज्यादा खुश था मैंने दिव्या को पूछा कि लेकिन तुम दोनों शादी कहां करने वाले हो तो वह मुझे कहने लगी कि हम लोगों ने यहीं बेंगलुरु में शादी करने का फैसला किया है और हमने अपने परिवार वालों को भी इस बारे में बता दिया है। दिव्या बहुत ही ज्यादा खुश थी मैंने उसके बाद कुछ देर तक रोहन से भी बात की, अब उन दोनों की शादी तय हो गई थी। जब उन दोनों की शादी थी तो मुझे भी बेंगलुरु जाना पड़ा और मैं बेंगलुरु चल गया। उन दोनों की शादी बड़े ही अच्छे से वहां पर हुई और फिर मैं शादी हो जाने के वाद वापस चेन्नई लौट गया। शादी हो जाने के करीब 6 महीने के बाद मुझे रोहन का फोन आया मैंने रोहन से बात की और काफी देर तक मैं उससे फोन पर बातें करता रहा तो रोहन ने मुझे बताया कि वह अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत खुश है और दिव्या और वह दोनों ही एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं। रोहन मुझे कहने लगा कि सुरेश अब तुम भी कोई अच्छी सी लड़की देख कर शादी कर लो मैंने उसे कहा अभी फिलहाल मेरा कोई इरादा नहीं है कि मैं शादी करूं मुझे थोड़ा समय चाहिए। रोहन कहने लगा कि अब यह तो तुम्हारे ऊपर है कि तुम्हें शादी कब करनी है।

मैंने उसे कहा हां यह तो तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो लेकिन फिलहाल मेरा अभी शादी करने का बिल्कुल मन नहीं है लेकिन मुझे क्या पता था कि जल्द ही मेरी मुलाकात सुहानी से हो जाएगी। सुहानी से मेरी मुलाकात ऑफिस के एक फ्रेंड ने करवाई सुहानी से जब मैं पहली बार मिला तो मुझे उससे मिलकर बहुत अच्छा लगा उसके बाद तो हम दोनों एक दूसरे से मिलने लगे। सुहानी भी पुणे की रहने वाली थी इसलिए उसके और मेरे बीच काफी जमने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे से काफी बातें किया करते हम लोग एक दूसरे से फोन पर भी बातें करते थे। एक बार सुहानी मुझे कहने लगी कि सुरेश मैं सोच रही थी कि मैं कुछ दिनों के लिए घर चली जाऊं तो मैंने उसे कहा लेकिन तुम घर जाने का प्लान कब कर रही हो। उसने मुझे बताया कि वह बस एक हफ्ते बाद घर जाने के बारे में सोच रही है, मैंने सुहानी को कहा कि मैं भी पुणे जाने के बारे में सोच रहा था तो वह मुझे कहने लगी चलो हम दोनों साथ में ही चलते हैं। उस वक्त हम दोनों साथ में ही पुणे आए थे हम लोग करीब 10 दिनों तक पुणे में रहने वाले थे तो मैं हर रोज सुहानी को मिला करता था हम दोनों के बीच बहुत नजदीकियां बढ़ चुकी थी शायद हम दोनों एक दूसरे के बिना एक पल भी नहीं रह सकते थे इसलिए हम दोनों को एक दूसरे का साथ बहुत ही अच्छा लगने लगा था।

कुछ दिन बाद हम लोग चेन्नई वापस लौट आए थे चेन्नई में मैं हर रोज सुहानी से फोन पर बातें किया करता था कभी कभार उसे मैं मिल भी जाया करता था वह भी बहुत खुश होती थी जब हम दोनों की मुलाकात होती थी। हम दोनों एक दूसरे से प्यार भी करने लगे थे सुहानी मुझ पर बहुत ज्यादा भरोसा करती थी मैं कई बार सुहानी के फ्लैट में भी चला जाया करता था।  एक दिन में सुहानी के फ्लैट में गया था उस दिन सुहानी ने मुझे कहा सुरेश मुझे तुमसे कुछ बात करनी है मैंने सुहानी से कहो तुम्हें मुझसे क्या बात करनी है? वह मुझे कहने लगी मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगी हूं मैं भी उसकी आंखों में देख रहा था उसने उस दिन मुझे आई लव यू कहा। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया उसके स्तन मेरी छाती से टकराने लगे थे हम दोनों एक दूसरे के लिए गर्म होने लगे थे हमारी गर्मी बढने लगी थी हम दोनों एक दूसरे के बिना रह नहीं पा रहा है मुझे यह भी लगने लगा था कि मैं सुहानी के बिना एक पल भी नहीं रह पाऊंगा। जब मैंने उसके पतले और गुलाबी होंठों को चूमना शुरू किया तो उसके बाद हम दोनों एक दूसरे की बाहों में आ चुके थे हम दोनों अपने आप पर बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे मैं उसके होठों को बड़े अच्छे से चूम रहा था जिससे कि उसके अंदर की गर्मी बढ़ ही रही थी मेरे अंदर भी एक अलग आग पैदा होने लगी थी मैं सुहानी को चोदने के लिए तैयार था। मैंने सुहानी की आंखों में देखा तो उसकी आंखों में मेरे लिए बहुत ज्यादा प्यार था मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए उसके कपड़े उतारने के बाद जब उसका नरम बदन मेरे सामने था तो मैं उसके स्तनों को दबाने लगा मुझे बड़ा मजा आने लगा उसके बूब्स को दबाकर मैंने पूरी तरीके से गर्म कर दिया था मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया हुआ था जिससे कि उसके बूब्स को मैं अच्छे से चूस रहा था उसके स्तनों को मैं जिस प्रकार से अपने मुंह में लेकर चूस रहा था उससे मुझे बहुत मजा आ रहा था वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो रही थी।

उसके अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा ही अधिक बढ़ने लगी थी वह मुझे कहने लगी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही हूं मेरे अंदर की आग भी बहुत अधिक हो चुकी थी वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गई थी। उसने कहा तुम जल्दी से मेरी चूत को चाट कर पानी निकाल दो हम दोनों ने एक दूसरे के साथ मजे लेने की सोची हम दोनो 69 पोज मे थे मैंने उसकी गुलाबी चूत को चाटना शुरू किया तो उसने अपने मुंह में मेरे लंड को लेकर उसे बड़े ही अच्छे से चूसना शुरू किया मुझे बहुत ही ज्यादा मज़ा आने लगा। मैंने सुहानी की चूत से पानी निकाल दिया था सुहानी ने भी मेरे लंड से पूरी तरीके से पानी निकाल दिया था हम दोनों ही एक दूसरे की गर्मी को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। मैंने जब उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो मेरा लंड सुहानी की चूत में चला गया जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर गया तो वह जोर से चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी मेरी चूत से खून निकल आया है।

मैंने उसकी तरफ देखा तो वह बहुत ही ज्यादा तड़प रही थी अब मैंने उसे धक्के देने शुरू कर दिए थे मैं जिस प्रकार से उसको चोद रहा था उससे मुझे मजा आने लगा था कुछ देर बाद उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकडना शुरु किया मेरे अंदर अब गर्मी बढ़ने लगी थी मेरे अंदर बहुत ज्यादा आग बढ़ चुकी थी। उसके बावजूद सुहानी और मैं एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे तरीके से सेक्स कर रहे थे हम दोनों ने एक दूसरे के साथ अच्छे से सेक्स का मजा लिया। जब हमारे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ चुकी थी मुझे एहसास होने लगा था मैं ज्यादा देर तक सुहानी को चोद नहीं पाऊंगा और ऐसा ही हुआ मैं सुहानी को ज्यादा देर तक चोद नहीं पाया मेरा माल उसकी चूत में गिर गया। जैसे ही मेरा माल गिरा तो वह खुश हो गई थी और मैं भी बहुत ज्यादा खुश हो गया था। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने माल को गिराने के बाद अपने लंड को बाहर निकाला तो उसकी योनि से मेरा माल बाहर की तरफ को टपक रहा था। मुझे बड़ा ही मजा आया जिस प्रकार से मैंने उसकी चूत के मजे लिए  उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के लिए अक्सर तडपा करते थे और एक दूसरे से सेक्स का मजा लिया करते।