चूत फाडता लंड

Antarvasna, hindi sex kahani: मैं पटना का रहने वाला हूं पटना में ही मैंने अपनी पढ़ाई की और उसके बाद मैं लखनऊ चला गया। लखनऊ में मैं अपनी फैमिली के साथ रहता हूं मेरा परिवार लखनऊ में ही रहता है हम लोगों को लखनऊ में दो वर्ष हो चुके हैं। मैं जिस कंपनी में जॉब करता हूं वहां पर भी मेरी जॉब अच्छे से चल रही है और मैं काफी खुश हूं कि मेरी जॉब बहुत ही अच्छे से चल रही है। मेरी छोटी बहन जो कॉलेज में पढ़ती है और वह एक लड़के से प्यार कर बैठी जब उसने इस बारे में घर पर बताया तो पापा इस बात से बहुत ही ज्यादा गुस्सा हुए और उन्होंने मेरी बहन का कुछ दिनों के लिए कॉलेज जाना भी बंद कर दिया था। मेरी बहन चाहती थी की वह जिस लड़के से प्यार करती है वह उसी से शादी करे लेकिन पापा इस बात के लिए बिल्कुल भी राजी नहीं थे और उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया था लेकिन मेरी छोटी बहन शिखा तो उसी लड़के से शादी करना चाहती थी। मैंने शिखा को समझाया और कहा देखो शिखा अभी तुम कॉलेज में पढ़ रही हो और तुम्हारी उम्र भी नहीं हुई है तुम्हें थोड़ा समय रुकना चाहिए।

मेरी बहन मुझसे अपनी बातों को शेयर किया करती है वह समझ चुकी थी कि मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं उसे भी मेरी बात ठीक लगी और उसने भी कुछ समय के लिए ही सही लेकिन उस लड़के के बारे में घर पर कोई बात नहीं की। ना तो पापा ने उसके बाद इस बारे में कहा और ना ही मैंने इस बारे में कुछ कहा अब घर में सब कुछ ठीक हो गया था पापा भी इस बात से संतुष्ट हो चुके थे कि मेरी बहन अब घर पर इस बारे में बात नहीं करती। शिखा भी कॉलेज के बाद अब एक अच्छी कंपनी में जॉब करने लगी थी और वह काफी ज्यादा खुश थी कि उसकी एक अच्छी कंपनी में जॉब लग चुकी है। एक दिन शिखा ने घर पर अपनी शादी को लेकर बात की तो पापा इस बात पर गुस्सा हो गए लेकिन मेरे और मम्मी के समझाने पर पापा गौतम से मिले। जब वह गौतम से मिले तो उन्हें भी लगा कि गौतम बहुत अच्छा लड़का है और वह भी अब गौतम से शिखा की शादी करवाने के लिए मान चुके थे लेकिन उससे पहले वह गौतम के परिवार से मिलना चाहते थे। गौतम ने अपने परिवार में सब कुछ बता दिया था और जब गौतम के परिवार से पापा मिले तो उन्हें भी अच्छा लगा। गौतम के पिताजी अच्छे पद पर हैं उनका घर भी काफी अच्छा है जिससे कि पापा भी पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुके थे और उन्होंने भी शिखा की सगाई गौतम से करवाने का फैसला कर लिया और जल्द ही उन दोनों की सगाई हो गई।

उन दोनों की सगाई हो जाने के बाद पापा बहुत ही ज्यादा खुश थे कि अब शिखा की सगाई हो चुकी है। शिखा की शादी गौतम के साथ जल्द ही हो गई और पापा ने उन दोनों की शादी में कोई भी कमी नहीं रखी पापा चाहते थे कि शिखा की शादी धूमधाम से हो। शिखा की शादी हो जाने के बाद वह अपने ससुराल जा चुकी थी उसके ससुराल जाने के बाद घर काफी सुना लग रहा था। शिखा के बिना घर में मुझे बिल्कुल भी ठीक नहीं लगता। शिखा काफी दिनों के बाद हमसे मिलने के लिए जब घर पर आई तो मैं शिखा से मिलकर काफी खुश था और शिखा कुछ दिनों तक घर पर ही रहने वाली थी। एक दिन से शिखा और मैं शॉपिंग मॉल में गए हुए थे उस दिन हम कार से वापस लौट रहे थे तो मैंने शिखा से कहा कि मैं अभी कार पार्किंग से कार ले आता हूँ। शिखा कहने लगी कि ठीक है और मैं कार पार्किंग में कार लेने के लिए चला गया जब मैं वापस लौटा तो मैंने देखा कि शिखा के साथ एक लड़की भी थी। जब मैंने उस लड़की को देखा तो वह मुझे अच्छी लगी मैंने उससे पहले उसे कभी भी नहीं देखा था लेकिन जब शिखा ने मेरा परिचय मनीषा के साथ करवाया तो मुझे मनीषा को मिलकर काफी अच्छा लगा। मैं मनीषा से मिलकर बहुत खुश था और मुझे इस बात की भी खुशी थी कि मनीषा जैसी लड़की से मेरी बात हो रही है। पहली नजर में ही जैसे हम दोनों के बीच प्यार होने लगा था और हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे। हमारा रिलेशन अब काफी ज्यादा बढ़ने लगा था और हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे जिससे कि मैं और मनीषा एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताते। शिखा को भी मेरे और मनीषा के रिलेशन के बारे में पता चल चुका था शिखा ने मुझसे इस बारे में कहा तो मैंने शिखा को कहा कि मनीषा बहुत ही अच्छी लड़की है तो शिखा मुझे कहने लगी कि हां भैया मनीषा बहुत ही अच्छी लड़की है। मुझे तो लगने लगा था कि मनीषा से मुझे शादी करने के बारे में सोच लेना चाहिए और फिर मैंने मनीषा से शादी करने का मन बना लिया था। मैंने इस बारे में जब अपने घर पर बात की तो वह लोग भी तैयार हो चुके थे उन्हें कोई एतराज नहीं था मेरे लिए तो यह बहुत खुशी की बात थी कि मेरी और मनीषा की शादी के लिए सब लोग मान चुके थे।

मनीषा भी हमारे घर पर अक्सर आती थी तो पापा और मम्मी से भी उसका परिचय हो चुका था और मनीषा को लेकर सब लोग घर में बहुत खुश है। एक दिन मनीषा और मैं साथ में थे तो मैंने मनीषा से कहा कि घर वाले भी हम दोनों की शादी के लिए मान चुके हैं। मनीषा कहने लगी कि यह तो बहुत ही अच्छा हुआ कि तुमने घर में इस बारे में बात कर ली और सब लोग हम दोनों की शादी के लिए तैयार हो चुके हैं। मैंने मनीषा को कहा चलो कम से कम इस बहाने अब तुम्हारा हमारे घर पर आना जाना तो होने लगा है लेकिन मनीषा अभी मुझसे शादी नहीं करना चाहती थी उसे थोड़ा वक्त चाहिए था। मनीषा का घर पर आना जाना तो था इसलिए जब भी वह घर पर आती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता। हम दोनों साथ में काफी अच्छा समय बिताया करते काफी दिन हो गए थे हम लोग मिल भी नहीं पाए थे। उस दिन मैंने सोचा क्यों ना मैं मनीषा को मिलू। उस दिन मैंने मनीषा को फोन किया मनीषा मुझे कहने लगी मैं तुम्हारे घर पर ही आ जाती हूं और मनीषा घर पर आ गई। वह घर पर आ चुकी थी हम दोनों साथ में बैठे हुए थे। हम दोनों के बीच इससे पहले भी कई बार चुम्मा चाटी हो चुका था लेकिन उस दिन मेरा मनीषा को चोदने का मन था मनीषा भी तैयार हो चुकी थी।

अब हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे मैंने मनीषा को बिस्तर पर लेटा दिया था। मैं मनीषा के होंठो को बहुत अच्छे से चूमने लगा मनीषा को मजा आने लगा था। मनीषा बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी वह मुझे कहने लगी मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी हूं। मै समझ चुका था मनीषा गरम हो चुकी है मैंने मनीषा की चूत को चाटना शुरू कर दिया था। मनीषा की चिकनी  चूत को पहली बार चाटकर मुझे मजा आ रहा था। मनीषा की चूत से पानी निकल रहा था और मेरी जीभ जब मनीषा की चूत के अंदर जा रही थी तो मनीषा मुझे कहती तुम मेरी चूत को चाटते रहो मुझे मजा आ रहा है। अब मेरी भी गर्मी बढ़ चुकी थी मैं पूरी तरीके से गर्म होने लगा था। मनीषा ने मेरे अंडरवीयर से लंड को निकालकर हिलाया और फिर मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे चूसने लगी। मुझे मजा आ रहा था और उसको भी अच्छा लग रहा था। जिस तरह से वह मेरे मोटे लंड को चूस कर मेरे लंड से पानी बाहर निकालती तो उसके अंदर की गर्मी भी अब बढ़ने लगी थी। मनीषा ने मेरे अंदर की गर्मी को बढा दिया था। मैंने मनीषा को कहा मुझे अच्छा लग रहा है तुम मेरे लंड को गले तक लेकर चूसो तो मनीषा ने मेरे लंड को गले तक उतार लिया मुझे मजा आने लगा था। मैंने मनीषा की चूत मे लंड सटाकर अंदर की तरफ डालना शुरू किया। मेरा लंड मनीषा की चूत के अंदर जाते ही वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे बोली मेरी चूत फट गई उसकी चूत से खून निकल आया था। मुझे अब बहुत ही मजा आ रहा था। मैंने मनीषा को कहा मुझे बहुत मजा आ रहा है अब ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे तुम्हारी चूत मारता रहू। मनीषा की चूत से खून निकल आया था। वह मुझे बोली मेरी सील टूट चुकी है। उसकी चूत से खून निकल रहा था वह बहुत तेजी से सिसकारियां ले रही थी। मैं उसको धक्के मारता तो उसकी सिसकिया बहुत ही अधिक हो जाती और वह मुझे कहती मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही हूं। मैंने मनीषा के पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था जब मैंने ऐसा किया तो मनीषा की चूत अब बहुत ज्यादा टाइट महसूस होने लगी। मैं मनीषा को अच्छे से धक्के मारने लगा था। मैं मनीषा की चूत पर प्रहार करता जा रहा था मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी।

मैने अपना माल गिरा दिया फिर मैंने उसको घोडी बना दिया था अभी भी मनीषा की चूत से खून निकल रहा था। उसको घोडी बनाने के बाद मैंने उसकी चूत के अंदर तक अपने लंड को डाल दिया मनीषा की कोमल चूत के अंदर मेरा लंड सेट हो चुका था। मनीषा मुझे कहने लगी मुझे और तेजी से चोदते रहो मुझे मजा आ रहा है। मैंने मनीषा की चूतडो को पकड़ कर उसे धक्के दिए। मुझे बहुत मजा आ रहा था और मेरे अंदर की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैं उसे तेज गति से धक्के मारता जा रहा था मुझे बहुत ही अच्छा लगता। जब मैंने अपने माल को उसकी चूत के अंदर गिराया तो वह खुश हो गई थी।