चूत फाड़ चुदाई की मैंने

Antarvasna, hindi sex story: मैं अपने दोस्त से मिलने के लिए उसके घर गया हुआ था मैं जब अपने दोस्त को मिलने के लिए उसके घर पर गया तो वहां पर मेरी मुलाकात आशा से हुई। आशा मेरे साथ कॉलेज में पढ़ा करती थी लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि वह मेरे दोस्त संदेश की कजन भी है यह बात मुझे पहली बार ही पता चली थी। उस दिन मैंने आशा से पूछा तुम आजकल क्या कर रही हो तो आशा ने मुझे बताया कि वह स्कूल में पढ़ाती है मैंने आशा से कहा चलो यह तो बहुत ही अच्छी बात है। आशा ने मुझसे पूछा कि तुम आजकल क्या कर रहे हो तो मैंने आशा को बताया कि मैं आजकल अपने पापा का बिजनेस संभाल रहा हूं। आशा और मेरी उस दिन काफी बात हुई और उसके बाद मैंने आशा से कहा कि तुम मुझे अपना नंबर दे दो, मैंने आशा का नंबर ले लिया था। संदेश से मैं काफी देर तक बात करता रहा उसके बाद मैं घर लौट आया था अपने काम की वजह से मुझे बिल्कुल भी फुर्सत नहीं मिल पाती थी इस वजह से मैं आशा से फोन पर बात नहीं कर पाया। एक दिन मुझे आशा का मैसेज मुझे आया तो मैंने भी उसे रिप्लाई किया जब मैंने आशा को मैसेज का रिप्लाई किया तो आशा मुझे कहने लगी कि रजत मैं तुमसे काफी दिनों से कुछ कहना चाह रही थी। मैंने आशा को कहा हां आशा कहो तुम्हें मुझसे क्या कहना है।

आशा ने मुझे बताया कि उसके पापा की तबीयत खराब है और घर पर कोई भी उसके पापा की देखभाल के लिए नहीं है। मैंने आशा से कहा कि मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकता हूं तो आशा मुझे कहने लगी रजत पापा चाहते हैं कि मैं शादी कर लूं लेकिन मैं ऐसे ही किसी से शादी करने के लिए तैयार नहीं हूं मैं चाहती हूँ कि मैं तुम्हे पापा से मिलवाऊं तो शायद पापा को भी अच्छा लगे। मैंने आशा से कहा लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता आशा कहने लगी कि क्या तुम मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकते। आशा की बात मुझे माननी ही पड़ी और उसके बाद मैं उसके पापा से मिलने के लिए तैयार हो गया। हालांकि मैं इस पक्ष में बिल्कुल भी नहीं था लेकिन आशा के कहने पर मैं आशा के पापा से मिला। आशा की मां का देहांत काफी वर्ष पहले ही हो चुका था आशा के पापा से जब मैं पहली बार मिला तो आशा के पापा ने मुझे कहा कि बेटा आशा ने मुझे तुम्हारे बारे में मुझे बताया और कहा कि तुम बहुत ही अच्छे लड़के हो तो मैंने आशा से कहा कि मैं एक बार रजत से मिलना चाहता हूं।

मैं आशा के पापा को कभी झूठ तो नहीं कहना चाहता था लेकिन मैं अपनी दोस्ती के आगे मजबूर था और आशा के लिए मुझे यह सब करना पड़ा। आशा के पापा मुझसे कहने लगे कि बेटा मैं चाहता हूं कि तुम आशा का हाथ थाम लो और आशा से जल्दी शादी कर लो। मैंने उन्हें कहा कि अभी मुझे थोड़ा समय चाहिए मैं और आशा कुछ समय बाद शादी कर लेंगे। मैं करीब एक घंटे तक आशा के घर पर रहा और उसके बाद मैं वापस लौट आया मैंने जब आशा से फोन पर बात की तो वह मुझे कहने लगी कि तुमने आज मेरी बहुत मदद की। मैंने आशा को कहा लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैंने यह ठीक किया आशा कहने लगी कि मुझे भी मालूम है लेकिन तुम जानते हो कि मैं अभी शादी नहीं करना चाहती हूं क्योंकि मैं पापा की देखभाल करना चाहती हूं और पापा की तबीयत भी ठीक नहीं रहती है जिस वजह से मुझे उनकी काफी चिंता सताती रहती है। मैंने जब आशा को यह बात कहीं कि हम लोगों का ऐसा नहीं करना चाहिए था तो आशा कहने लगी कि रजत वह तो मुझे मालूम है लेकिन अब तुम इस बारे में भूल जाओ। मैं इस बारे में शायद ही भूल पाता मुझे भी नहीं मालूम था कि आशा और मैं एक दूसरे से मिलेंगे तो हम दोनों की नजदीकियां बढ़ती ही चली जाएंगी। आशा और मैं एक दूसरे को काफी अच्छी तरीके से समझने लगे थे कॉलेज के समय में हम लोगों की इतनी अच्छी दोस्ती नहीं हुआ करती थी लेकिन अब आशा और मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी जिससे कि मैं बहुत ही ज्यादा खुश था और आशा भी बड़ी खुश थी कि हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में रहने लगे है। आशा चाहती थी कि हम दोनों शादी कर ले मैंने आशा को कहा क्या हम लोगों को शादी कर लेनी चाहिए तो आशा कहने लगी हां क्यों नहीं।

आशा और मैंने शादी करने का फैसला कर लिया था, यह सब बहुत ही जल्दी में हुआ और पापा और मम्मी इस बात से अनजान थे लेकिन फिर पापा और मम्मी भी शादी के लिए मान गए तो मैं बहुत ही खुश था। आशा और मैंने शादी करने का फैसला कर लिया था इसलिए पापा और मम्मी ने मेरी सगाई आशा के साथ करवा दी। आशा के पापा भी बहुत खुश थे और हम लोग चाहते थे कि हम लोग थोड़े समय बाद शादी कर ले। शादी के लिए आशा ने ना जाने कितनी ही प्लानिंग की थी आशा मुझे कहने लगी कि हम लोग अपनी शादी जयपुर में करेंगे। आशा का सपना था कि हम दोनों अपनी शादी जयपुर में करें मैंने आशा को कहा कि ठीक है हम लोग शादी जयपुर में ही करेंगे आशा इस बात से बड़ी खुश थी और वह मुझे कहने लगी कि रजत तुमने हमेशा ही मेरी मदद की है तुम मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त हो और अब तुम मेरे पति भी बनने वाले हो तो मैं इस बात से बड़ी खुश हूं। हम दोनों एक दूसरे से जल्दी शादी करने वाले थे और जयपुर में ही मैंने और आशा ने हमारी शादी का अरेंजमेंट करवाया। जिस दिन हम लोगों की शादी थी उस दिन मेरे रिलेटिव और आशा के भी रिश्तेदार शादी में आए हुए थे और सब लोग हम दोनों की शादी में बड़े खुश थे, सब लोगों ने हमें आशीर्वाद दिया।

हम दोनों की शादी हो चुकी थी शादी हो जाने के बाद हम कुछ दिनों के लिए शिमला घूमने के लिए चले गए। हम दोनों शिमला में ही एक दूसरे के साथ हनीमून का मजा लेना चाहते थे और हम दोनों एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा तड़प रहे थे। आशा भी बहुत ज्यादा खुश थी। मैंने उस दिन आशा से कहा आज हम दोनों अकेले ही रूम में हैं। मैंने आशा को कहा मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाऊंगा यह कहकर मैंने आशा को अपनी गोद में बैठा लिया। जब मैंने आशा को अपनी गोद में बैठाया तो मुझे मजा आने लगा और आशा को भी बड़ा ही अच्छा महसूस होने लगा था। आशा के अंदर की गर्मी बढने लगी थी और मेरे अंदर की गर्मी भी बढने लगी थी इसलिए ना तो मैं अपने आपको रोक पा रहा था और ना आशा अपने आपको रोक पा रही थी। हम दोनों की तडप बढ़ चुकी थी। मैंने आशा को कहा अब मैं अपने आपको रोक नहीं पाऊंगा। मैने अपने लंड को बाहर निकाला तो आशा मेरे मोटे लंड को हिलाए जा रही थी। जब वह ऐसा करती तो मेरे अंदर की गर्मी को और भी ज्यादा बढ़ा देती। मेरे अंदर की गर्मी उसने पूरी तरीके से बढा दी थी अब मेरी उत्तेजना इस कदर बढ चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने आशा को कहा मेरे अंदर की उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाऊंगा। आशा मुझे कहने लगी रह तो मैं भी बिल्कुल नहीं पा रहा हूं और यह कह कर आशा ने मेरे मोटे लंड को काफी देर तक अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा। वह जिस प्रकार से मेरे मोटे लंड का रसपान कर रही थी उससे मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और आशा के अंदर की गर्मी भी अब इस कदर बढ़ चुकी थी कि हम दोनों एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा तडपने लगे थे। मैं और आशा एक दूसरे के लिए इतना ज्यादा तड़प रहे थे कि हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे। मैंने आशा की चूत को चाटना शुरू किया मैंने आशा की चूत को चाटकर पूरी तरीके से चिकना बना दिया था। आशा की चूत इतनी चिकनी हो चुकी थी कि मेरा लंड उसकी योनि के अंदर जाने के लिए तैयार था और अपने हनीमून को हम दोनों सफल बनाने वाले थे।

मैंने अपने लंड को आशा की मखमली चूत पर लगाकर अपने लंड को अंदर की तरफ घुसाना शुरू किया तो मेरा लंड आशा की योनि के अंदर चला गया। जब मेरा लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो आशा की सील टूट चुकी थी और उसकी चूत से खून आने लगा था। आशा की योनि से खून निकल आया था मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था और आशा कि चूत से निकलती हुई गर्मी मुझे अपनी ओर खींचन लगी थी। मैंने आशा की योनि से अपने वीर्य की पिचकारी मारकर आशा की चूत मे माल गिरा दिया था मैं बड़ा खुश था। आशा और मैं एक दूसरे के साथ सेक्स का मजा ले रहे थे। हमारी इच्छा अभी तक पूरी नहीं हुई थी।

मैंने आशा की योनि पर अपने लंड को दोबारा से लगाकर अंदर की तरफ धकेला तो आशा की योनि से मेरा वीर्य बाहर निकल रहा था और आशा की चूत से अभी भी पानी बहुत अधिक मात्रा में निकल रहा था। मैंने आशा की योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया आशा की योनि के अंदर मेरा लंड घुस चुका था। मैंने आशा को तेजी से चोदना शुरू कर दिया था। मैं जिस प्रकार से आशा को चोद रहा था उससे मुझे मज़ा आ रहा था। आशा के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। हम दोनों की गर्मी बढने लगी थी हम दोनों बिल्कुल रह नहीं पा रहे थे। आशा मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा। मैंने आशा को कहा शायद मैं भी अब अपने आपको रोक नहीं पाऊंगा और यह कहकर मैंने आशा की योनि के अंदर अपने वीर्य को गिरा दिया। आशा बहुत ही ज्यादा खुश थी। हम दोनों का हनीमून बड़ा ही अच्छा और बहुत यादगार भी था।