चुदाई की सहमति आखिर मिल ही गयी

Antarvasna, hindi sex kahani: सुबह के 7:00 बजे में उठा और अपने जिम जाने की तैयारी करने लगा जब मैं जिम के लिए निकला तो मैंने देखा कि पापा घर के बाहर ही जहां हमारा छोटा सा बगीचा है उसमें वह पानी डाल रहे थे। पापा ने अपने हाथ में पाइप पकड़ा हुआ था और वह पानी के फव्वारे पौधों की तरफ मार रहे थे पापा ने मुझे देखा और कहने लगे कि संजीव बेटा कहां जा रहे हो। मैंने पापा से कहा कि पापा मैं जिम जा रहा हूं पापा कहने लगे बेटा क्या जिम ही जाते रहोगे या फिर अपने जीवन में कुछ करने का इरादा भी है मैंने पापा से कहा पापा फिलहाल आप अभी तो मुझे कुछ मत कहिए मैं अपना जिम के लिए निकल रहा हूं। पापा कहने लगे ठीक है तुम अपने जिम जाओ और मैं भी तब तक अपने बगीचे में पानी डालता हूं, मैं जिम चला गया मैं जब जिम गया तो मुझे घर आने में 9:00 बज गए थे। मैं घर पहुंचा तो पापा अखबार पढ़ रहे थे मैंने सोचा मैं पापा की नजरों से बचकर अपने कमरे में चला जाता हूं लेकिन पापा ने मुझे देख लिया और आवाज देते हुए अपने पास बुलाया वह कहने लगे कि देखो संजीव बेटा तुम पहले मेरे पास बैठो।

पापा ने मुझे अपने पास बैठा लिया और कहने लगे की संजीव मैं तुम्हें कहना चाहता हूं कि तुम अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हो अब तुम्हारे साथ के तुम्हारे दोस्त भी नौकरी करने लगे हैं तुमने भी क्या कुछ सोचा है। मैंने पापा से कहा पापा मैंने फिलहाल तो कुछ भी नहीं सोचा है पापा मुझे कहने लगे कि देखो बेटा तुम्हें सोचना तो पड़ेगा ही और तुम्हें अब जल्द से जल्द अपने भविष्य के बारे में सोच लेना चाहिए। मेरी पढ़ाई को पूरे हुए दो वर्ष हो चुके थे और मैं घर पर ही था पापा अपनी नौकरी से रिटायर हो चुके हैं और वह ज्यादातर समय घर पर ही रहते हैं इसलिए पापा मुझे अक्सर यही बात कहते रहते हैं कि बेटा तुम कुछ कर लो। मैंने भी जॉब के लिए ट्राई किया था परंतु मेरी नौकरी लगी ही नहीं एक जगह मेरा सिलेक्शन भी हो गया था लेकिन वहां पर मुझे कुछ ठीक नहीं लगा इसलिए मैंने वहां जॉब ज्वाइन नहीं की। अब पापा का दबाव मेरे ऊपर बनने लगा था और मुझे भी जल्द से जल्द नौकरी करनी थी तभी मेरी मां आई और कहने लगी कि क्या तुम मेरे राजा बेटा को परेशान कर रहे हो।

पापा कहने लगे तुम्हारे इसी दुलार की वजह से तो संजीव की जिंदगी पर असर पड़ने लगा है पापा ने अपने सख्त लहजे में कहा तो मां भी थोड़ा सहम गई और कहने लगी आप तो हमेशा उसे बस कुछ ना कुछ बात लेकर सुनाते ही रहते हैं। मां चुप हो चुकी थी लेकिन पापा मुझे कहने लगे कि बेटा तुम अपने लिए कोई नौकरी देख लो। पापा शायद अपनी जगह ठीक थे इसलिए मुझे भी लगा कि मुझे अब नौकरी कर लेनी चाहिए लेकिन मुझे फिलहाल तो कहीं अच्छी नौकरी मिलने की कोई उम्मीद नहीं नजर आ रही थी मैं सोचने लगा कि मैं अब क्या करूं। मैंने अपने दोस्तों की मदद से एक नई कंपनी में इंटरव्यू देने के बारे में सोच लिया और जब वहां पर मैंने इंटरव्यू दिया तो मुझे इस बात की खुशी हुई कि वहां मेरा सिलेक्शन हो गया। मैंने तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी कि मेरा सिलेक्शन इतनी जल्दी हो जाएगा और मुझे एक अच्छा सैलरी पैकेज भी मिलने लगा था पापा और मम्मी दोनों ही इस बात से बहुत खुश थे उन दोनों के चेहरे पर इस बात की खुशी दिखी की मैं भी अब नौकरी करने लगा हूं। मैं अपनी जॉब में इतना व्यस्त होने लगा कि मुझे अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था और ना ही मेरे पास टाइम होता था पापा और मम्मी के साथ में मुझे समय बिताने का बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था। मैं जब अपने ऑफिस से आता तो उस वक्त शाम हो जाती थी इसलिए मैं पापा और मम्मी से ज्यादा बात नहीं किया करता था। मुझे अब एहसास होने लगा था कि पापा ने अपनी नौकरी के इतने वर्ष पता नहीं कैसे बिता दिए मेरे ऊपर भी अब जिम्मेदारी आने लगी थी और पापा और मम्मी चाहते थे कि मैं शादी कर लूं लेकिन अभी मैं अपना जीवन अपने तरीके से जीना चाहता था परंतु मेरे पास तो अपने लिए ही समय नहीं होता था। हमारे ऑफिस में काम करने वाली कनिका की बहन शोभा के साथ मुझे समय बिताना अच्छा लगता था। कनिका ने ही मेरी मुलाकात शोभा से करवाई थी और जब  शोभा से मेरी मुलाकात हुई तो उस समय हम दोनों की ज्यादा बात तो नहीं हो पाई लेकिन धीरे-धीरे हम दोनों की बातें बढ़ने लगी और मैं शोभा के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लगा।

मुझे उसके साथ समय बिताना अच्छा लगता था और वह भी बहुत खुश रहती थी हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी समय बिताया करते थे यह बात मैंने अब तक अपने पापा को पता नहीं चलने दी थी मैं नहीं चाहता था कि पापा को इस बारे में कुछ भी पता चले इसलिए मैंने उन्हें इस बारे में कुछ भी नहीं मालूम चलने दिया। मेरा और शोभा का रिश्ता धीरे-धीरे अब आगे बढ़ता जा रहा था हम दोनों एक दूसरे के लिए पूरे समर्पित भाव से अपने रिश्ते को आगे बढ़ा रहे थे कनिका को भी इस बात का मालूम था कि मेरे और शोभा के बीच में रिलेशन है। एक बार हमारे ऑफिस  से टूर घूमने के लिए जा रहा था उस वक्त मेरी मुलाकात एक बिजनेसमैन से हुई उनसे मिलकर मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिल गया था उनसे मेरी मुलाकात अच्छी रही और मैंने उनके साथ ही काम करने के बारे में सोच लिया था। अपनी कंपनी से रिजाइन देने के बाद मैं उन्हीं के साथ काम करने लगा और मेरा प्रमोशन भी अब बहुत जल्दी होने लगा इतने कम समय में ही मैंने एक अच्छी खासी तरक्की हासिल कर ली थी जिससे कि मेरे माता-पिता भी खुश है और शोभा भी खुश थी।

शोभा के साथ में नजदीकिया दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी और उसके साथ मुझे अच्छा भी लगता मैं जब भी शोभा के साथ होता तो मुझे बहुत खुशी होती और उसके चेहरे पर भी एक सुकून नजर आता था। शोभा के मेरे जीवन में आने के बाद मेरी तरक्की बड़ी तेजी से होने लगी थी और अब वह मेरे लिए सब कुछ थी क्योंकि उसके अलावा में किसी को भी प्यार नहीं करता था। शोभा ही मेरे जीवन में सब कुछ थी मेरे पिताजी को इस बारे में पता चल चुका था लेकिन अब हम दोनों का रिश्ता बहुत आगे बढ़ चुका था मुझे इन सब चीजों से फर्क नहीं पड़ता था। पापा ने भी शोभा को स्वीकार कर लिया था शोभा और मेरे बीच में कई बार लिप किस तो हो चुका था लेकिन अब हम दोनों की बातें आगे बढ़ने लगी थी और मैं उसके बदन के हर एक हिस्से का मजा लेना चाहता था। शोभा को भी यह बात मंजूर थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहते थे उसके लिए हम दोनों में सहमती बन चुकी थी। हम दोनो ने पहली बार शारीरिक संबंध बनाने के बारे में सोचा मैंने शोभा को अपने घर पर बुला लिया था जब शोभा घर पर आई तो मुझे कहने लगी कि मुझे डर लग रहा है। मैंने उसे कहा डरने की जरूरत नहीं है और वैसे भी घर पर अभी कोई नहीं है। शोभा कहने लगी लेकिन फिर भी यदि कोई आ गया तो मैंने शोभा से कहा पापा मम्मी आपने किसी दोस्त के घर गए हैं और वह इतनी जल्दी नहीं आने वाले। शोभा मेरे लिए तड़प रही थी मैंने उसके होंठो को चूसना शुरू किया मैंने अपने हाथ को जैसे ही शोभा के स्थानों पर रखा तो वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा मजा आ रहा है। मुझे उसके स्तनों को दबाने मे अच्छा लगता मै उसके स्तनों का रसपान करना चाहता था। मैंने उसके कपड़ों को उतार दिया और उसे अपने सामने नग्न अवस्था में कर दिया वह पूरी तरीके से मेरी हो चुकी थी।

उसका गोरा बदन मेरा था मैंने जब उसके स्तनों को चूसा तो मैं उसके स्तनों को बड़े अच्छे तरीके से चूस रहा था और मुझे बहुत मजा भी आ रहा था। काफी देर तक मैंने ऐसा ही किया जब शोभा पूरी तरीके से उत्तेजित होनी लगी तो उसने अपनी चूत के अंदर अपनी उंगली को डालने की कोशिश की तो उसकी चूत में उंगली नहीं जा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा मैंने उसे कहा मैं अभी तुम्हे चोदता हूं। यह कहते ही मैंने लंड को बाहर निकाला और शोभा से कहा कि तुम मेरे लंड को सकिंग करो। वह मेरे लंड को सकिंग करने लगी वह बड़े अच्छे तरीके से लंड को चूस रही थी मुझे भी बहुत मजा आ रहा था और उसे भी मजा आ रहा था। उसने ऐसा ही किया उसने मुझे कहा कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही हूं मैंने उसे कहा मैं अभी तुम्हारी गर्मी को मिटा देता हूं। मैंने उसकी योनि के अंदर धीरे धीरे लंड को डालना शुरू किया क्योंकि शोभा की चूत गीली हो चुकी थी इसलिए आसानी से मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हो गया।

जैसे ही उसकी गीली चूत के अंदर मेरा लंड घुसा तो उसके मुंह से एक तेज आवाज निकली वह अपने मुंह से मादक आवाज में मुझे कहने लगी धीरे से करो। मैंने शोभा से कहा मै तो धीरे से कर रहा हूं मैं अब धीरे-धीरे शोभा को धक्के दिए जा रहा था। वह भी पूरे मजे में आ रही थी लेकिन मेरे अंदर अब जोश बढने लगा। मैंने शोभा से कहा मैं अब बिल्कुल रह नहीं पाऊंगा तो शोभा कहने लगी थोड़ा धीरे से करिएगा। वह अपने पैरों को खोलने लगी उसकी योनि की चिकनाई में बढ़ोतरी होने लगी और उसकी चूत से लगातार पानी बाहर की तरफ निकलने लगा था। मैंने शोभा को कहा कि तुम मेरे ऊपर से आ जाओ मेरे लंड को शोभा ने अपनी योनि में ले लिया। उसने अपने दोनों हाथों को मेरे पेट पर रखते हुए वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करने लगी। वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करती तो मुझे भी अच्छा लग रहा था और उसे भी मजा आ रहा था मेरा लंड पूरी तरीके से छिलकर बेहाल हो चुका था। उसकी योनि अंदर से पूरी तरीके से छिल चुकी थी वह मुझे कहने लगी मै झड़ चुकी हूं। मैंने उसे कहा मैं तुम्हें नीचे लेटा देता हूं मैंने शोभा को नीचे लेटाकर धक्के देने शुरु किए और 5 मिनट के बाद मेरा वीर्य पतन हो गया।