चुदाई की खुशी में डूब गया

Antarvasna, desi kahani: सुबह के 6:00 बज रहे थे मैं अपनी कॉलोनी के पार्क में चला गया और वहां पर मैं बेंच में बैठा हुआ था सब लोग टहल रहे थे। एक बुजुर्ग मेरे पास आकर बैठे और वह कहने लगे कि बेटा क्या तुम यहीं पास में रहते हो तो मैंने उन्हें कहा हां मैं यहीं रहता हूं। उन्होंने मुझसे पापा का नाम पूछा तो मैंने उन्हें पापा का नाम बताया वह पापा को अच्छे से जानते थे। वह मुझसे पूछने लगे कि बेटा तुम्हारा क्या नाम है मैंने उन्हें अपना नाम बताया और वह मुझसे काफी देर तक बातें करते रहे। मैंने उन्हें कहा अंकल जी अब मैं चलता हूं मुझे इजाजत दीजिए उसके बाद मैं अपने घर लौट आया। मैं जब घर लौटा तो उस वक्त 7:00 बज रहे थे मां ने मेरे लिए चाय बनाई और कहने लगी कि बेटा तुम चाय पी लो। मैंने चाय पी और उसके बाद कुछ देर तक तो मैं अखबार पढ़ता रहा फिर मैं नहाने के लिए चला गया। मैं नहाने के लिए जा चुका था और थोड़ी देर बाद मैं नहा कर बाहर निकला जब मैं नहा कर बाहर निकला तो मां कहने लगी कि दीपक बेटा क्या तुम्हारे लिए नाश्ता लगा दूं तो मैंने मां से कहा हां मां मेरे लिए नाश्ता लगा दीजिए।

माँ ने मेरे लिए नाश्ता लगाया और मैं डाइनिंग टेबल में बैठ कर नाश्ता करने लगा मैंने मां से कहा मां क्या पापा ऑफिस चले गए तो मां कहने लगी कि हां बेटा वह कब के ऑफिस जा चुके हैं। मैंने नाश्ता किया और उसके बाद मैं भी अपने ऑफिस चला गया। मैं जब अपने ऑफिस गया तो उस दिन ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम था इसलिए मुझे घर आने में उस दिन देरी हो गई। मैं जब घर पहुंचा तो मां ने मुझे कहा कि बेटा आज तुम देर से आ रहे हो तो मैंने मां को बताया कि मां आज ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम था इसलिए मुझे आने में देरी हो गई। मां कहने लगी कि बेटा तुम अपना भी ध्यान रख लिया करो। कुछ समय पहले ही मेरी तबीयत काफी खराब हो गई थी जिससे कि मैं लंबे समय बाद उभर पाया। हर रोज की तरह मैं सुबह ऑफिस जाता और शाम को ही घर लौटा करता मेरी दिनचर्या बिल्कुल एक समान चल रही थी कुछ भी मेरी जिंदगी में नया नहीं था। दीदी एक दिन घर पर आई हुई थी मेरी दीदी की शादी अंबाला में ही हुई है और वह उस दिन मुझे कहने लगी कि दीपक तुम काफी दिनों से घर पर भी नहीं आए। मैंने दीदी को कहा कि हां दीदी मुझे आज कल ऑफिस का कुछ ज्यादा ही काम है इस वजह से मैं घर पर आ नहीं पाया था। मैं और दीदी साथ में बैठकर बातें कर रहे थे तो दीदी ने मुझे बताया कि जीजा जी कुछ समय के लिए अपने काम के सिलसिले में बाहर जा रहे हैं। दीदी चाहती थी कि मैं कुछ दिनों के लिए दीदी घर पर उनके साथ रहूं मैंने दीदी को कहा ठीक है दीदी मैं कुछ दिनों के लिए आपके घर पर आ जाऊंगा। दीदी की शादी को 5 साल हो चुके हैं और उनका शादीशुदा जीवन बहुत ही अच्छे से चल रहा है वह काफी खुश हैं जिस प्रकार से उनका शादीशुदा जीवन चल रहा है।

जीजाजी उन्हें बहुत ज्यादा प्यार करते हैं और उन्हें वह किसी भी प्रकार की कोई कमी कभी महसूस नहीं होने देते। दीदी उस दिन घर चली गई थी और फिर कुछ दिनों के बाद मैं भी दीदी के घर पर चला गया और मुझे दीदी के साथ में कुछ दिनों तक रहना पड़ा। जीजा जी भी अब अपने काम से वापस लौट आए थे और फिर मैं भी अपने घर लौट आया था। एक दिन सुबह के वक्त मैं अपने घर से निकला ही था कि रास्ते में मेरी कार का टायर पंचर हो गया। मेरी कार का टायर पंचर हो चुका था और मैं अपनी कॉलोनी के बाहर ही एक पंचर वाला है उसके पास में चला गया उसने मेरी कार का टायर का पंचर लगा दिया उसके बाद मैं वहां से अपने ऑफिस के लिए निकलने ही वाला था कि तभी मैंने देखा कि अनीता भी वहां से गुजर रही थी। अनीता काफी ज्यादा परेशान नजर आ रही थी अनीता हमारे पड़ोस में ही रहती है। मैंने अनीता को आवाज देते हुए कहा अनिता तुम कहां जा रही हो तो अनीता मेरी तरफ आई और कहने लगी कि दीपक मैं अपने ऑफिस जा रही थी। मैंने अनीता को कहा मैं तुम्हें तुम्हारे ऑफिस छोड़ देता हूं अनीता मुझे कहने लगी कि नहीं मैं चली जाऊंगी। मैंने अनीता को कहा वैसे भी मुझे आज ऑफिस के लिए देर हो चुकी है मैं तुम्हें तुम्हारे ऑफिस छोड़ देता हूं। अनीता भी मेरी बात मान गई और मैंने उसे उसके ऑफिस तक छोड़ दिया। रास्ते में हम दोनों की बातें हुई मैंने अनीता को कहा कि आज तुम काफी ज्यादा परेशान लग रही हो तो आनीता मुझे कहने लगी कि दीपक मैं बहुत ही ज्यादा परेशान हूं।

मैंने उससे उसकी परेशानी का कारण पूछा तो उसने मुझे बताया कि उसके पापा और मम्मी जिस लड़के से उसकी शादी करवाना चाहते हैं वह उससे शादी नहीं करना चाहती है। मैंने अनीता को कहा कि अनीता तुम अपने पापा मम्मी की बात क्यों नहीं मान लेती तो अनीता मुझे कहने लगी कि दीपक मैं अपने पसंद के लड़के से शादी करना चाहती हूं और वह मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है। मैंने अनीता को समझाने की कोशिश की लेकिन वह मेरी बात नहीं मानी, अनीता का भी ऑफिस आ चुका था तो मैंने उसे उसके ऑफिस छोड़ा और फिर मैं वहां से अपने ऑफिस के लिए जा चुका था। मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो मैं अनीता के बारे में ही सोचता रहा मेरे दिमाग में सिर्फ अनीता का ही ख्याल आ रहा था। मैं अनीता के बारे में सोच रहा था कि आखिर अनीता अपने घरवालों की पसंद के लड़के से शादी क्यों नहीं करना चाहती है। उस दिन मैं घर लौटा तो मुझे घर लौटते हुए काफी देर भी हो चुकी थी। मै अनीता से कुछ दिनों बाद मिला। अनीता ने मुझे बताया उसकी इंगेजमेंट हो चुकी है। मैंने अनीता को कहा लेकिन तुम तो मुझे कह रही थी तुम उस लड़के से शादी नहीं करना चाहती हो और अचानक से तुम्हारा मन कैसे बदल गया। अनीता ने मुझे कहा मेरे पास अब और कोई रास्ता भी तो नहीं था इसलिए मैं उस लड़के से शादी करने के लिए तैयार हूं। अनीता के दिल में ना जाने क्या चल रहा था। मैंने उस दिन अनीता को कहा चलो आज हम लोग कहीं डिनर पर चलते हैं क्योंकि अनीता को मेरा साथ हमेशा से ही अच्छा लगता था इसलिए वह भी मेरी बात मान गई। हम दोनों डिनर के लिए साथ में गए। हम दोनों ने साथ में डिनर किया और साथ में अच्छा टाइम स्पेंड किया।

मैं अनीता को मिलता तो अनीता के साथ मै अच्छा समय स्पेंड करता। एक दिन मैंने अनीता को अपने साथ मूवी देखने के लिए कहा अनीता मेरे साथ मूवी देखने के लिए आ गई। हम दोनों साथ में बैठकर मूवी देख रहे थे। उस दिन जब मैंने अनीता के हाथों को पकडा तो अनीता की गर्मी बढ़ने लगी। उसने मेरे हाथ को कसकर पकड़ लिया था। मैंने अपने हाथ को उसकी जांघ पर रखा तो मुझे मजा आने लगा। मैं उसकी जांघों को सहलाने लगा मैंने अपने हाथ को उसकी जींस के अंदर करते हुए उसकी चूत को सहलाना शुरू किया। मैं उसकी चूत को सहला रहा था तो उसको मजा आ रहा था। मुझे बड़ा मजा आ रहा था जब मैं उसकी चूत पर उंगली फेर रहा था उसकी चूत से पानी बाहर निकलने लगा था वह बहुत ही ज्यादा गर्म होने लगी थी। वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी को तुमने पूरी तरीके से बढा कर रख दिया है। मैं समझ चुका था अनीता और मैं एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार है। मैंने अनीता को कहा हम लोगों को कहीं साथ में जाना चाहिए। अनीता मेरी बात मान गई उस दिन हम दोनों साथ में ही रुकने वाले थे। मैं अनीता को होटल में लेकर चला गया वहां पर मैंने रूम लिया। मैं और अनीता साथ में बैठे हुए थे। हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तड़प रहे थे मैंने अनीता को अपनी बाहों में लेकर उसके नरम होंठों को चूमना शुरू किया तो उसको मजा आने लगा वह मेरा साथ बडे ही अच्छे से देने लगी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है मैंने अनीता को कहा मुझे बहुत मजा आ रहा है। अब हम दोनों एक दूसरे के लिए तडपने लगे थे मेरी तडप इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी मैं अनीता की योनि में अपने लंड को डालना चाहता था। मैंने अनीता की चूत मे लंड डाला तो अनीता की योनि से खून निकलने लगा था। वह मेरे साथ बहुत ही ज्यादा खुशी थी। मै उसे तेजी से धक्के मारे जा रहा था मुझे अनीता को चोदने में मजा आ रहा था।

मै जिस तरीके से अनीता के साथ शारीरिक संबंध बना रहा था उससे मुझे मज़ा आ रहा था और अनीता को भी बड़ा मजा आ रहा था। हम दोनों एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे। मैंने अपने लंड को अनीता की चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था जिससे कि उसकी योनि की गर्मी बढ़ती जा रही थी और वह मुझे कहती तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैंने उसे काफी देर तक चोदा। जब मेरी इच्छा पूरी हो चुकी थी तो मैंने अनीता की चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया था। वह बहुत ही ज्यादा खुश थी। मैंने अनीता के होंठों को चूमना शुरू किया और उसके स्तनों को भी मैं चूसने लगा। वह दोबारा से गर्म होने लगी और मेरे साथ वह सेक्स करने के लिए तड़पने लगी थी। मैंने अपने लंड को उसकी योनि में घुसा कर उसकी इच्छा को दोबारा से पूरा किया और उसे मैंने तब तक चोदा जब तक उसकी योनि में मेरा माल नहीं गिर गया और उसकी इच्छा पूरी नहीं हो गई। वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी जिस प्रकार से मैंने उसकी चूत के अंदर अपने माल को गिराया था।