चोदने आना तो दरवाजा खुला मिलेगा

Antarvasna, hindi sex kahani: अपने मोटापे से मैं इतना परेशान हो चुका था कि मुझे लग रहा था कि मुझे किसी की जरूरत है जो कि मेरे मोटापे को नियंत्रण में ला सके उसके लिए मैंने डॉक्टर से सलाह मशवरा किया लेकिन उनकी सलाह मशवरा से भी मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ा। अब मैंने सुबह के वक्त मॉर्निंग वॉक पर जाना शुरू कर दिया था और अपने दोस्तों के साथ मैं जिम भी जाने लगा था। शरीर से पसीना तरबतर आता रहता था लेकिन मेरा वजन अब भी कम नहीं हो पाया था परंतु मुझे उम्मीद पूरी थी कि मेरा वजन जरूर कम हो जाएगा उसके लिए मैं मेहनत बहुत करता था। शरीर का वजन थोड़ा बहुत तो घटने लगा था लेकिन उसके बावजूद भी मुझे अभी तक कुछ ऐसा नजर नहीं आ रहा था जिससे कि मुझे लगे कि मेरा वजन पूरी तरीके से कम हो चुका है। मैं अभी तक जिम में जाकर घंटों मेहनत करता और जिम में कसरत करने के बाद थोड़ा बहुत तो मेरा वजन कम होने लगा था। काफी समय बाद मुझे मेरा दोस्त मिला तो वह मुझे कहने लगा कि रोहित तुम बहुत पतले हो चुके हो जब उसने मुझे यह बात कही तो मेरे चेहरे पर खुशी थी वह मुझे कहने लगा कि तुम वाकई में बहुत पतले नजर आ रहे हो।

मैंने उसे बताया कि यह सब मेरे जिम जाने से ही हो पाया है पहले मैं अपने मोटापे से बहुत ज्यादा परेशान हो चुका था और सब लोग मुझे मोटा कहकर बुलाते थे। हालांकि मैं किसी को कुछ कह तो नहीं सकता था लेकिन मुझे यह सब बहुत बुरा लगता था और मुझे लगता था कि क्या कभी मैं अपने वजन को कम भी कर पाऊंगा लेकिन अब मेरा वजन कम होने लगा था तो मुझे खुशी थी कि मेरा वजन कम होने लगा है। मैंने अपनी पुरानी कंपनी से रिजाइन दे दिया था और मैं अब नई कंपनी में जॉब करने लगा मैं जिस कंपनी में जॉब करने के लिए गया वहां पर मेरे काफी दोस्त बन चुके थे। उसी ऑफिस में मेरी मुलाकात गीतिका से हुई गीतिका को कोई भी पसंद नहीं करता था शायद अपने टूटे हुए रिश्ते की वजह से ऐसी हो गई थी। उसका बात करने का तरीका किसी को भी पसंद नहीं था और सब लोग उसके बारे में बुरा ही कहते थे लेकिन गीतिका अपने काम के प्रति बहुत वफादार थी और उसके काम से हमेशा हमारे बॉस खुश रहते थे। गीतिका ने मुझे कहा कि रोहित तुम औरों की तरह नहीं हो मैंने गीतिका से कहा कि लेकिन आपको यह कैसे पता चला कि मैं औरों की तरह नहीं हूं।

गीतिका ने मुझे बताया कि तुम बहुत ही अच्छे हो और तुमसे बात करना मुझे अच्छा लगता है। गीतिका ना जाने क्यों मुझ पर इतना मेहरबान थी गीतिका का हमारे ऑफिस में किसी के साथ भी अच्छा व्यवहार नहीं था लेकिन मेरे साथ ही उसकी बहुत अच्छी बनती थी और मुझसे ही वह बात किया करती थी औरो से सिर्फ वह काम के लिए ही बात करती थी। गीतिका ने मुझे कहा कि तुम आज मेरे घर पर डिनर पर आना गीतिका ने शायद पहली बार ही ऑफिस में किसी को डिनर के लिए इनवाइट किया था मैं भी गीतिका को मना ना कर सका और उसके घर पर मैं डिनर के लिए चला गया। मैं जब गीतिका के घर डिनर के लिए गया तो वहां पर गीतिका ने उस दिन सारी तैयारियां की हुई थी मुझे बहुत अच्छा लगा जिस प्रकार से गीतिका ने सब कुछ अपने हाथों से बनाया था। मैंने गीतिका को कहा क्या यह सब तुमने खुद अपने हाथों से बनाया है तो वह मुझे कहने लगी कि हां यह सब मैंने खुद अपने हाथों से बनाया है। मुझे बहुत अच्छा लगा जिस प्रकार से गीतिका और मैंने साथ में डिनर किया उस दिन हम दोनों साथ में बैठे हुए थे मुझे गीतिका के बारे में उस दिन काफी कुछ जानने का मौका मिला। गीतिका ने मुझे अपने पुराने रिलेशन के बारे में बताया और अपने पति के बारे में बताया की कैसे उसके पति ने उसके साथ गलत किया। गीतिका ने मुझे बताया कि उसके पति और उसके बीच बिल्कुल भी नहीं बनती थी जिस वजह से उन्होंने अलग होने का फैसला किया लेकिन गीतिका के पति ने उसके मम्मी पापा से बहुत दहेज ले लिया था और उसके बाद जब गीतिका को अपने पति की असलियत पता चली तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे पता चला कि उसके पति के सर पर बहुत लोगों की देनदारी है जिस वजह से उसने वह सब पैसे खर्च कर दिए हैं गीतिका जितना भी कमाती वह सब अपने पति को दे दिया करती थी लेकिन उससे भी शायद गीतिका का रिश्ता बच ना सका।

गीतिका के पति और उसके बीच आए दिन झगड़े होते थे झगड़ों की वजह से परेशान होकर गीतिका ने अलग होने का फैसला किया। जब गीतिका ने मुझे इस बारे में बताया तो मैंने गीतिका को कहा आप बहुत ही हिम्मतवाली हैं जो आपने इतनी हिम्मत दिखाई। गीतिका मुझे कहने लगी की हिम्मत तो मुझे दिखानी ही थी नहीं तो मैं पूरी तरीके से बर्बाद हो जाती और उसके बाद मैंने ऑफिस ज्वाइन किया लेकिन ऑफिस में भी मेरी किसी के साथ बनती नहीं है सब लोग मुझे समझते हैं कि मैं बहुत घमंडी हूं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। मैंने गीतिका को कहा मुझे आपसे बात कर के अच्छा लगा और मुझे लगता है कि आप वैसे बिल्कुल भी नहीं है जैसा बनने की कोशिश कर रही हैं आपको अपने व्यवहार और अपने बात करने के तरीके में थोड़ा बदलाव लाना पड़ेगा, आपको बहुत खुशी होगी जब आप लोगों के साथ दोस्ती करेंगे। गीतिका को मेरी बात शायद पसंद आई और उसने अपने आप को बदलने का फैसला कर लिया गीतिका ने अपने आप को बदलने का फैसला कर लिया था और जिस प्रकार से गीतिका ने अपने व्यवहार में बदलाव किया और वह सब लोगो से अच्छे तरीके से बात करने लगी थी। वह सब लोगों के साथ बड़े ही शालीनता से बात किया करती सब कुछ बहुत अच्छे से चलने लगा था और गीतिका मुझे कहने लगी कि यह सब तुम्हारी ही वजह से हुआ है।

गीतिका को लगता था कि यह सब मेरी वजह से हुआ है मैंने ही उसे समझाया था और उसने मेरी बात पर अमल किया उसके बाद उसका सब के साथ अच्छा रिलेशन बन चुका था लेकिन वह मेरे कुछ ज्यादा ही करीब आ चुकी थी। मुझे नहीं पता था कि गीतिका के दिल में मेरे लिए क्या चल रहा है मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि गीतिका मुझे अपने दिल की बात कह देगी लेकिन मैंने गीतिका के बारे में शायद कभी ऐसा सोचा नहीं था और उससे शादी करने या उसके साथ अपना जीवन बिताने का फैसला कर पाना मेरी समझ से परे था। मैंने गीतिका से कहा कि गीतिका देखो तुम मुझे अच्छी जरूर लगती हो लेकिन मैं इस बारे में तुम्हें कुछ कह नहीं सकता गीतिका को मेरी बात बुरी लगी और उसने मुझसे काफी दिनों तक बात नहीं की लेकिन मैंने ही खुद गीतिका से जाकर माफी मांगी और उसे समझाने की कोशिश की तब जाकर वह मेरी बात को समझ पाई और दोबारा से हम लोग बात करने लगे। गीतिका मुझे अपने घर पर बुलाती थी एक दिन जब गीतिका ने मुझे घर पर बुलाया तो वह कहने लगी तुम यहीं बैठो। मैं बेडरूम में बैठा हुआ था जब गीतिका अपने कपड़े चेंज कर के मेरे पास आई तो उसने गुलाबी रंग की नाइटी पहनी हुई थी उसे देखकर मैं उत्तेजित होने लगा और वह मेरे पास आकर बैठी तो मैने उसकी जांघ की तरफ नजर मारी और उसके स्तनों को मैं देख रहा था। मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा था शायद गीतिका यही चाहती थी गीतिका ने मेरे ऊपर अपने यौवन का जाल फेंका था और उसमें मैं फस गया। मैंने जब उसकी जांघ पर अपने हाथ को लगाना शुरू किया तो वह पूरी तरीके से मचलने लगी मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया मैंने उसके गुलाबी होठों का रसपान किया और बहुत देर तक उसके होठों को मैं चूसता रहा।

जब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई तो मैंने उसे कहा तुम अपने कपड़े उतार दो उसने मुझे कहा तुम ही मेरे नाइटी को उतारो मैंने उसकी नाइटी को उतारा तो मेरे सामने उसकी नंगी चूत थी। जिसे देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा मैंने जैसे ही उसकी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी। मैं उसे लगातार तेजी से धक्के मारने लगा बहुत देर तक मैने उसे धक्के मारे गीतिका मुझे कहने लगी रोहित मैं तो यही चाहती थी कि तुम मेरे साथ शारीरिक सुख का आनंद लो। मैंने उसे कहा मैं आज अपने आपको तुम्हें देख कर रोक नहीं पाया मुझे लग रहा है कि शायद तुमने यह सब जानबूझकर किया है? वह मुस्कुराने लगी और कहने लगी तुम फिलहाल तो मेरी गर्मी को बुझाते रहो मैंने उसे कहा गर्मी तो मेरे अंदर भी बहुत बढ़ चुकी है। उसने मुझे झटके से अपने नीचे लेटाया और मेरे लंड के ऊपर नीचे वह अपनी चूतडो को करने लगी उस अच्छा लग रहा था और मुझे भी मजा आता।

हम दोनों पूरी तरीके से गरम हो चुके थे हम दोनों के बदन से पसीना आने लगा था। मैंने गीतिका को कहा मेरा लंड छिल चुका है। वह कहने लगी गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है मुझे लग रहा है मैं झड़ने वाली हूं। उसके इतना कहने पर मैंने उसे अपने नीचे लेटा कर धक्के मारने शुरू किए और लगातार तेजी से उसे चोदता रहा जब मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने उसके मुंह के अंदर अपने वीर्य को गिराया कुछ देर हम दोनों साथ में बैठे थे। उसने मेरे लंड को दोबारा से खड़ा कर दिया मैंने उसके स्तनों का रसपान करते हुए उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया मेरा लंड उसकी चूत में जाते ही वह दोबारा से मादक आवाज में मुझे अपनी और आकर्षित करने लगी। करीब 10 मिनट के बाद मेरा वीर्य बाहर निकाल चुका था और गीतिका की इच्छा को मैंने पूरी तरीके से पूरा कर दिया था। गीतिका और मैं साथ में बैठे हुए थे जब मैंने गीतिका से कहा कि मैं तुम्हारे पास आता रहूंगा तो वह कहने लगी तुम्हारा जब मन हो तो आ जाना। मैं उसे चोदने के लिए चला जाया करता था उसके दरवाजे हमेशा मेरे लिए खुले हुए थे।