चोदकर चूतड़ हिला डाले उसके

Antarvasna, desi kahani: मैं अपने ऑफिस से घर पहुंचा ही था मां उस दिन काफी ज्यादा परेशान लग रही थी तो मैंने मां से कहा मां आज आप परेशान लग रही हो। उन्होंने मुझे कहा कि बेटा तुम्हारी बहन का आज फोन आया था वह काफी ज्यादा परेशान है उसके पति और उसके बीच बिल्कुल भी नहीं बनती है जिस वजह से वह घर आने की बात कर रही थी। मेरी बहन की शादी को कुछ समय ही हुआ था अभी उसकी शादी को एक साल भी नहीं हुआ था लेकिन उसके पति और उसके बीच ना जाने किस बात को लेकर अनबन होती थी जिससे कि उन दोनों के बीच बिल्कुल भी नहीं बनती थी और इस झगड़े से परेशान होकर मां ने मुझे कहा कि बेटा कल तुम ललिता से मिल आओ। मैंने मां से कहा ठीक है मां मैं अपने ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूं और ललिता दीदी से मिलने के लिए चला जाता हूं। मैं अगले दिन ललिता दीदी से मिलने के लिए सुबह ही अपने घर से निकल गया मैं जब उस दिन दीदी के घर पहुंचा तो मैंने देखा कि दीदी अपने कमरे में बैठी हुई थी उनके सासू मां बैठक में बैठी हुई थी और दरवाजा उन्होंने ही खोला था।

मैं दीदी के रूम में गया तो वह चुपचाप थे उन्होंने मुझसे भी बात नहीं की मैंने दीदी को कहा दीदी क्या हुआ तो वह मुझे कहने लगी की अब मैं तुम्हें क्या बताऊं मैं कितनी परेशान हो चुकी हूं। मैंने उन्हें कहा लेकिन दीदी आपको मुझे बताना तो पड़ेगा ही कि आखिर हुआ क्या है मां भी इस बात से काफी ज्यादा परेशान थी और अभी यह बात पापा को पता नहीं चली है अगर उन्हें यह बात पता चलेगी तो वह भी बहुत ज्यादा परेशान हो जाएंगे। मैंने दीदी को कहा कि दीदी आपको तो पता ही है कि घर में आपसे सब लोग कितना प्यार करते हैं दीदी मुझे कहने लगी कि हां अमन मैं जानती हूं कि सब लोग घर में मुझसे कितना प्यार करते हैं। आखिरकार दीदी ने मुझे बता ही दिया और कहा कि उनके पति का किसी लड़की के साथ अफेयर चल रहा है उन्होंने उन्हें पकड़ लिया था जिस वजह से वह इस बात पर जीजा जी से झगड़ पड़ी थी और जीजाजी है कि अपनी गलती मानने को तैयार ही नहीं थे।

मैं दीदी से बात कर रहा था तो उस वक्त उनकी सासू मां भी कमरे में आ गई और वह कहने लगी की बेटा चलो तुम नाश्ता कर लो। मैंने उन्हें कहा नहीं मेरा मन नहीं है मैंने घर से ही नाश्ता कर लिया था दीदी और मैं अभी भी साथ में बैठे हुए थे मैंने दीदी से कहा कि दीदी आप कुछ दिनों के लिए घर चले आईये आप इस बारे में मां से बात कीजिए तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। दीदी कहने लगी कि हां अमन मैं भी यही सोच रही थी कि कुछ दिनों के लिए मैं घर चली आऊँ। उस दिन दीदी मेरे साथ ही घर चली आई दीदी की सासु मां ने इस बारे में कुछ नहीं कहा लेकिन जीजाजी का जब फोन आया तो वह दीदी पर बहुत ज्यादा गुस्सा हो गए थे और कहने लगे कि तुम बिना बताए ही घर चली गई। दीदी ने उस दिन बात को टाल दिया मां ने दीदी को समझाया और कहा कि देखो बेटा तुम दोनों आपस में मिलकर इस बारे में बात कर लो कि आखिर तुम लोगों को करना क्या है क्योंकि तुम्हें तो पता ही है कि अगर तुम्हारे पापा को इस बारे में पता चला तो वह बहुत परेशान हो जाएंगे और हम लोग नहीं चाहते कि उन्हें किसी भी प्रकार की कोई परेशानी हो। दीदी ने कहा कि हां मैं इस बारे में सुरजीत से बात करूंगी। सुरजीत जीजा जी का नाम है और दीदी कुछ दिनों तक हमारे साथ ही घर पर रुकी उसके बाद वह चली गई। उसके बाद सब कुछ ठीक होने लगा था दीदी और जीजाजी के बीच अब सब कुछ ठीक हो चुका था और अब मेरे लिए भी मेरे पापा मम्मी लड़की देखना शुरू कर चुके थे। जब मैं पहली बार सुहानी से मिला तो मुझे सुहानी पसंद आ गई और उन्होंने मेरा रिश्ता सुहानी के साथ कर दिया सुहानी और मेरी सगाई हो चुकी थी। सुहानी बहुत ही कम बात किया करती थी हम लोगों की फोन पर भी कम बात हुआ करती थी सुहानी का नेचर बहुत ही शर्मीला किस्म का था इसलिए वह मुझसे कम ही बात किया करती थी। मैं चाहता था कि मैं सुहानी से बात करूं इसलिए मैं उसे अक्सर फोन किया करता लेकिन हम दोनों की फोन पर बहुत ही कम बातें हुआ करती थी। एक दिन मैंने सुहानी से कहा कि सुहानी मुझे तुमसे मिलना है तो वह कहने लगी कि अमन आज तो मैं तुमसे नहीं मिल सकती क्योंकि आज घर पर कुछ मेहमान आए हुए हैं। उस दिन तो सुहानी मुझसे नहीं मिली लेकिन उसके बाद हम दोनों मिले मैंने सुहानी से कहा कि सुहानी तुम इतना ज्यादा शर्माती क्यों हो तो सुहानी ने मुझे बताया कि उसका नेचर ही ऐसा है।

मैंने भी सुहानी को समय दिया और धीरे-धीरे वह अब बदलने लगी थी अब हम दोनों की शादी का दिन भी तय हो चुका था और जल्द ही हम दोनों की शादी होने वाली थी। जब हम दोनों की शादी का दिन तय हो गया तो हम दोनों बहुत ही खुश थे अब जल्द ही हम दोनों की शादी होने वाली थी। जब हमारी शादी हुई तो हम दोनों की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई और उसके बाद सुहानी मेरी पत्नी बन चुकी थी। सुहानी अब मेरी पत्नी बन चुकी थी मैं सुहानी के साथ जब पहली रात सुहागरात मनाने के लिए कमरे में गया तो सुहानी बहुत ज्यादा शर्मा रही थी। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे मैं चाहता था कि पहले सुहानी को मैं कंफर्टेबल महसूस होने दूं और जब सुहानी पूरी तरीके से कंफर्टेबल महसूस करने लगी तो मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया और जब मैंने उसके हाथ को पकड़ कर उसके होंठों को चूमा तो वह शर्मा रही थी लेकिन थोड़ी देर बाद वह भी मेरे होठों को चूमने लगी थी।

अब हम दोनों एक दूसरे को स्मूच करने लगे थे और हम दोनों को ही बहुत अच्छा लग रहा था आखिरकार मेरी गर्मी अब इतनी अधिक बढ़ चुकी थी कि मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया जब मैंने सुहानी को बिस्तर पर लेटाया तो वह बहुत ही ज्यादा मचलने लगी थी और मेरे अंदर की गर्मी भी अब इतनी अधिक हो चुकी थी कि मैं चाहता था सुहानी मेरे लंड को अपने मुंह में ले ले लेकिन सुहानी बहुत ही ज्यादा शर्मा रही थी। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो वह मेरे लंड को अपने हाथों से हिलाने लगी थी और उसे मजा आने लगा था। वह बड़ी अच्छे तरीके से मेरे लंड को हिलाती जा रही थी अब उसके अंदर की आग इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम जल्दी से मेरे लंड को मुंह में ले लो। उसने भी उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया पहले तो वह मेरे लंड को अच्छे से नहीं चूस रही थी लेकिन धीरे-धीरे वह मेरे लंड को बड़े ही अच्छे से अपने मुंह के अंदर लेकर चूसने लगी तो उसे भी मजा आने लगा और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हारी चूत के अंदर लंड को डालना चाहता हूं जब मैंने उसके कपड़े उतारे और मैंने सुहाने की गुलाबी पैंटी उतार कर एक किनारे रख दी तो मैंने देखा कि उसकी गुलाबी चूत पर एक भी बाल नहीं था और मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटना चाहता था। मैंने उसकी योनि को अपनी जीभ से चाटा और उसके बाद जब उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही मात्रा में पानी बाहर निकलने लगा तो वह बहुत ही ज्यादा तड़पने लगी थी और मेरे अंदर की गर्मी भी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डालना चाहता हूं। जब मैंने उसकी चूत पर कुछ देर तक अपने लंड को रगडा तो वह पूरी तरीके से मजे में आ गई और मैंने उसके साथ 69 पोज में भी काफी देर तक मजे लिए सुहानी मेरे लंड को अपने गले में ले रही थी और मैं उसकी चूत को चाट कर उसकी चूत से गर्म पानी बाहर निकाल रहा था।

अब हम दोनों के अंदर की उत्तेजना बहुत ही अधिक बढ़ने लगी थी मुझे मजा भी आने लगा था वह पूरी तरीके से खुश हो चुकी थी और मुझे कहने लगी मुझे इतना मजा आ रहा है मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को सटाकर अंदर की तरफ घुसाना शुरू किया तो वह जोर से चिल्लाने लगी उसके अंदर की आग बढ चुकी थी और उसकी चूत से खून की पिचकारी निकली। मैंने उसे कहा गरम तो तुमने मुझे कर दिया है वह इतनी ज्यादा तड़पने लगी थी कि मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को तेजी से करना चाहता था और मैंने उसे इतनी तीव्रता से चोदना शुरू किया कि मुझे अच्छा महसूस होने लगा मेरा मोटा लंड भी छिल चुका है लेकिन मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। जब मैं उसे धक्के मार रहा था तो मेरे अंदर की गर्मी भी बढ़ती जा रही थी और मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि अब मुझे उसे चोदना में बहुत अच्छा लग रहा था।

वह कहने लगी कि तुम मुझे अपने नीचे लेटा दो मैंने उसे उसके पेट के बल लेटाया और जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो धीरे-धीरे उसकी चूत को चीरता हुआ मेरा लंड अंदर की तरफ चला गया और जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर गया तो मुझे मजा आ रहा था। जब मैं ऐसा कर रहा था तो मेरा लंड उसकी चूतड़ों से टकरा रहा था और उसकी चूतड़ों से जब मेरा लंड टकराता तो उनसे एक अलग ही प्रकार की आवाज पैदा होती है और मुझे बहुत ही मजा आता। मैं उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के मार रहा था जिस तीव्रता से मैं उसे चोद रहा था उससे तो मेरा लंड पूरी तरीके से बेहाल हो चुका था लेकिन हम दोनों की शादी की पहली रात बड़ी यादगार बन चुकी थी क्योंकि सुहानी की चूत से भी लगातार खून बाहर की तरफ निकल रहा था। उसकी चूत से इतना खून निकल चुका था कि मैंने उसे कहा अब मैं तुम्हारी चूत में अपने वीर्य को गिराना चाहता हूं और मैंने उसकी चूत के अंदर अपने वीर्य को गिरा दिया। जब मैंने ऐसा किया तो मेरी इच्छा पूरी हो चुकी थी और मुझे बहुत ही मजा आ गया था।