चोदकर भूल गया

Antarvasna, desi kahani: मुझे दिल्ली आए हुए अभी सिर्फ दो महीने ही हुए थे इन दो महीनो में मैंने काफी अच्छे दोस्त बना लिए थे। मेरे ऑफिस में भी मेरे कुछ दोस्त है जो कि अक्सर मुझसे मिलने के लिए आते रहते थे। एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ पब में गया हुआ था उस दिन हम लोग हमारे ही ऑफिस में काम करने वाले संतोष के बर्थडे में गए हुए थे हम लोग उसके बर्थडे को सेलिब्रेट करना चाहते थे इसलिए हम लोगों पब में गए हुए थे। जब हम लोग पब में गए तो उस दिन मैंने देखा कि वहां पर एक लड़की आई हुई थी और संतोष उसे जानता था संतोष ने हम सब का परिचय उससे कराया उसका नाम कविता है। कविता से मिलेकर मुझे बड़ा अच्छा लगा कविता की बातों से मैं बहुत प्रभावित हुआ और उस दिन कविता से काफी देर तक मैंने बात की। कविता ने मुझे अपना नंबर दे दिया था इसलिए हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बातें करने लगे थे बातें इतनी अधिक होने लगी कि हम दोनों ने एक दिन मिलने का फैसला किया। जब हम दोनों पहली बार कॉफी शॉप में दूसरे को मिले तो उस दिन कविता अपनी किसी सहेली के साथ आई हुई थी कविता ने अपनी सहेली से मेरा परिचय करवाया।

कविता मैं और उसकी सहेली साथ मे ज्यादा समय तो नहीं बिता पाए लेकिन फिर भी हम लोग करीब आधे घंटे तक साथ में थे और फिर मैं वापस लौट आया। उसके बाद भी मैं और कविता अक्सर एक दूसरे को मिलते रहते मुझे कविता से बात करना अच्छा लगता था। एक दिन हम लोगों ने मिलने का फैसला किया उस दिन मेरे ऑफिस की छुट्टी थी और मैं घर पर ही था। मैं तैयार हो रहा था तो मुझे कविता का फोन आया और वह मुझे कहने लगी कि राजेश तुम कितनी देर में घर से निकलने वाले हो तो मैंने उसे बताया कि मैं बस थोड़ी देर बाद घर से निकल रहा हूं। उसने मुझे कहा कि मुझे भी तैयार होने में करीब आधा घंटा लग जाएगा तुम थोड़ा रुक कर ही आना मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें घर से निकलने से पहले एक बार फोन जरुर कर दूंगा। कविता कहने लगी ठीक है मैं अभी फोन रखती हूं और जल्दी से मैं तैयार हो जाती हूं। कविता ने फोन रखा मैं भी अब तैयार हो चुका था, मैं जब घर से निकलने वाला था तो मैंने उस वक्त कविता को फोन कर दिया और उससे कहा कि मैं घर से निकल चुका हूं।

वह मुझे कहने लगी कि चलो ठीक है मैं भी घर से निकल रही हूं और कविता भी अपने घर से निकल चुकी थी। हम लोग एक दूसरे को मिले उस दिन हम दोनों ने मूवी देखने का प्लान बनाया था और साथ में हम दोनों ने मूवी देखी। मूवी खत्म हो जाने के बाद हम लोग कुछ देर साथ में बैठे रहे तो उस दिन मुझे कविता ने बताया कि वह कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस के किसी काम से मुंबई जा रही है। मैंने उसे कहा कि लेकिन तुम वापस कब लौटोगी तो वह मुझे कहने लगी कि मैं दो दिन बाद वापस लौट आऊंगी लेकिन इस बीच हम लोगों की बात नहीं हो पाएगी। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं और फिर मैंने और कविता ने घर वापस लौटने का फैसला किया मैंने कविता को उसके घर तक छोड़ दिया था और फिर मैं अपने घर वापस लौट आया। मेरे दोस्तों को यह बात पता चल गयी थी कि कविता और मेरे बीच कुछ तो चल रहा है इसलिए वह लोग मुझे अक्सर कविता के नाम से चिढ़ाया करते थे। कविता भी कुछ दिनों के लिए मुंबई चली गई थी वह जब मुंबई गई तो उसके बाद वहां से वह कुछ दिनों में वापस लौट आई थी। जब कविता वापस लौट आई तो उसके बाद मैं और कविता एक दूसरे को मिले हम दोनों एक दूसरे को मिले तो मैं कविता से मिलकर बड़ा खुश था क्योंकि इस बीच मेरी उससे बात नहीं हो पाई थी। कविता ने मुझे कहा कि मुंबई में मेरा टूर बड़ा ही अच्छा रहा तो मैंने उससे कहा चलो यह तो बड़ी अच्छी बात है कि तुम वहां से जल्दी वापस लौट आई मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी कविता कहने लगी कि मैं भी तुम्हें बहुत ज्यादा मिस कर रही थी। हम दोनों बात कर ही रहे थे कि उस दिन कविता के किसी रिश्तेदार ने हम दोनों को साथ में देख लिया, कविता को यह बात मालूम नहीं थी कि वह बात उसके परिवार तक चली जाएगी। जब कविता के पापा मम्मी को इस बारे में पता चला तो कविता ने मुझे बताया कि उसके पापा मम्मी चाहते हैं कि मैं उनसे एक बार मिलूं।

मैंने कविता से कहा कि क्या मेरा उनसे मिलना जरूरी है तो कविता कहने लगी हां राजेश तुम्हें पापा मम्मी से तो मिलना ही पड़ेगा। जब मैं कविता के पापा मम्मी से मिला तो उन्होंने मुझे कहा कि कविता ने हमें तुम्हारे बारे में नहीं बताया लेकिन हमारे किसी रिश्तेदार ने तुम दोनों को साथ में देख लिया था और उन्होंने हमें तुम्हारे बारे में बताया इसलिए हमने सोचा कि तुमसे एक बार मिल लेते हैं। उन्होंने मेरे बारे में पूछा और मेरे पापा मम्मी के बारे में भी उन्होंने पूछा तो मैंने उन्हें सब कुछ बता दिया था उसके बाद मैं अपने घर वापस लौट आया। कविता का मुझे फोन आया और कविता से मेरी काफी देर तक बात हुई मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की यह हो क्या रहा है। मैं कविता से प्यार जरूर करता था लेकिन उससे मैं शादी नहीं करना चाहता था अभी मैंने उससे शादी करने के बारे में कुछ सोचा नहीं था और ना ही कविता मुझसे शादी करना चाहती थी क्योंकि उसे भी कुछ समय चाहिए था। मुझे बेंगलुरु से कंपनी का ऑफर आया था और मैं बेंगलुरु जाना चाहता था लेकिन उससे पहले एक दिन कविता मुझसे मिलने के लिए आई।

वह मुझे कहने लगी राजेश क्या तुम बेंगलुरु जा रहे हो? मैंने उसे बताया हां मैं बेंगलुरु जा रहा हूं अब कविता बहुत ज्यादा दुखी हो गई थी उसने मुझे गले लगा लिया मैंने उसको कहा मैं तुम्हें फोन करता रहूंगा कविता ने मुझे गले लगा लिया और कहा कि मैं तुम्हें बहुत मिस करूंगी उसने मुझे गले लगाया तो उसके स्तन मेरी छाती से टकराने लगे और मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था। मैं कहीं ना कहीं कविता को चोदना चाहता था कविता भी मेरे लंड को लेने के लिए तैयार हो चुकी थी मैं कविता के होठों को चूमने लगा उसे मैंने बिस्तर पर लेटा दिया मैंने जब उसे बिस्तर पर लेटाया तो उसके स्तनों को मैं दबाने लगा और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। जब मैं उसके स्तनों को दबा रहा था तो मुझे उसके होठों को चूमने में बड़ा मजा आ रहा था और उसके होठों को चूमकर में इतना ज्यादा उत्तेजित हो रहा था अब मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और कविता ने उसे अपने मुंह में लिया मुझे और भी ज्यादा मजा आया। अब वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी तो मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था वह जिस प्रकार से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी उससे मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था और उसने मेरे लंड से पानी बाहर निकाल कर रख दिया था अब मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने कविता से कहा तुम जल्दी से मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर ले लो मैंने जब उसकी चूत की तरफ देखा तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकल रहा था मैंने उसकी चूत को चाट कर उसकी गर्मी को और भी ज्यादा बढ़ाना शुरू कर दिया उसकी टाइट चूत की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था।

मैं जब उसकी चूत को चाट रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी मैंने जब अपने लंड पर तेल की मालिश की तो मेरा लंड पूरी तरीके से चिकना हो चुका था जैसे ही मैंने अपने मोटे लंड को कविता की चूत पर लगाया तो उसकी चूत खुल गई जिसके बाद मैंने धीरे-धीरे उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक चला गया था अब मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब उसकी योनि के अंदर तक मेरा लंड चला गया तो मैंने उसे बडे अच्छे तरीके से चोदना शुरु किया लेकिन उसकी सिसकारियां बढ़ती ही जा रही थी मेरे अंदर की आग बहुत ही अधिक हो चुकी थी मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था और उसे भी अच्छा लग रहा था। वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर कि आग बहुत ज्यादा बढ़ रही है अब तुम मुझे ऐसा ही धक्के मारते रहो। मैंने उसे बड़ी तेज गति से धक्के मारने शुरू कर दिए थे जिससे कि कविता की चूत से पानी बाहर की तरफ को निकाल रहा था और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जब मैं उसे धक्के मारता तो मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी और मेरी आग इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैंने उसे कहा मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा हूं मैं तुम्हारे अंदर अपने माल को गिराना चाहता हूं।

वह मुझे कहने लगी तुम मेरी चूत के अंदर अपने माल को गिरा दो मैंने भी अपने माल को उसके अंदर ही गिरा दिया जिससे कि वह खुश हो गई। वह मुझे कहने लगी आज तो मुझे मजा ही आ गया मैंने उसे कहा मुझे भी तो तुम्हें चोदकर बहुत मजा आ गया तो वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी उसके बाद दोबारा से उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर मेरी गर्मी को दोबारा से बढ़ा दिया जिससे कि मेरे अंदर की आग बढ़ चुकी थी। अब मैं दोबारा से उसे चोदने के लिए तैयार था मैंने उसे घोड़ी बना कर बड़े अच्छे से चोदा और करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मेरा माल बाहर की तरफ आ गया मैंने उसे कहा आज मुझे बड़ा मजा आ गया तो वह मुझे कहने लगी मजा तो मुझे भी बड़ा आ गया उसके बाद कविता और मेरे बीच में सेक्स संबंध बहर बने। अब मैं जॉब करने के लिए बेंगलुरु आ चुका हूं। कविता और मेरा रिश्ता भी अब खत्म हो चुका है क्योंकि बेंगलुरु में मुझे एक लड़की मिल चुकी है जिससे कि मैं बहुत ही ज्यादा प्यार करता हूं।