चिंगारी दोनों तरफ थी

antarvasna, kamukta मैं और मेरी सहेली रेखा एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते थे लेकिन रेखा के भाई संजय की वजह से मेरी वह जॉब भी छूट गई और रेखा ने भी कुछ समय बाद वहां से रिजाइन दे दिया, रेखा का भाई मुझे पसंद करता था लेकिन मैंने उसे कभी भी पसंद नहीं किया, मैंने संजय को कभी भी पसंद नहीं किया क्योंकि उसको लेकर मेरे दिल में कुछ था ही नहीं,  वह बहुत अच्छा लड़का है लेकिन मैंने कभी भी उसके बारे में नहीं सोचा मैं अपने ऑफिस के ही एक लड़के से प्रेम करती थी जिसका नाम कपिल है, कपिल और मेरी मुलाकात ऑफिस में ही हुई थी और हम दोनों का प्रेम परवान चढ़ने लगा, मैं और कपिल एक दूसरे को बहुत पसंद किया करते थे यह बात रेखा को भी अच्छे से मालूम थी।

एक दिन मैं रेखा के घर पर गई थी मैं उससे पहले रेखा के घर पर कभी भी नहीं गई थी उस दिन रेखा ने मुझे संजय से मिलवाया और शायद संजय को मैं पसंद आ गई जिस वजह से वह मेरे पीछे पड़ गया और अक्सर वह मुझे फोन करने लगा मुझे यह सब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था लेकिन संजय को तो जैसे इन सब बातों की कोई परवाह ही नहीं थी और कई बार तो मैं उसका फोन काट दिया करती लेकिन उसके बावजूद भी वह मुझे फोन किया करता। संजय हमारे ऑफिस में आने लगा और जब भी हमारा ऑफिस छूटता तो वह मुझे मेरे ऑफिस के बाहर दिखता, मुझे उसे देखना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था और संजय को कपिल और मेरे रिश्ते के बारे में पता चला तो उसने मेरे और कपिल के रिश्ते को पूरी तरीके से चकनाचूर कर दिया इसमें रेखा ने भी संजय का ही साथ दिया क्योंकि रेखा भी उसकी बहन है।

रेखा ने संजय का साथ दिया तो कपिल को उन दोनों ने मेरे खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि कपिल भी इतना नासमझ होगा कि उन दोनों की बातों में आ जाएगा वह उन दोनों की बातों में आ गया और मुझसे कपिल ने दूरी बनानी शुरू कर दी मैंने कपिल को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन मुझे तो उस वक्त समझ ही नहीं आया कि कपिल आखिर मुझसे दूरी क्यों बना रहा है, रेखा भी चाहती थी कि संजय और मेरे बीच नजदीकियां पैदा हो जाए लेकिन मैंने कभी भी संजय को अपने नजदीक आने ही नहीं दिया और फिर कपिल भी मेरी जिंदगी से दूर जा चुका था उसके बाद मैंने भी अपनी जॉब से रिजाइन दे दिया और कुछ समय बाद रेखा ने भी वहां से जॉब छोड़ दी थी संजय अभी भी मुझे फोन करता है लेकिन मैंने उसका फोन ना तो कभी उठाया और ना ही मैंने उससे बात की मुझे इस बात का दुख हमेशा रहेगा कि कपिल ने कभी भी मुझसे बात नहीं की क्योंकि उसे मुझ पर शायद बिल्कुल भी भरोसा नहीं था इस वजह से वह मुझसे बात ही नहीं कर पाया यदि कपिल को मुझ पर भरोसा होता तो कपिल मुझसे जरूर बात करता, हम दोनों ने एक साथ काफी अच्छा समय बिताया था लेकिन अब ना तो कपिल मेरे पास है और ना ही हम दोनों के बीच पहले जैसी कोई बात रह गई है मुझे इस बात का हमेशा ही बहुत दुख है उसके बाद कपिल और मेरी मुलाकात एक बार हुई थी लेकिन कपिल ने भी मुझ से बात नहीं की और मैंने भी उससे बात नहीं की। मैं अब ज्यादातर समय घर पर ही रहा करती मेरा तो जैसे प्यार से अब भरोसा ही उठ चुका था और मुझे किसी के साथ भी रिलेशन में नहीं रहना था लेकिन मुझे नहीं पता था कि जल्द ही मेरे जीवन में आनंद आ जाएगा, आनंद हमारे घर पर आया हुआ था क्योंकि वह मेरे पिताजी के दोस्त का बेटा है इसलिए वह हमारे घर पर पापा से मिलने के लिए आया था, जिस दिन वह हमारे घर पर आया तो पापा ने मुझे आनंद से मिलवाया आनंद सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और वह बेंगलुरु में जॉब करता है। पापा ने कहा कि आनंद ने अपनी ही कंपनी यहां खोल ली है, पापा आनंद को अच्छी तरीके से जानते हैं क्योंकि पापा का आनंद के घर पर आना जाना लगा रहता है उस दिन आनंद भी कुछ काम के सिलसिले में घर पर आया हुआ था क्योंकि पापा को आनंद से मिलना था, पापा ने जब उससे पूछा कि बेटा तुम्हारा काम अब कैसा चल रहा है तो वह कहने लगा कि अब तो काम ठीक चल रहा है लेकिन शुरूआत में मुझे काफी तकलीफ हुई।

पापा मुझे कहने लगे कि बेटा यदि तुम्हें भी आनंद के साथ काम करना हो तो तुम आनंद के साथ काम कर सकती हो आनंद से तुम्हें काफी कुछ चीजें सीखने को मिलेगी और इत्तेफाक से आनंद को भी उस टाइम ऑफिस में एक पार्टनर की जरूरत थी, आनंद ने मुझे कहा कि यदि तुम्हे कोई दिक्कत ना हो तो तुम मेरे साथ काम कर लो, मुझे भी बहुत अच्छा लगा क्योंकि आनंद को हम समय काफी समय से जानते है। आनंद कहने लगा अंकल तुम्हारी तारीफ तो हमेशा ही किया करते हैं कि तुम काम में बहुत ही ज्यादा स्मार्ट हो, मैंने आनंद से कहा लेकिन मुझे अब काम करना ही नहीं है मैं घर पर खुश हूं। मुझे कहां पता था कि कुछ दिनों बाद मेरा मन काम करने का होने लगेगा और मैं आनंद से मिलने के लिए उसके ऑफिस में चली गई, जब मैं उसके ऑफिस में गई तो आनंद मुझे देख कर कहने लगा चलो तुमने कम से कम मेरे ऑफिस आने का कष्ट तो किया, मैंने आनंद से कहा अरे आनंद ऐसी कोई बात नहीं है मैंने सोचा कि चलो तुम्हारा ऑफिस देख आती हूं।

आनंद ने मुझे अपने केबिन में बैठाया और कहा कि मैंने अभी तो अपने पास ज्यादा एंप्लॉय नहीं रखे हैं लेकिन धीरे-धीरे मैं अब काम के लिए एंप्लॉय रखूंगा इसके लिए मुझे तुम्हारी मदद चाहिए होगी, मैंने आनंद से कहा लेकिन मुझे तुम्हारे फील्ड के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है, वह कहने लगा कि तुम्हें सिर्फ मेरे साथ लोगों के पास मीटिंग के लिए आना है और धीरे-धीरे तुम सीखती चली जाओगी और मैं भी तुम्हें काम सिखा दूंगा। आनंद ने मुझे अपने काम के बारे में बताया तो मैंने कहा चलो मैं ट्राई कर सकती हूं यदि मुझे अच्छा लगा तो मैं तुम्हारे साथ काम कर लूंगी और मैंने आनंद के साथ उसके ऑफिस में ज्वाइन कर लिया आनंद ने मुझे कहा कि मैं तुम्हें शुरुआत में ज्यादा तनख्वाह तो नहीं दे पाऊंगा लेकिन बाद में मैं तुम्हें तनखा देने लगूंगा, मैंने उसे कहा चलो इस बहाने मेरा भी टाइम पास हो जाया करेगा वैसे भी मैं घर पर अकेली बैठी थी। मैं आनंद के साथ काम करने लगी थी और मुझे आनंद का साथ अच्छा लगने लगा धीरे धीरे आनंद का भी काम चलने लगा और उसका काम बहुत अच्छा चलने लगा था वह मुझे कहने लगा कि यह सब तुम्हारी वजह से ही हो पाया है, आनंद मुझे हर एक बात के लिए प्रोत्साहित करता जिससे कि मेरा भी हौसला बढ़ने लगा और मैं आनंद के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लगी, आनंद के बारे में मुझे काफी सारी चीजें पता लगने लगी थी, आनंद एक अच्छा लड़का है और वह मेरी भी बहुत ही इज्जत करता है। मैंने आनंद से कहा आज पापा ने तुम्हें घर पर बुलाया है, आनंद मुझसे कहने लगा लेकिन अंकल ने मुझे आज घर पर क्यों बुलाया है, वह मुझसे इस बारे में पूछने लगा तो मैंने उसे कहा मुझे भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है आनंद और मैं साथ में ही उस दिन ऑफिस से घर गए जब हम दोनों घर गए तो पापा ने आनंद को बैठाया और पूछने लगे की रवीना अच्छे से काम तो कर रही है, आनंद कहने लगा की रवीना की वजह से ही मेरा काम इतना आगे बढ़ पाया और मआई रवीना के काम से बहुत खुश हूं।

आनंद ने उस दिन हम लोगों के साथ ही डिनर किया और वह रात को अपने घर चला गया। एक दिन आनंद और मैं ऑफिस में साथ में बैठे हुए थे आनंद ने उस दिन मुझसे पूछा कि क्या कभी तुम्हारे जीवन में कोई था। मैंने कुछ देर तक तो सोचा कि क्या मैं आनंद को अपने जीवन के बारे में बताऊ लेकिन फिर मैंने आनंद को अपने और कपिल के रिश्ते के बारे में बता दिया। मैंने जब आनंद को यह सब बताया तो आनंद कहने लगा तुम लोगों के बीच कभी कुछ हुआ था। मैंने आनंद से कहा हां एक बार मेरे और कपिल के बीच में सेक्स हुआ था लेकिन उसके बाद कभी भी हम दोनों के बीच में ऐसा कुछ नहीं हुआ। आनंद कहने लगा चलो यह तो आम बात है उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगा क्या मैं तुम्हें अपना बना सकता हूं। मैं आनंद को कोई जवाब नहीं दे पाई मैंने जैसे ही आनंद के होठों को किस किया तो उसे भी अच्छा लगने लगा वह भी मेरे होठों को चूमने लगा।

मैं काफी देर तक आनंद के होठों को किस करती रही और जब उसने मेरे कपड़ों को उताराना शुरू किया तो मैं थोड़ा अनकंफरटेबल महसूस करने लगी। मैंने आनंद को कहा यह सब मत करो लेकिन अब चिंगारी हम दोनों के दिल में सुलग चुकी थी और वह आग का रूप ले चुकी थी इसलिए यह सब तो होना ही था। जैसे ही आनंद ने मेरी चूत पर अपनी जीभ को लगाना शुरू किया तो मैं मचलने लगी वह भी पूरी तरीके से जोश में आ गया। जब उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मैं तड़पने लगी वह बहुत तेजी से मुझे धक्के देने लगा, वह मेरी चूत में इतनी तेजी से धक्के मार रहा था मुझे भी अच्छा महसूस होने लगा मैं भी अपनी चूतड़ों को आनंद से मिलाने लगी। मेरी बड़ी चूतडे जब आनंद के लंड से टकराती तो मुझे भी दर्द महसूस होता है और उस दर्द में भी अलग ही मजा था। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ काफी देर तक संभोग किया मैं आनंद के साथ संभोग कर के बहुत ज्यादा खुश थी क्यों की शायद मैं भी आनंद को दिल ही दिल चाहती थी। यह बात मुझे नहीं पता थी परंतु जब मेरे और आंनद के बीच संबंध बने तो मैंने आनंद को अपना दिल सौंप दिया था, शायद आनंद भी मुझे पहले से ही पसंद करता था इसी वजह से तो उस दिन आनंद ने यह बात मुझसे पूछी थी। अब हम दोनों के बीच अक्सर सेक्स संबंध बनने लगे थे और हम दोनों ने एक साथ रहने का भी फैसला कर लिया था।