चलो चलें सेक्स करने

Antarvasna, desi porn kahani दिल्ली में मेरे पिताजी का जूतों का कारोबार है और अब उस कारोबार को मैं ही आगे संभाल रहा हूं घर में मैं ही एकलौता हूं इसलिए सारी जिम्मेदारी मुझ पर ही है। मैं पढ़ने में बचपन से ही अच्छा था इसलिए मैं चाहता था कि मैं किसी सरकारी विभाग में नौकरी करूं लेकिन पिताजी ने जब मुझसे कहा कि बेटा मैंने अपने जीवन के इतने वर्ष इस काम को दिए हैं। मैंने अपनी मेहनत से यह सब काम शुरू किया था मैं नहीं चाहता कि इसे मैं बंद करूं बाकी तुम्हारी मर्जी जो तुम्हें अच्छा लगता है तुम वो करो। मेरे पिताजी ने मुझ पर कभी भी आज तक किसी चीज का दबाव नहीं डाला लेकिन उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर की तो मैं भी उन्हें मना ना कर सका और मुझे लगा कि मुझे उनके काम को आगे बढ़ाना चाहिए। मैंने अपने पिताजी के काम को आगे बढ़ाने के बारे में सोच लिया था और जब पहली बार मैं अपने पिताजी की दुकान पर बैठा तो मुझे लगा कि यह काम इतना भी आसान होने वाला नहीं है।

हमारे पास काफ़ी ऑर्डर आते थे लेकिन उसके बावजूद भी मुझे लगता था कि हमें अपने बिजनेस को थोड़ा और बढ़ाना चाहिए क्योंकि कुछ ना कुछ कमी तो हमारे काम में थी जो इतना पुराना होने के बावजूद भी हम लोग इतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रहे थे। इसी वजह से मैंने पिता जी से इस बारे में बात की तो मेरे पिता जी कहने लगे बेटा आजकल बहुत ज्यादा कंपटीशन होने लगा है। मैंने अपने पिताजी से कहा मुझे मालूम है कि मार्केट में बहुत कंपटीशन है लेकिन हम लोगों को भी कुछ नया सोचना पड़ेगा इसलिए मैं कुछ नया सोचने लगा जिससे कि काम और भी ज्यादा बढ़ सके। हमारे पास डीलरों की कोई कमी नहीं थी हमारे पास काफी छोटे बड़े डीलर आया करते थे क्योंकि हम लोग काफी वर्षो से यह काम कर रहे हैं मुझे लगता कि हमें कुछ और नया करना चाहिए। अब हम लोगों ने समय के साथ अपने आप को बदला और काम में भी तेजी आने लगी। काम पहले से ही अच्छा चल रहा था लेकिन उसमें और भी ज्यादा मुनाफा होने लगा मेरे पिताजी ने मुझे कहा सुरेश बेटा मुझे तुम पर पूरा यकीन है तुम जल्दी ही काम को और भी ज्यादा आगे बढ़ा पाओगे। कुछ ही समय बाद मैंने अपने दुकान को एक ब्रांड बना दिया मेरे पास अब काफी डिमांड आने लगी थी और जब मेरे पास डिमांड आने लगी तो उसके बाद सारी जिम्मेदारी मुझ पर ही आ चुकी थी। मेरे पिताजी ने मुझे कहा कि बेटा तुम्हारे चाचा से मिले हुए भी काफी समय हो चुका है तो सोच रहा था कि उनसे मिलने के लिए जयपुर जाऊं।

 मैंने अपने पिताजी से कहा हां तो हम सब लोग जयपुर हो आते हैं वैसे भी काफी समय से हम लोग कहीं साथ में नहीं गए हैं। मेरे चाचा जी का भी जूते का ही कारोबार है और वह जयपुर में काम करते हैं पिताजी और उन्होंने ही मिलकर दिल्ली में काम शुरू किया था। जब दिल्ली में काम अच्छा चलने लगा तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना जयपुर में भी हम लोग काम शुरू करें उस वक्त चाचा ने कहा कि मैं जयपुर में जाकर काम शुरू करता हूं। उन्होंने जयपुर में जब काम शुरू किया तो उसके बाद वहां पर काम अच्छे से चलने लगा और चाचा जी जयपुर का ही काम संभालने लगे। आज चाचा जी का काम बहुत अच्छा चलता है और उनसे मिले हुए हम लोगों को काफी समय हो चुका था तो पिताजी चाहते थे की हम उनसे मिलने के लिए जाए। हम सब लोगों ने जयपुर जाने की तैयारी कर ली थी और जब हम लोग ट्रेन का इंतजार कर रहे थे तो ट्रेन करीब आधा घंटा लेट थी हम लोग स्टेशन पर ही बैठे हुए थे मेरे साथ मेरे माता-पिता थे। चाचा जी को यह मालूम था कि हम लोग जयपुर आने वाले हैं इसलिए उन्होने सारी व्यवस्था हमारे लिए अच्छे से की हुई थी और कुछ ही समय बाद ट्रेन भी आ गई। जैसे ही ट्रेन आई तो हम सब लोग ट्रेन में बैठे जब हम लोग ट्रेन में बैठ गए तो हमारे बगल में एक और फैमिली थी उन्हें भी शायद जयपुर ही जाना था। वह लोग आपस में बात कर रहे थे मैंने अपने पापा से कहा यदि आपको आराम करना है तो आप आराम कर लीजिए वह कहने लगे नहीं आराम क्या करना बस कुछ देर बाद तो हम लोग जयपुर पहुंची जाएंगे। हम सब लोग साथ में बैठे हुए थे लेकिन हमारे बगल में जो बैठे थे उनके साथ एक लड़की थी मैं बार-बार उसकी तरफ देखे जा रहा था और वह लोग भी उसका नाम ले रहे थे उसका नाम राधिका है।

मैं जब राधिका की तरफ देखता तो मुझे ऐसा लगता जैसे वह हमारी तरफ देख रही है मैंने राधिका से बात कर ली। जब मेरी राधिका से बात हुई तो उसने मुझे कहा तुम्हें जब समय मिले तो हम लोग साथ में घूमने के लिए चलेंगे राधिका बड़ी ही खुले विचारों की थी और वह बहुत अच्छी थी। मैं उससे मिलने के लिए बेताब था जैसे ही हम लोग जयपुर पहुंच गए तो वहां से हम लोग चाचा जी के घर पर गए। काफी समय बाद हमारा पूरा परिवार चाचा जी से मिलने के लिए जा रहा था तो चाचा जी और चाची बहुत खुश थे उनके घर में उनके बच्चे भी बहुत खुश थे। हम लोग जैसे ही वहां पहुंचे तो उन लोगों ने बड़ी अच्छी व्यवस्था की हुई थी हम लोग काफी वर्षों बाद अपने चाचा के घर जा रहे थे। जब हम वहां पहुंच गए तो पिताजी और चाचा जी एक दूसरे के गले मिले उसके बाद चाचा जी ने मुझे अपने गले लगाया और कहने लगे बेटा तुमने भी अब काम संभालना शुरू कर दिया है और भैया तुम्हारी बड़ी तारीफ करते हैं कि तुम काम को काफी ऊंचाइयों पर ले कर चले गए हो। मैंने चाचा से कहा यह तो उनका बड़प्पन है जो मुझे उस लायक उन्होंने समझा और पिताजी का मैं जिंदगी भर एहसानमंद रहूंगा इतना तो शायद मैं कभी किसी नौकरी में नहीं कमा पाता जितना की मैंने अभी कमा लिया है। चाचा कहने लगे चलिए आज तो आप लोग आराम कर लीजिए कल हम सब लोग साथ में कहीं चलेंगे।

अगले दिन हम लोग जल्दी उठ गए मैं भी नहाने के लिए चला गया जब मैं नहा कर बाहर निकला तो चाचा कहने लगे जल्दी से तैयार हो जाओ हम लोग तैयार हो गए। जैसे हम लोग तैयार हुए तो उसके बाद हम सब लोग घूमने के लिए निकल पड़े उस दिन हम सब लोगों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया शाम के वक्त हम लोग वापस लौटे तो मुझे ध्यान आया कि मुझे राधिका को फोन करना था। मैंने राधिका को फोन किया उसने फोन उठाया और कहने लगी तुम कहां पर हो, हम लोग सिर्फ एक ही बार एक दूसरे से मिले थे लेकिन जिस प्रकार से वह मुझे कह रही थी कि तुम कहां पर हो तो उससे मुझे लगा जैसे की मैं राधिका को कितने समय से जनता हूँ। मेरे अंदर राधिका को मिलने की अलग ही खुशी थी जब मैं राधिका को मिला तो हम दोनों साथ में बैठ कर बात करने लगे। हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे कि तभी मेरे चाचा जी की लड़की वही पास से गुजरी उसने मुझे देख लिया था मैंने उसे अपने पास बुलाया और उसे राधिका से मिलवाया वह ज्यादा देर तक हमारे साथ नहीं रुकी और वह वहां से घर चली गई। जैसे ही वह वहां से घर गई तो उसके बाद मैं और राधिका साथ में बैठकर एक दूसरे से बात करने लगे हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे तो हमें काफी अच्छा लग रहा था। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था और राधिका को भी बहुत अच्छा लगा लेकिन उस दिन जब मैंने राधिका के हाथों को अपने हाथों में लिया तो उसे अच्छा लगने लगा। वह मेरी आंखों में आंखें डाल कर देख रही थी मैंने उसे कहा मुझे तुम्हें देखने में बड़ा अच्छा लग रहा है वह मेरे साथ आने के लिए तैयार हो गई।

मैं उसे लेकर एक होटल में चला गया जब मै उसे लेकर होटल में गया तो वहां पर मैंने उसके बदन से सारे कपड़े उतार दिए और उसकी पिंक कलर की पैंटी ब्रा को मैंने जब अपने हाथों से निकाला तो मेरा लंड 90 डिग्री पर खड़ा हो गया। जैसे ही मैंने अपने लंड को राधिका के हाथों में दिया तो वह उसे हिलाने लगी जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और अच्छे से मेरे लंड को सकिंग करती तो उसे बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत आनंद आता। काफी देर तक ऐसा ही वह करती रही मैंने जब उसकी योनि का रसपान करना शुरू किया तो मैं समझ गया कि हम दोनों ही ज्यादा देर तक एक दूसरे के बदन की गर्मी को नहीं झेल पाएंगे। मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर प्रवेश करवा दिया जैसे ही उसकी योनि में लंड प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और मुझे कहने लगी तुमने मेरी सील तोड़ दी।

मैंने जब उसकी चूत की तरफ देखा तो उसकी योनि से खून का बहाव हो रहा था वह बहुत तेज आवाज में सिसकिया ले रही थी। उसकी सिसकिया इतनी तेज होती की मेरे अंदर का जोश और जाग जाता मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के दिए जाता। जब मेरे अंदर का जोश बढता तो मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के दिए जा रहा था। मैंने उसे बहुत देर तक चोदा जिससे कि हम दोनों के शरीर से गर्मी बाहर निकलने लगी और हम दोनों पसीना पसीना होने लगे मैंने उसकी दोनों जांघों को कसकर पकड़ लिया। उसकी योनि की तरफ मैंने देखा तो उसकी योनि से खून निकल रहा था वह मेरा साथ बड़ी अच्छी तरीके से दे रही थी। वह मुझे कहती तुम और भी तेजी से मुझे धक्के दो मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उसके साथ 10 मिनट तक सेक्स संबंध बनाए उसके बाद हम दोनों संतुष्ट हो गए। जब हम दोनों संतुष्ट हो गए तो मुझे बहुत खुशी हुई कि मैं राधिका के साथ सेक्स कर पाया। हम दोनों की अब भी फोन पर बात होती रहती है और वह मुझसे चुदने को बेताब रहती है।