भाग्य मेरा साथ देगा

Hindi sex kahani, antarvasna मैंने अपनी मां से कहा मां जल्दी से मेरा टिफिन लगा दो मुझे लेट हो रही है मेरी मां कहने लगी तुम ही तो देर कर रही हो मैंने तो कब का तुम्हारा टिफिन पैक कर दिया है जल्दी से तुम तैयार हो जाओ। मां ने मेरा हाथ में टिफिन दिया और कहने लगी बेटा तुम आज घर जल्दी आ जाना तुम्हारे पापा का जन्मदिन है। मैंने मम्मी से कहा क्या बात कर रही हो पापा का जन्मदिन है और मेरे दिमाग से यह बात कैसे निकल गई लेकिन तब तक मेरे पापा ऑफिस जा चुके थे मैंने उन्हें फोन कर के उनके जन्मदिन की बधाई दी। मैंने अपनी मां से कहा कि मैं जल्दी घर आ जाऊंगी और यह कहकर मैं अपने ऑफिस के लिए निकल गई। मैं जब अपने ऑफिस पहुंची तो उस दिन हमारे ऑफिस में एक जरूरी मीटिंग होने वाली थी। हमारी मीटिंग भी खत्म हो चुकी थी और उसके कुछ देर बाद मैंने अपने मैनेजर से कहा कि सर मुझे आज जल्दी घर जाना है वह कहने लगे सुरभि तुम आज जल्दी घर क्यों जाना चाहती हो।

मैंने अपने  मैनेजर से कहा सर मुझे आज घर जल्दी जाना पड़ेगा क्योंकि मेरे पिता जी का आज जन्मदिन है मैनेजर ने मुझे कहा ठीक है तुम जल्दी चले जाना। मैं उस दिन घर जल्दी पहुंच गई और जब मैं घर पहुंची तो मैं अपने पापा के लिए केक ले आई थी मेरी मम्मी ने मुझे कह दिया था कि तुम आते वक्त केक ले आना। मैं केक ले आई तो मैंने उसे फ्रिज में रखा मैंने मम्मी से कहा पापा कब तक आने वाले हैं मम्मी कहने लगी उनका तो तुम्हें मालूम हीं है कि वह ऑफिस से देर में ही घर लौटते हैं। मैंने मम्मी से कहा हम लोग पापा का इंतजार करते हैं और पापा कुछ ही देर बाद आ गए जब पापा आए तो हम लोगों ने उनके लिए केक काटा। काफी समय बाद घर में सब लोग एक साथ थे मेरे दोनों बड़े भैया बेंगलुरु में अपना रेस्टोरेंट चलाते हैं हम लोगों ने उन्हें अपनी तस्वीरें भी भेजी वह खुश हो गए और कहने लगे हम लोग काफी मिस कर रहे हैं। मैं मुंबई में अपने मम्मी पापा के साथ रहती हूं और कुछ ही दिनों बाद मैं दिल्ली जाने वाली थी हमारे ऑफिस के कुछ काम के सिलसिले में मुझे दिल्ली जाना पड़ा।

 मैं जब दिल्ली गई तो वहां पर हमारे ऑफिस की तरफ से सारी व्यवस्था हमारे लिए कर दी थी हमारे ऑफिस की काफी शाखाएं हैं इसलिए वहां पर सब जगह से हमारे कंपनी में काम करने वाले लोग आए हुए थे। उसी दौरान मेरी मुलाकात कमल के साथ हुई कमल दिल्ली में ही जॉब करते हैं और कमल से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा। कमल से कुछ ही दिनों में मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी और मैं करीब एक हफ्ते तक दिल्ली में रही उसके बाद वापस मुंबई लौट आई। मैं जब मुंबई लौट आई तो कमल से भी मैं संपर्क में थी हम लोग आपस में बात किया करते थे कमल मुझे कहने लगे मैं जब मुंबई आऊंगा तो तुमसे जरूर मिलूंगा लेकिन कभी भी ऐसा संयोग नहीं बन पाया कि हम दोनों की मुलाकात हो पाती। कमल के बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं थी मैं दिल ही दिल कमल को चाहने लगी थी लेकिन जब मुझे कमल की शादी के बारे में पता चला तो मैंने कमल से बात करना काफी कम कर दिया था। कमल को इस बारे में पता नहीं था कि मैं उससे क्यों कम बात कर रही हूँ अब मैं उससे हमेशा टालने की कोशिश किया करती। कमल जब भी मुझे फोन करता तो मैं सोचती कि मैं उससे जितना कम बात करूँ उतना ही ठीक है इसीलिए मैंने कमल से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। मुझे कहां पता था कि कमल भी अपनी पत्नी अंजलि के साथ बिल्कुल भी खुश नहीं है कमल से मेरी कम ही बात हुआ करती थी। एक दिन कमल ने मुझे फोन किया पहले तो मैंने कमल का फोन उठाया नहीं लेकिन जब कमल से मेरी बात हुई तो मैंने कमल से कहा आप कैसे हो। कमल कहने लगे मैं तो ठीक हूं लेकिन मैं देख रहा हूं कि काफी दिनों से आप मुझसे टालने की कोशिश कर रही हैं। मैंने कमल से कहा नहीं ऐसा तो कुछ भी नहीं है लेकिन कमल को भी इस बात का एहसास हो चुका था परंतु उस दिन कमल और मेरी बात काफी देर तक हुई। मैं कमल को अच्छे से जान ही नहीं पाई थी क्योंकि हम लोगों की सिर्फ फोन पर बात होती थी और हम लोगों का मिलना एक बार ही हुआ था इस वजह से मैं कमल को ज्यादा अच्छे तरीके से पहचान ना सकी।

 कमल और मेरे बीच में उस दिन बात हुई जब हम दोनों के बीच में बात हुई तो कमल ने मुझे अपनी पत्नी के बारे में बताया और कहा उसकी पत्नी की और उसके बीच में कुछ अच्छे रिश्ते नहीं हैं और वह उसे डिवोर्स देने की सोच रहा है। मैंने कमल से कहा कमल तुम दोनों को आपस में बात करनी चाहिए कमल कहने लगा मैंने काफी कोशिश की कि मैं अपनी पत्नी से बात करूं लेकिन मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं है कि हम दोनों के रिश्ते पहले जैसे हो पाएंगे। कमल अपने रिश्ते से बिल्कुल भी खुश नहीं था पता नही इसमें कमल की गलती थी या उसकी पत्नी की लेकिन कमल अब अपनी पत्नी से अलग होना चाहता था। कमल की तरफ पहले से ही मेरा झुकाव था और मैं दोबारा से कमल की तरफ खींची चली गई। एक दिन मैंने उसे अपने दिल की बात कह दी लेकिन मेरे इस रिश्ते को शायद मेरे माता पिता और मेरे भैया कभी भी स्वीकार नहीं करते क्योंकि कमल पहले से ही शादीशुदा था इसलिए तो मैंने उन्हें यह बात नहीं बताई। एक दिन मैं कमल से फोन पर बात कर रही थी तभी मेरी मां पीछे से आ गयी और उन्होंने मुझे कमल से बात करते हुए देख लिया। मैंने उन्हें उस दिन कुछ नहीं बताया लेकिन कभी ना कभी तो मुझे अपने परिवार वालों को इस बारे में बताना ही था। आखिरकार मैंने उन्हें कमल और अपने रिश्ते के बारे में बता दिया वह लोग इस रिश्ते के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे।

 कमल और मेरे प्यार को कोई नाम नहीं मिलने वाला था क्योंकि मेरे पिताजी ने तो साफ तौर पर मना कर दिया था। वह कहने लगे कमल से तुम्हारी शादी किसी भी हाल में नहीं हो सकती वह पहले से ही शादीशुदा है और तुमने इस बारे में सोच भी कैसे लिया कि तुम उससे शादी करोगी। मेरे पिताजी ने मुझे बहुत डांटा और जब मेरे भाइयों को यह बात पता चली तो उन्होंने भी मुझे बहुत समझाया और कहा देखो तुम कमल से दूर ही रहो। कमल से मेरी बात तो होती थी लेकिन मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उससे मेरी शादी हो पाएगी लेकिन उसके बावजूद भी हम दोनों एक दूसरे से बात किया करते थे मैं कमल से चोरी छुपे फोन पर बात करती थी। कमल का डिवोर्स भी हो चुका था और वह काफी अकेला हो चुका था इसलिए वह चाहता था कि वह मेरे साथ जल्द से जल्द शादी करें। मैंने कमल से कहा मेरे परिवार वाले तुमसे कभी भी मेरी शादी नहीं करवाएंगे। कमल कहने लगे मैं तुम्हारे बिना रह नहीं पाऊंगा कमल और मैंने अपने जीवन का फैसला अपनी किस्मत पर छोड़ दिया। कमल ने मुंबई में जॉब करने के बारे में सोच लिया था वह कुछ ही समय बाद मुंबई आ गए। जब कमल मुंबई आए तो हम दोनों हर रोज ऑफिस से फ्री होने के बाद मिला करते। कमल जिस फ्लैट में रहते थे वहां पर भी मैं कभी-कभार कमल से मिलने के लिए जाया करती थी। एक दिन मैं कमल से मिलने गई तो कमल ने मुझे अपनी बाहों में लेने की कोशिश की मैंने कमाल से कहा मुझे यह सब बिलकुल अच्छा नहीं लगता। मेरी आपत्ति करने के बावजूद भी कमल ने मेरे होठों को चूम लिया वह मेरे होठों को अच्छे से चूमने लगे जिससे कि मेरे अंदर उत्तेजना जाग गई मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई। काफी देर तक कमल ने मेरे होठों का रसपान किया जब कमल ने मेरे कपड़ों को उतारना शुरू किया तो मैं कमल को रोकने की कोशिश करती रही लेकिन मेरे दिल से आवाज आई जो हो रहा है वह सब सही है।

 मैंने भी कमल को नहीं रोका कमल ने मेरी पैंटी और ब्रा उतारते हुए मुझे नंगा कर दिया। मैं कमल के सामने नंगी थी कमल ने मेरे स्तनों को चूसना शुरू किया। जब कमल ने मेरी योनि पर अपनी उंगली को लगाया तो उसकी चूत से पानी निकलने लगा था कमल मुझे कहने लगे मैं तुम्हें देखकर बिल्कुल भी रहा नहीं पा रहा हूं। यह कहते ही कमल ने अपने मोट लंड को मेरी योनि पर सटाया दिया वह मेरी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाने लगे। जैसे ही कमल का मोटा लंड मेरी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मैं चिल्ला उठी मेरे मुंह से चीख निकली। मैंने कमल से कहा आज तो मजा आ गया यह कहते ही कमल ने मुझे बड़ी तेजी से धक्के दिए। मैं कमल के नीचे लेटी हुई थी कमल ने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया वह मुझे तेजी से धक्के देने लगे।

जैसे ही कमल ने मुझे अपने ऊपर आने के लिए कहा तो मैंने कमल के मोटे लंड को अपन चूत मे ले लिया कमल मुझे तेजी से धक्के मार रहे थे। मैं भी अपनी चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी मेरी नजर जब कमल के लंड पर पडी तो मुझे ऐसा लगा जैसे कमल के लंड पर खून लगा हुआ है। मैंने कमल से पूछा क्या तुम्हारे लंड पर खून लगा है तो कमल कहने लगे तुम्हारी योनि से खून निकल रहा है मैं घबरा गई लेकिन उस वक्त मुझे बड़ा मजा आ रहा था। वह मेरा पहला मौका था मुझे नहीं मालूम था कि मेरी सील टूट चुकी है जिसके साथ ही कमल और मैंने काफी देर तक एक दूसरे के साथ संभोग किया। हम दोनों के बीच अब अंतरग संबंध स्थापित हो चुके थे। उसके बाद मै कमल से मिलने के लिए जाती रहती थी जब भी मैं कमल से मिलने के लिए जाती तो हम दोनों के बीच हमेशा अंतरंग संबंध बन जाते। मुझे बहुत खुशी है कि कमल के साथ मेरे रिश्ते बहुत ही अच्छे से चल रहे थे हम दोनो एक दूसरे के साथ खुश है।