बाथरूम में गरमागरम चुदाई

Antarvasna, desi kahani: मैं जब अपने कॉलेज पहुंचा तो उस वक्त हमारी क्लास शुरु हो चुकी थी इसलिए मैंने सोचा कि अब क्लास में जाने का कोई फायदा नहीं है इसलिए मै कॉलेज की कैंटीन में बैठा हुआ था। जब मैं कॉलेज की कैंटीन में बैठा हुआ था तो उस वक्त मेरी नजर बिल्कुल मेरे सामने वाली टेबल पर पड़ी मैंने सामने देखा तो सामने एक लड़की बैठी हुई थी उसका चेहरा देखकर मैं उसकी तरफ खिंचा चला गया। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें और उसकी काली जुल्फे मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रही थी मैंने जैसी लड़की के बारे में सोचा था वह बिल्कुल वैसी ही थी लेकिन मैं उसके बारे में जानता नहीं था। मैं अकेला ही उस वक्त कैंटीन में बैठा हुआ था थोड़ी देर बाद ही मेरा दोस्त भी मेरे साथ आकर बैठा मैंने उससे पूछा कि क्या क्लास खत्म हो चुकी है। वह मुझे कहने लगा कि हां क्लास खत्म हो गई है इसीलिए तो मैं यहां पर आया हूं उसने मुझसे पूछा कि राजीव तुम आज क्लास में क्यों नहीं आए। मैंने उससे कहा कि मुझे आज आने में देर हो गई थी और जब मैं पहुंचा तो उस वक्त मुझे लगा कि अब क्लास में जाना ठीक नहीं रहेगा इसलिए मैं कैंटीन में बैठा हुआ था।

मैंने अपने दोस्त से कहा कि तुम्हें वह लड़की दिखाई दे रही है वह इधर उधर देखने लगा मैंने उससे कहा कि तुम बिल्कुल सामने वाली टेबल पर देखो तुम्हें वह लड़की नजर आ रही है वह कहने लगा हां। मैंने उससे कहा यार वह लड़की मुझे बहुत अच्छी लग रही है क्या तुम उसके बारे में कुछ जानते हो वह मुझे कहने लगा कि मुझे उसके बारे में ज्यादा तो नहीं पता लेकिन इतना पता है कि कुछ समय पहले ही उसने कॉलेज में दाखिला लिया है। मेरे दोस्त को उसके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था इसीलिए मैं चाहता था कि उसके बारे में मुझे पता चल सके। मैं काफी दिनों तक उसके बारे में जानने की कोशिश करता रहा लेकिन मुझे भी कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई। उस वक्त मैं काफी हैरान रह गया जब हमारे प्रोफेसर मोहन के साथ वह लड़की मुझे दिखाई दी मुझे कुछ समझ नहीं आया लेकिन जब मुझे इस बारे में पता चला कि वह प्रोफेसर मोहन की बेटी है तो मैं थोड़ा हैरान जरूर रह गया क्योकि मैंने कभी सोचा नही था लेकिन मुझे उससे बात तो करनी ही थी।

अब उसके बारे में मैंने जानकारी जुटाना शुरू कर दिया हर रोज की तरह मैं अपना कॉलेज खत्म होने के बाद उसके पीछे जाया करता। शायद उसने भी मुझे अपना पीछा करते हुए देख लिया था और वह एक दिन मुझसे पूछने लगी कि क्या आप हमारे कॉलेज में पढ़ते हैं। मेरी तो उस दिन हालत ही खराब हो गई लेकिन फिर भी मैंने जवाब देते हुए उसे कहा कि हां मैं उसी कॉलेज में पढ़ता हूं और मेरा नाम राजेश है। मैं चाहता था कि मैं उससे उसका नाम पूछूं मुझे अभी तक उसका नाम भी पता नहीं था लेकिन उसने मुझसे बात कर के मेरे दिल के तारों को छेड़ दिया था अब मैं किसी भी तरीके से उससे बात करना ही चाहता था। अगले दिन जब वह कॉलेज में आई तो मैंने उससे बात कर ली उसे मेरा नाम तो पता ही था लेकिन उसका नाम भी मुझे पता चल चुका था उसका नाम आकांक्षा है। आकांक्षा से बात कर के मुझे बहुत अच्छा लग रहा था हमारी पहली मुलाकात में तो इतनी बात नहीं हो सकी लेकिन धीरे-धीरे हम दोनों एक दूसरे से मिलने लगे और मैंने आकांक्षा का नंबर भी ले लिया था। आकांक्षा का मोबाइल नंबर मेरे पास आ चुका था और मैं अब उससे फोन के माध्यम से बात करने लगा था। हम दोनों की फोन पर काफी देर तक बातें हुआ करती लेकिन आकांक्षा अपने पिताजी को देखकर बहुत डरती थी मैंने आकांक्षा से कहा देखो आकांक्षा तुम्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। आकांक्षा हमेशा कहती कि उसके पिताजी बड़े ही गुस्से वाले हैं यदि उन्हें इस बारे में कुछ भी पता चला तो वह उस पर बहुत ज्यादा गुस्सा हो जाएंगे इसीलिए आकांक्षा हमेशा चोरी छुपे ही मुझसे बात किया करती। हम लोग कॉलेज में एक दूसरे से कम ही बातें किया करते थे मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हम दोनों के बीच चल क्या रहा है लेकिन जब मुझे एहसास होने लगा कि हम दोनों के बीच में प्यार हो चुका है तो मैंने आकांक्षा से एक दिन फोन पर यह बात पूछ ली लेकिन आकांक्षा के दिल में ऐसा कुछ भी नहीं था। आकांशा मुझे कहने लगी कि राजेश मुझे सिर्फ तुमसे बात करना अच्छा लगता है इसके आगे मैंने कभी कुछ सोचा नहीं है मुझे भी लगा कि चलो आकांक्षा और मेरे बीच बात हो ही रही है तो कभी ना कभी आकांक्षा को भी एहसास हो ही जाएगा।

मेरे कॉलेज की पढ़ाई अच्छे से चल रही थी लेकिन उसी दौरान हमारे कॉलेज के एग्जाम नजदीक आने वाले थे और मैं अपनी पढ़ाई में पूरी तरीके से व्यस्त हो गया। उस दौरान मेरी आकांक्षा से कोई भी बात ना हो सकी और जब मेरे कॉलेज के एग्जाम खत्म हो गए तो मैंने आकांक्षा से बात की। जब मेरी बात आकांशा से हुई तो मुझे आकांक्षा से बात करना बहुत अच्छा लगा और आकांक्षा से जिस प्रकार से मेरी बात हो रही थी आकांक्षा ने मुझसे कहा कि मुझे तुमसे मिलना है। आकांक्षा मुझसे मिलने के लिए बहुत ज्यादा बेताब थी और वह अब मुझसे मिलना चाहती थी मैंने आकांक्षा को कहा लेकिन अभी तो मैं तुमसे नहीं मिल पाऊंगा। आकांक्षा ने मुझे कहा कि मुझे आज ही तुमसे मिलना है और जब शाम के वक्त मैं आकांशा को मिला तो मैं और आकांक्षा साथ में बैठे हुए थे। हम दोनों एक पार्क में बैठे हुए थे और एक दूसरे से बात कर रहे थे आकांक्षा ने मुझे कहा कि राजेश इतने दिनों से मेरी तुमसे बात नहीं हुई तो मुझे काफी अकेलापन महसूस हो रहा था और मुझे कुछ अच्छा भी नहीं लग रहा था।

आकांक्षा को यह एहसास हो चुका था कि वह भी मुझसे प्यार करने लगी है आकांक्षा और मैं एक दूसरे से अपने दिल की बात कहना चाहते थे। आकांक्षा ने जब मुझसे अपने दिल की बात पहली बार कहीं तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा हम दोनों एक दूसरे के हो चुके थे। हम दोनों चोरी छुपे एक दूसरे से हर रोज मुलाकात करते लेकिन यह बात जब आकांशा के पिताजी को पता चली तो उन्होंने आकांक्षा से मेरा मिलना बंद करवा दिया। वह आकांक्षा पर पूरी तरीके से निगरानी रखते वह कॉलेज से सीधे घर जाती थी उसके पिताजी उसे कॉलेज तक छोड़ने आया करते थे इस वजह से मेरी आकांक्षा से बात नहीं हो पा रही थी और ना ही आकांक्षा मुझसे बात कर पा रही थी। हम दोनों ही एक दूसरे से बात करना चाहते थे और मिलना चाहते थे लेकिन हम दोनों एक दूसरे को मिल ना सके और ना ही हम लोग बात कर पा रहे थे। एक दिन आकांक्षा मुझे कॉलेज में दिखाई दी उस दिन मैंने पूरी तरीके से सोच लिया था आज मै आंकाक्षा से मिलकर रहूंगा। मैंने उसकी दोस्त के हाथ एक छोटा सा कागज भिजवाया आकांक्षा को मैंने बाथरूम के पास मिलने के लिए बुलाया। जब वह वहां मिलने के लिए आई तो वह मुझे देखकर खुश हो गई मैंने उसे बाथरूम के अंदर बुला लिया। आकांक्षा बाथरूम के अंदर आ गई हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे लेकिन इतने दिनों की दूरी के बाद मैं कहां अपने आपको रोक पाया। मैं आकांक्षा को अपने गले लगा लिया आकांक्षा का कोमल बदन मेरी बाहों मे था आकांक्षा ने भी अपने हाथों से मेरी कमर को कसकर दबाया तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ चुकी थी। मैंने आकांक्षा के होठों को चूम लिया उसके होठों को जब मैंने चूमा तो उसके पतले गुलाब जैसे होठों को चूम कर मुझे अच्छा लगा बहुत देर तक मैं उसके होंठों का रसपान करता रहा आकांक्षा पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी। मुझे इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था मै आंकाक्षा की चूत मारूंगा मैंने जब उसके कपड़े उतारकर उसके स्तनों को दबाना शुरू किया तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैं उसके बूब्स को दबा रहा था और उसकी चूत को से मैंने सहलाना शुरू किया तो वह मचलने लगी उसकी चूत से निकलते हुए पानी को मैंने अपनी उंगलियों से साफ करने की कोशिश की लेकिन उसकी चूत से लगातार तेज गति से पानी बाहर निकल रहा था।

मैंने आकांक्षा को घोड़ी बनाया और उसकी कोमल चूत के अंदर अपने लंड को धीरे से सटाया तो वह मुझे कहने लगी अंदर की तरफ लंड डाल दो। जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना शुरू किया तो वह चिल्ला रही थी और मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक जा चुका था अब वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सकी वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा ही आनंद आ रहा है। मेरा लंड उसकी चूत में जाते ही उसकी सील टूट चुकी थी उसकी सील टूट जाने के बाद वह मेरा पूरा साथ दे रही थी उसकी चूतड़ों पर जब मैं प्रहार करता तो वह भी अपनी चूतडो को मुझसे मिलाती जिससे कि हम दोनों के अंदर की गर्मी बढ़ रही थी।

आकांक्षा की चूतड़ों से जो आवाज पैदा होती वह बडी मजेदार थी आकांक्षा अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी उसकी सिसकिया मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी। मैंने उसे बहुत देर तक चोदा आखिरकार मैं उसकी चूत की गर्मी को ना झेल सका और उसकी चूत में मेरा वीर्य गिर गया लेकिन आकांक्षा ने जब मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू किया तो मुझे बड़ा आनंद आ रहा था बहुत देर तक उसने मेरे लंड को सकिंग किया। वह मुझे कहने लगी मुझे तुम्हारे लंड को चूसने में आनंद आ रहा है काश पहले ही हम दोनों ने एक दूसरे के साथ ऐसे ही मजे किए होते। बाथरूम में हम दोनों थे थोड़ी देर बाद मैंने आकांक्षा को अपनी गोद में उठा लिया और उसकी चूत के अंदर मेरा लंड प्रवेश हो चुका था उसकी चूत के अंदर मेरा लंड जाते ही मुझे उसे धक्के मारने में बड़ा आनंद आया और वह मेरे होठों को चूम रही थी। मैंने आकांक्षा को अपनी गोद में उठाया और जिस प्रकार से उसकी चूत के अंदर मेरा लंड होता उससे मुझे एक अलग ही मजा आ रहा था यह मजा ज्यादा देर तक तो नहीं रहा क्योंकि मेरा वीर्य आकांक्षा की चूत में दोबारा से गिर चुका था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो आकांक्षा की चूत से वीर्य टपक रहा था हालांकि उसके बाद हम लोग कम ही मिल पाते लेकिन जब भी हम लोग मिलते तो एक दूसरे के साथ सेक्स संबध जरूर बनाया करते।