अपने पति के दोस्त से अपनी इच्छा पूरी करवाई

desi kahani, kamukta

मेरा नाम रीता है और मैं एक शादीशुदा महिला हूं। मेरी उम्र 35 वर्ष है। मेरी दो लड़कियां हैं। मेरे पति का नाम केशव है। उनका एक बहुत बड़ा बिजनेस था लेकिन अब वह बंद हो चुका है। क्योंकि उनके पार्टनर ने उन्हें बीच में ही धोखा दे दिया। जिसकी वजह से उन्हें बहुत ही घाटा हुआ और अब वह सिर्फ घर में ही रहते हैं और कुछ भी काम नहीं करते है। थोड़ी बहुत जो हमारी सेविंगस थी। वह भी अब खत्म होने लगी थी। मुझे तो बहुत ज्यादा टेंशन होती थी और मैं उन्हें भी कहती थी कि तुम भी कुछ काम कर लो लेकिन वह कुछ भी काम करना नहीं चाहते थे। उन्होंने अपने हाथ पैर खड़े कर दिए थे और सिर्फ पूरे दिन भर शराब ही पीते रहते थे। मुझे भी उनकी आदत बिल्कुल पसंद नहीं थी और वह किसी से भी बातें नहीं करते थे और ना ही किसी दोस्त से मिलना चाहते थे। इसीलिए अभी तक उनके बारे में किसी को भी पता नहीं चला की उनके पार्टनर ने उन्हें धोखा दे दिया है। और उन्हें बिजनेस में बहुत बड़ा घाटा हुआ है।

मैं छोटी मोटी नौकरी कर के गुजारा कर लेटी थी। जिससे कि हमारे घर का राशन का खर्चा निकल जाया करता था। पहले हम लोग एक बहुत ही अच्छी जिंदगी जी रहे थे। उसके बाद इस तरीके से काम करना मेरे लिए भी थोड़ा मुश्किल था और मैं ऐसे ही काम कर रही थी। क्योंकि यह मेरी मजबूरी भी और यह मेरे बच्चों की पढ़ाई का सवाल था। इसलिए मैंने यह सोच लिया था कि मुझे अब काम ही करना है। अब मैंने सोचा कि कहीं मुझे अच्छी जॉब मिल जाती तो मैं वहां पर जॉब कर लेती लेकिन मुझे कहीं अच्छी जॉब भी नहीं मिल रही थी। मैंने बहुत ट्राई किया लेकिन जॉब नहीं मिल पा रही थी और हमारे घर के खर्चे बहुत ज्यादा बढ़ने लगे थे। जो कि अब मुझसे भी नहीं संभल रहे थे। मैं यह सोचती रहती थी कि मेरी बच्चियों का आगे क्या होगा। मैं इसी टेंशन में अपनी जिंदगी काट रही थी और मुझे कभी कबार तो बहुत ज्यादा टेंशन हो जाती थी। मैंने कई बार इस बारे में अपने पति को भी समझाया लेकिन वह तो मुझसे बात ही नहीं करना चाहते थे। क्योंकि उन्हें बहुत बड़ा सदमा लगा था और वह सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। मैंने उन्हें कई बार समझाने की कोशिश की, कि चलो जो हो गया सो हो गया लेकिन तुम अच्छे से घर में बात तो कर सकते हो लेकिन वह फिर भी मानने को तैयार नहीं थे और अब मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी। मेरे ऊपर घर की सारी जिम्मेदारी आ गई थी। मैं इस बारे में अपने घरवालों को भी नहीं बताना चाहती थी। नहीं तो उन्हें भी बहुत टेंशन होती। इसलिए मैंने यह बात किसी को भी नहीं बताई थी और अपने दिल में ही यह बात दबा ली थी। ऐसे ही अपने काम में लगी रहती। सुबह अपने बच्चों को तैयार करके स्कूल भेज देती और खुद उसके बाद ऑफिस जाती और ऑफिस से आने के बाद घर का सारा काम करती लेकिन अब मेरी जॉब भी छूट गई थी। जिससे मुझे बहुत ज्यादा टेंशन होने लगी। मैं यह सोचने लगी कि अब हमारा आगे क्या होगा। मुझे बहुत चिंता होती।

एक दिन मेरे पति के दोस्त आ गए। उनके दोस्त का नाम सोहन था और वह मेरे पति के बारे में पूछने लगे। मैंने उन्हें कहा कि वह अंदर अपने कमरे में बैठे हुए हैं और जैसे ही वह कमरे में गए तो उन्होंने देखा कि वह शराब पी रहे हैं और उन्होंने केशव से भी ज्यादा बात नहीं की। वह मेरे पास आए और कहने लगे, भाभी केशव को क्या हो गया है। वह तो बिल्कुल भी बात नहीं कर रहा है। पहले मैं उन्हें कुछ भी बात नहीं बताना चाहती थी लेकिन मजबूरी में मैंने उन्हें सारी बात बता दी। मैंने उन्हें कहा कि उनके बिजनेस पार्टनर ने उन्हें धोखा दे दिया था और उन्हें इस बात का बहुत गहरा सदमा लगा है। हम लोगों का घर का खर्चा चलाना भी बहुत मुश्किल हो गया है। कुछ दिनों तक तो मैंने जॉब कर के घर का खर्चा चला लिया लेकिन अब मेरी जॉब भी छूट गई है। तो मुझे बहुत ज्यादा टेंशन होने लगी है। वह यह बात सुनकर बहुत ज्यादा दुखी हो गया और कहने लगा आपने मुझे यह बात पहले क्यों नहीं बताई। केशव मेरे बचपन का दोस्त है। क्या मेरा इतना भी फर्ज नहीं बनता कि मैं उसकी मदद करूं। यह कहते हुए उन्होंने मुझे कुछ पैसे दे दिए। मुझे उनसे वह पैसे लेंने में बहुत ही बुरा सा लग रहा था लेकिन मेरी मजबूरी थी इसलिए मैंने उनसे वह पैसे भी ले लिये। सोहन का भी अपना बहुत बड़ा बिजनेस है। यह कहते हुए वह हमारे घर से चले गए और कहने लगे कि जब भी आपको कुछ भी जरूरत हो तो आप तुरंत मुझे फोन कर दीजिए। ऐसा कहते हुए वह हमारे घर से चले गए।

कुछ दिनों बाद सोहन दोबारा से हमारे घर आया और कहने लगे भाभी आपको कोई परेशानी तो नहीं है। मैंने उन्हें कहा परेशानी तो मुझे कुछ भी नहीं है लेकिन अब सोहन ज्यादा ही डिप्रेशन में चले गए हैं। जिससे कि मुझे बहुत बुरा लगने लगा है। मैंने उन्हें कहा कि मेरे पास अब कुछ भी नहीं बचा है जिससे कि मैं अपना खर्चा चला पाऊ। उन्होंने कहा आप चिंता मत कीजिए मैं आपकी मदद करने के लिए हूं। मैंने उन्हें कहा कि आप मेरी मदद क्यों करेंगे आपको मैं आपके पैसे कैसे लौटाऊंगी। वह कहने लगे जब आपके पास होंगे तो दे देना और अगर नहीं भी देंगे तो कोई बात नहीं है। मैंने उन्हें कहा कि मेरी भरी जवानी में मेरे पति का यह हाल हो चुका है मैं बहुत परेशान हूं। सोहन ने मुझसे पूछा कि वह आपको चोदता नहीं है मैंने उन्हें कहा नही वह तो मुझे नहीं चोदते है। उन्होंने जैसे ही मेरे स्तनों को हाथ लगाया तो मेरे अंदर से चिंगारी निकल पड़ी और मैं सोचने लगी कि आज मैं सोहन का ही लंड अपनी चूत मे ले लेती हूं। मैंने उसके लंड को उसकी पैंट से बाहर निकालते हुए अपने मुंह में ले लिया। मैं बहुत ही अच्छे से चूसती जाती और वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो जाते। उनका थोड़ा माल मेरे गले के अंदर भी जा चुका था लेकिन मैं अभी उसे चूसने पे लगी हुई थी। वह मुझे कहने लगे भाभी आप तो बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही है। उन्होंने मुझे हमारे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे सारे कपड़ों को खोलते हुए बहुत ही अच्छे से मेरे पूरे शरीर का चाटना शुरू किया। उन्होंने मेरे स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और ऐसे ही चाटने लगे। वह बहुत देर तक तो मेरे स्तनों का रसपान करते रहे जिससे कि मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब वह इस तरीके से मेरे स्तनों का रसपान करते। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कितने समय बाद मेरी शरीर पर किसी ने अपनी जीभ लगाई है।

उन्होंने मेरे दोनों पैरों को खोलते हुए मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया और बड़ी तेजी से वह झटके मारने लगे और ऐसे ही काफी देर तक चोदते रहे। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब वह मुझे ऐसे धक्के मार रहे थे। मैंने कह रही थी आप बहुत ही अच्छे से मुझे चोद रहे हैं। वह कहने लगे भाभी आप चिंता मत करो मैं आपका पूरा साथ दूंगा। अब मुझे भी बहुत संतुष्टि हो चुकी थी और वह मुझे बहुत अच्छे से चोदने लगे। मेरा शरीर भी बहुत गर्म हो चुका था और वह भी बहुत ज्यादा गर्म हो रहे थे। मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मेरे चूत मैं से आग निकल रही हो। वह मेरे स्तनों को जब अपने मुंह के अंदर लेते तो मेरी और उत्तेजना बढ़ जाती। मुझे बड़ी तीव्र गति उन्होंने उठाकर अपने लंड के ऊपर रख दिया और अब मैं उनके लंड पर बहुत तेजी से ऊपर नीचे करने लगी। मुझे बहुत अच्छा लगता जब मैं उनके लंड के ऊपर नीचे होने लगी वह भी बड़ी तेजी से मुझे झटके मार रहे थे। उनके झटके मेरी चूतडो पर लगते वह मुझे बहुत ही अच्छा लगता। मैं भी अपनी गांड को ऊपर नीचे करती जाती जिससे कि गर्मी बहुत बढ़ रही थी और वह भी मेरा साथ दे रहे थे। ऐसे ही हम दोनों ने बहुत देर तक एक दूसरे के साथ संभोग किया। मेरा तो झड चुका था मैं वैसे ही बैठ गई लेकिन सोहन ने मेरे चूतड़ों को कसकर पकड़ लिया और अपने लंड से धक्के मारने लगे। मुझे सोहन ने इतना तेज झटका मारा कि उनके लंड से एक पिचकारी निकली और वह सीधा मेरे अंदर ही चली गई। मुझे बहुत अच्छा लगा मुझे ऐसा लगा पता नहीं कितने दिनो बाद मेरी इच्छा को पूरी हुई हैं।