ऐसे ही खुश करती हूं

Kamukta, antarvasna मैं बचपन से ही एक मॉडल बनना चाहती थी मैं छोटे से शहर की रहने वाली लड़की हूं लेकिन मेरे सपने बहुत बड़े हैं मैं जयपुर की रहने वाली हूं, मेरे सपने इतने बड़े थे कि मुझे मुंबई में जाकर एक मॉडल बनना था और मुझे एक्टिंग करने का भी बहुत शौक है जिसका मैंने हमेशा से ही सपना देखा था। मैं जब भी टीवी देखती तो मुझे ऐसा लगता मुझे भी कोई भूमिका कभी मिल जाए तो कितना अच्छा होगा लेकिन यह सिर्फ मात्र एक सपना ही था मैं जयपुर से बाहर ही नहीं जा पाई इस वजह से शायद मेरा सपना सपना ही रहने वाला था लेकिन उस दौरान हमारे पड़ोस में एक लड़का आया उसका नाम अमन है। अमन ने मुझसे नज़दीकियां बना ली और हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए मुझे भी अमन पर पूरा भरोसा हो गया और जब मुझे अमन पर भरोसा हो गया तो मैंने भी अमन से अपने सपने के बारे में कहा अमन मुझे कहने लगा तुम चिंता मत करो तुम्हारा सपना जरूर पूरा होगा उसमें मैं तुम्हारा पूरा साथ दूंगा जब अमन ने मुझे यह कहा तो मुझे लगा कि अब मेरा सपना जरूर पूरा हो जाएगा।

मेरे परिवार वाले हमेशा ही इसके खिलाफ थे और मैं कभी भी जयपुर से बाहर नहीं गई थी मुझे अमन के रूप में एक दोस्त भी मिल चुका था और शायद हम दोनों के बीच में प्यार भी हो चुका था। एक दिन अमन ने मुझे कहा यदि तुम्हें मेरे साथ मुंबई चलना है तो तुम चल सकती हो लेकिन उसके लिए पैसे लगेंगे मैंने अमन से कहा ठीक है मैं पैसों का बंदोबस्त करती हूं, मेरे समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए मेरे पास पैसे तो नहीं थे क्योंकि मैं घर पर ही रहती थी लेकिन मुझे किसी भी हालत में मुंबई जाना ही था परन्तु पैसों का बंदोबस्त कहीं से भी नहीं हो पा रहा था फिर मैने अमन से मिलने की सोची मैंने अमन को फोन किया और उसे कहा क्या शाम को तुम मुझे मिल सकते हो तो अमन कहने लगा ठीक है मैं तुम्हें मिलता हूं। अमन को मैंने मिलने के लिए बुला लिया जब हम दोनों मिले तो मैंने अमन को सारी बात बताई और कहा मुझे मुंबई तो जाना है लेकिन पैसो का बंदोबस्त नहीं हो पा रहा है और बिना पैसों के मुंबई जाना संभव नहीं है।

अमन ने मुझे कहा पैसे तो चाहिए ही थोड़े बहुत पैसे तो मैं कर लूंगा लेकिन वहां रहने और आने जाने का खर्चा बहुत ज्यादा हो जाएगा इसलिए तुम्हें भी थोड़े बहुत पैसे करने पड़ेंगे जिससे कि कुछ समय तक हम लोग अपना गुजारा चला पाए। अमन ने पूरी तरीके से मुझे अपनी बातों में फसा लिया था मुझे नहीं पता था कि अमन के दिल में क्या चल रहा है मैं तो अपने सपने के पीछे पागल थी और किसी भी सूरत में अपने सपने को मैं पूरा करना चाहती थी लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि मेरे साथ गलत होने वाला है। मैंने अमन से कहा अब शायद मुंबई जाना संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि पैसों का बंदोबस्त नहीं हो पा रहा है लेकिन अमन ने तो जैसे मुझ पर पूरी तरीके से जादू कर दिया था और उसने मुझे कहा कि तुम्हें पैसों का बंदोबस्त तो करना ही पड़ेगा। मेरे पास कोई भी रास्ता नहीं था मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे सपने टूटने वाले हैं और पैसों का बंदोबस्त भी शायद कहीं से नहीं हो पाएगा परंतु उसी दौरान मेरे मामा ने मेरे पिताजी को कुछ पैसे दिए क्योंकि उन्हें शायद कुछ पैसों की जरूरत थी पापा ने मुझे कहा बेटा तुम यह पैसे संभाल कर अलमारी में रख देना मैंने उन्हें कहा ठीक है पापा मैं यह पैसे संभाल कर रख दूंगी। उन पैसों के आगे मेरी नियत शायद खराब हो गई मुझे अपने सपने सच होते नजर आने लगे और मुझे लगा कि मुझे इन पैसो से अब मुंबई चले जाना चाहिए। मैंने तुरंत ही अमन को फोन किया और अमन को सारी बात बताई अमन ने मुझे कहा तुम वह पैसे ले लो और हम दोनों मुंबई चले जाते हैं उसके बाद वह पैसे तुम लौटा देना वैसे भी तुम्हारे अंदर बहुत काबिलियत है और तुम जरूर सफल हो जाओगी। मैं बहुत ज्यादा खुश थी क्योंकि मेरे सपने पूरे होने वाले थे मैंने और अमन ने उसी रात घर से निकलने की सोची और हम दोनों घर से चले गए मैं वह पैसे लेकर मुंबई चली गई जब हम लोग मुंबई पहुंचे तो मैंने अमन से कहा यहां पर तो बहुत ऊंची ऊंची बिल्डिंग है अमन कहने लगा हां यहां पर तो बहुत ज्यादा ऊंची बिल्डिंग हैं और अब कुछ समय बाद तुम्हारा भी यहां पर खुद का एक फ्लैट होगा।

अमन मुझे सपने दिखाने लगा और कुछ दिनों तक तो वह मुझे कुछ लोगों से मिलाता रहा मुझे भी लगा कि सब कुछ ठीक चल रहा है मेरे पास पैसे भी थे और हम लोग एक छोटे से घर में रह रहे थे अमन और मैं एक दूसरे के साथ खुश थे उसी दौरान हम दोनों के बीच प्यार भी हो गया मुझे अमन पर पूरा भरोसा हो चुका था हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताते। मैं सुबह काम की तलाश में चली जाती और शाम को घर लौट आती लेकिन मुझे कोई भी ऐसा काम नहीं मिला था जिससे कि मैं कोई कामयाबी हासिल कर पाती छोटे-मोटे काम मुझे मिलने लगे थे मेरे पास अभी वह पैसे बचे थे। एक दिन जब अमन वह पैसे लेकर घर से चला गया तो मैंने अमन को फोन किया लेकिन उसका फोन लग ही नहीं रहा था मैं बहुत ज्यादा टेंशन में आ गई मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए मैं घर वापस नहीं लौट सकती थी और ना ही मेरे पास अब कोई दूसरा रास्ता था मैं पूरी तरीके से फंस चुकी थी मेरे पास थोड़े बहुत पैसे बचे थे उनसे ही कुछ दिनों तक मेरा खर्चा चलता रहा लेकिन जब घर का किराया देने की बात आई तो मैंने अपने मकान मालिक से कहा मुझे कुछ दिनों के लिए आप समय दे दीजिए मैं आपको किराया दे दूंगी।

मैं अमन को हर रोज फोन किया करती लेकिन उसका फोन लगता ही नहीं था मैं बहुत ज्यादा दुखी हो चुकी थी अमन मुझे धोखा देकर पता नहीं कहां चला गया था। मैं सुबह काम की तलाश में जाती तो मुझे छोटे-मोटे काम मिल जाती लेकिन उनसे मेरा खर्चा चला पाना मुश्किल था एक दिन मुझे एक छोटा सा मॉडलिंग का असाइनमेंट मिल गया जिससे कि मुझे कुछ पैसे मिल गए अब मैंने घर का किराया तो दे दिया था और थोडे बहुत पैसे मेरे पास थे। मैं अपने काम को पूरी मेहनत से करने लगी मुझे जब अपने घर की याद आती तो मुझे बहुत दुख होता उस वक्त मुझे लगता कि मैंने अपने पापा मम्मी के साथ बहुत गलत किया मैं जब भी सोचती कि क्या पापा ने वह पैसे मामा जी को लौटा दिये होंगे तो मुझे बहुत बुरा लगता क्योंकि अमन ने मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा किया था मैं अमन को कभी भी माफ नहीं कर सकती थी उसने मुझसे मेरी खुशियां छीन ली थी और मैं अपने घर से भी दूर चली गयी थी। मैं इतना तो समझ चुकी थी कि अब मुझे किसी पर भरोसा नहीं करना है और मुझे अपने जीवन को अपने तरीके से ही जीना है इसलिए मैं अपने जीवन को अपने तरीके से जीने लगी और मुझे अब थोड़े बहुत काम भी मिलने लगे जिनसे की मेरा खर्चा चलने लगा था परंतु मुझे अब कामयाबी चाहिए थी। मुझे मुंबई में एक साल हो चुका था मैं अब सब कुछ भूल कर आगे बढ़ चुकी थी मेरे थोड़ी बहुत जान पहचान होने लगी थी जिससे कि मुझे काम मिलने लगे थे और मैं अपने सपने पूरे करने के लिए हर रोज मेहनत किया करती, धीरे-धीरे मुझे अब काम मिलने लगा था। एक दिन मुझे एक व्यक्ति मिले और वह कहने लगे यदि तुम मेरा ध्यान रखोगी तो मैं भी तुम्हारा ध्यान रखूंगा।

मैं उनकी बातों को समझ गई पहले तो मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा लेकिन जब मैंने इस बारे में अपने घर जाकर सोचा तो मुझे लगा कि वैसे भी अमन ने मेरे साथ तो इतना कुछ गलत किया था उसने मेरे साथ सेक्स भी किया था और मेरे पैसे भी लेकर वह भाग गया तो क्यों ना मैं अब उनके साथ अपनी खुशियां बिताऊ। वह मुझे पैसे भी तो देने वाले थे, मैं राजी हो गई मैंने उनको फोन किया उनका नाम संजय है। मैंने संजय को फोन किया तो वह कहने लगे तुम घर पर आ जाओ, मै उनके घर पर चली गई। जब हम दोनों साथ में रूम में बैठे हुए थे तो हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे उन्होंने मेरे होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया। उन्होने मुझे कहा तुम्हे मुझे खुश करना होगा मैंने भी उन्हें खुश करने में कोई कमी नहीं रखी। मैंने उनके लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी उनके 9 इंच मोटा लंड को अपने मुंह में लेने में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने काफी देर तक उनके लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर किया ऐसा काफी देर तक चलता रहा जब उनका पानी गिर गया तो वह मुझे कहने लगे तुम अपने कपड़े खोल दो। मैंने अपने कपड़े उतार दिए मैं उनके सामने लेट गई उन्होंने मुझे कहा तुम्हारा फिगर बड़ा अच्छा है।

उन्होंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ा दिया और मेरी योनि पर सटा दिया, उन्होंने मेरी योनि के अंदर लंड को प्रवेश करवाते हुए कहा तुम्हारी चूत बहुत टाइट है। मैंने उन्हें कहा मैंने आज तक कभी किसी को अपनी चूत मारने नहीं दी। वह इस बात से खुश हो गए, उन्होंने मेरे दोनों पैरों को खोलते हुए बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू किए उनके धक्को से मुझे खुशी हो रही थी और वह बड़ी तेजी से मुझे धक्के दिए जा रहे थे। जिससे कि मेरी चूत का उन्होने बुरा हाल बना दिया था लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगता, करीब 5 मिनट तक उन्होंने मेरे साथ संभोग किया और मैंने उन्हें पूरे मजे दिए जिससे कि वह खुश थे और उन्होंने मुझे उसके बदले में कुछ पैसे दिए और कहा तुम्हें यह पैसे अपने पास रख लो। मुझे भी लगा कि मेरी इच्छा वैसे भी पूरी हो रही है और उसके बाद मैं कुछ पैसे भी काम लिया करुंगी। मैं अब लोगों की खुशियों का ध्यान रखती हूं और वह मेरा ध्यान रखते है, मेरे पास अब पैसे भी आने लगे थे और मेरा जीवन भी बड़े अच्छे से चलने लगा था। मैंने अपने पापा मम्मी को पैसे लौटा दिए लेकिन मैं घर नहीं गई और मैं अब भी मुंबई में ही रहकर काम कर रही हूं।