आओ मेरी चूत से पानी निकालो

मेरा कपड़ो का बिजनेस है मैं काफी वर्षों से यही काम करता आ रहा हूं मेरा काम काफी अच्छा चलता है और मेरे पास मेरे कई पुराने कस्टमर हैं जो कि आते रहते हैं। मैं जिस कॉलोनी में रहता हूं वहां पर भी मेरे काफी कस्टमर है जो कि मेरे पास कपड़े लेने के लिए आते हैं और इसी सिलसिले में मुझे एक दिन अहमदाबाद जाना था क्योंकि जिससे मैं सामान लेता हूं उनसे मिलने के लिए मुझे अहमदाबाद जाना पड़ा। मैं मुंबई से ट्रेन में निकला था मेरे सामने वाली सीट में फैमिली बैठी हुई थी वह लोग आपस में बातें कर रहे थे। तभी मुझे जिनके पास जाना था उनका मुझे फोन आया और वह मुझे कहने लगे आप कब तक आ जाएंगे मैंने उन्हें कहा बस मैं ट्रेन में ही हूं और आपसे मिलने के लिए ही निकला हूं।

 मैं उनसे काफी समय से अपने दुकान के लिए सामान ले रहा था मैं जब उनसे बात कर रहा था तो उसी वक्त मेरे सामने वाली सीट में एक व्यक्ति मुझे बड़े ध्यान से देख रहे थे। जैसे ही मैंने फोन रखा तो उन्होंने मुझे कहा क्या आपका कपड़ो का बिजनेस है मैंने उन्हें कहा हां जी मेरा कपड़ो का बिजनेस है मैं मुंबई में काम करता हूं। वह मुझे कहने लगे कि मेरा भी कपड़ों का ही बिजनेस है मैंने उनसे कहा चलिए बहुत अच्छा लगा कि आप से मुलाकात हो गई। हम दोनों आपस में एक दूसरे से बात करने लगे तभी व्यापार की बातें आने लगी और का नाम संजय पटेल है। वह मुझे कहने लगे आप कभी मेरी फैक्ट्री में आइएगा मैंने उनसे कुछ सामानों की रेट ले लिए। मुझे लगा कि एक बार मुझे संजय भाई के पास जाना ही पड़ेगा क्योंकि मैं उनके सामान की क्वालिटी देखना चाहता था लेकिन मुझे अमदाबाद जाना था तो मैंने इस बार अहमदाबाद से ही सामान ले लिया था। संजय भाई अहमदाबाद के रहने वाले हैं लेकिन वह मुंबई किसी काम से आए हुए थे। अगली बार जब मैं दोबारा मुंबई से अहमदाबाद जा रहा था तो मैंने संजय भाई को फोन किया और उन्हें कहा कि मुझे आपसे मिलना था वह कहने लगे कि आप फैक्ट्री में ही आ जाइए। मैं उनसे मिलने के लिए उनकी फैक्ट्री में ही चला गया मैं जब उनसे मिलने उनकी फैक्ट्री में गया तो उनकी फैक्ट्री में काफी लोग काम कर रहे थे उनका काम भी काफी ज्यादा है। उन्होंने मुझे कहा अमित जी आपने बहुत अच्छा किया जो आप अहमदाबाद आ गये आपको मैं अपनी फैक्ट्री में बनने वाले सामान का सैंपल दिखा देता हूं।

उन्होंने मुझे कुछ सैंपल दिखाएं मुझे उनके सिंपल काफी पसंद आये मैंने उन्हें कहा कि अभी तो मेरे पास सामान बचा हुआ है लेकिन थोड़ा बहुत सामान मैं आपसे ले सकता हूं। मैंने उनसे कुछ सामान ले लिया और उसके बाद मैं मुंबई लौट आया जो सामान वह मुझे दे रहे थे उनकी क्वालिटी काफी अच्छी थी और उनके दाम भी कम थे मैंने उनसे अब आगे का व्यापार करने की सोची। मैं उन्हें फोन कर के सामान का आर्डर लिखवा दिया करता तो वह मुझे सामान भिजवा दिया करते थे हम दोनों के बीच में व्यापार करते हुए करीब एक साल होने आया था। मुझे एक दिन संजय भाई का फोन आया और वह मुझे कहने लगे आप कैसे हैं तो मैंने उन्हें कहा मैं तो ठीक हूं। वह मुझे कहने लगे कि मैंने मुंबई में ही अब एक फैक्ट्री डालने की सोची है यदि आपकी नजर में कहीं कोई जगह हो तो आप मुझे बता दीजिए। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं आपको इस बारे में पूछ कर बताता हूं मेरे लिए तो यह अच्छा ही था कि उनकी फैक्ट्री मुंबई में शुरू होने वाली हैं क्योंकि मुझे उससे माल के भाड़े में कुछ बचत हो जाती। मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया वह प्रॉपर्टी का ही काम करता है वह मुझे कहने लगा तुम्हें मैं गोडाउन दिलवा दूंगा तुम बिल्कुल भी चिंता ना करो। उसने मुझे गोदाम दिखा दिया मैंने उसकी फोटो संजय भाई को भेजी तो वह कहने लगे ठीक है मैं आपसे मिलने के लिए आता हूं। वह दो दिनों बाद मेरे पास मुंबई आ गए वह किसी होटल में रुके हुए थे मैंने उन्हें कहा आपके तो काफी जानकार यहां रहते हैं। वह मुझे कहने लगे कि नहीं मैं इस बार होटल में ही रुकना चाहता हूं। वह किसी होटल में रुके हुए थे और जब हम मुझसे मिलने के लिए आए तो मैं उन्हें अपने दोस्त के पास ले गया।

 मैं जब उन्हें अपने दोस्त के पास ले गया तो उसके बाद उन्होंने वह गोडाउन देखा और कहने लगे कि गोडाउन तो ठीक है हमारा काम यहां चल जाएगा। उसके बाद उन्होंने वहां पर काम शुरू करवा दिया सब कुछ काफी जल्दी हो गया और उन्होंने अपना काम मुंबई में भी खोल लिया। अब मुझे सामान की कोई भी दिक्कत नहीं थी क्योंकि जब भी मुझे अपने दुकान के लिए कुछ चाहिए होता तो मैं उसी वक्त ऑर्डर कर देता और शाम तक मेरे पास सामान आ जाया करता था। हम दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी और इसी वजह से संजय भाई और मेरे परिवार में जब भी कोई फंक्शन होता तो हम लोग एक दूसरे को इनवाइट जरूर किया करते थे। कुछ समय बाद संजय भाई की बड़ी लड़की की शादी तय हो गई उन्होंने मुझे कहा आपको शादी के लिए अहमदाबाद आना पड़ेगा और आपको अपने पूरे परिवार को भी साथ में लेकर आना होगा। मैंने संजय भाई से कहा क्यों नहीं मैं जरूर अपनी पूरी फैमिली को लेकर अहमदाबाद आऊंगा और उसके बाद हम लोग अहमदाबाद चले गए मेरे साथ मेरा पूरा परिवार था। जब हम लोग अहमदाबाद पहुंचे तो मुझे संजय भाई ने कहा मैंने आपके रहने के लिए होटल में व्यवस्था की है उन्होंने एक लड़के को हमारे साथ भेजा और उसने हमारा सामान होटल में रखवा दिया। जब शाम के वक्त हम लोग संजय भाई से मिले तो वह मुझे कहने लगे मेरी बेटी ने अपने पसंद का लड़का खुद चुना है और हमें भी कोई दिक्कत नहीं है।

 लड़का भी बहुत अच्छा है उसका परिवार भी बहुत ही सिंपल और साधारण है इसीलिए मैंने अपनी बेटी के रिश्ते के लिए हां कह दी। जिस दिन शादी का रिसेप्शन था उसी दिन मेरी मुलाकात मेरे पुराने दोस्त से हुई मैंने उससे पूछा क्या तुम संजय भाई को जानते हो। वह कहने लगा हां मैं संजय भाई को जानता हूं वह तो हमारे बहुत करीब हैं उसने मुझसे पूछा कि तुम उन्हें कहां से जानते हो। मैंने उसे बताया कि हम लोग साथ में ही काम करते हैं और संजय भाई से ही मैं सारा सामान खरीदता हूं मेरे दोस्त का नाम दिनेश है। मैंने दिनेश से कहा क्या तुम अकेले ही आये हो वह कहने लगा नहीं मेरे साथ मेरा परिवार भी है। मैंने उसे कहा अच्छा तो तुम्हारे साथ तुम्हारी फैमिली भी आई हुई है, तभी मेरी पत्नी भी आ गई मैंने दिनेश से अपनी पत्नी का परिचय करवाया। मैंने जब अपनी पत्नी को बताया कि दिनेश और मैं एक दूसरे को काफी समय से जानते हैं दिनेश पहले हमारे पड़ोस में ही रहा करते थे लेकिन अब वह अहमदाबाद में ही सेटल हो चुके हैं। मेरी पत्नी कहने लगी चलिए यहां आने से कम से कम आपको अपने दोस्त से मिलने का मौका तो मिला। हम लोग आपस में बात कर ही रहे थे कि तभी दिनेश की पत्नी भी पीछे से आ गई जब दिनेश की पत्नी आई तो दिनेश ने अपनी पत्नी से मेरा परिचय करवाया और कहा यह मेरी पत्नी है। दिनेश की पत्नी का नाम जानवी है मैंने दिनेश से कहा तुम्हारी शादी कब हुई तो दिनेश मुझे कहने लगा मेरी शादी को तो 5 वर्ष हो चुके हैं लेकिन जानवी की नीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी वह अपनी साड़ी के पल्लू को बार-बार गिरा रही थी और मुझे वह अपनी नशीली आंखों से देख रही थी।

मैं भी समझ चुका था कि उसके इरादे कुछ ठीक नहीं है मैंने भी उसे चोदने का मन बना लिया मैने चुपके से अपना नंबर जानवी को दे दिया और उसे कहा तुम मेरे नंबर पर फोन करना मैं कुछ दिनों तक अहमदाबाद में ही रुकने वाला हूं। हम लोग जब रिसेप्शन खत्म होने के बाद होटल में गए तो मुझे जानवी ने अपने नंबर से मैसेज कर दिया था। उसके बाद तो जानवी मुझसे अपनी चूत की खुजली मिटाना चाहती थी उसने मुझे कहा आप घर पर आ जाइए ना। दो दिन बाद में जानवी से मिलने के लिए चला गया उस दिन दिनेश घर पर नहीं था दिनेश किसी काम के सिलसिले में कहीं बाहर गया हुआ था मैंने जानवी से कहा दिनेश कहां है तो वह कहने लगी वह अपने किसी काम के सिलसिले में बाहर गए हुए हैं आप आ जाइए। उसके अंदर इतनी गर्मी थी कि उसने मुझे देखते ही अपने बदन से सारे कपड़े उतार दिए और मेरी गोद में आकर बैठ गई। मैंने भी उसके स्तनों को बहुत देर तक दबाया और उसके स्तनों को मैंने अपने मुंह में काफी देर तक लिया मुझे उसके स्तनों को अपने मुंह में लेने में बहुत मजा आ रहा था। जैसे ही मैंने उसकी योनि को चाटने शुरू किया तो वह पूरे जोश में आ गई और कहने लगी दिनेश तो मेरी तरफ देखते ही नहीं है उनके अंदर तो वहां बात नहीं है।

 मैंने उसकी योनि से पानी बाहर निकाल कर रख दिया वह कहने लगी मुझे भी आपके लंड को मुंह में लेने दो मैने उसके मुंह में लंड को डाल दिया और करीब 2 मिनट तक वह मेरे लंड का रसपान करती रही। जैसे ही मैंने उसे घोड़ी बनाकर उसकी योनि में अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाने लगी। जैसे ही मेरा लंड उसकी चूतडो से टकराता तो हम दोनो के अंदर से गर्मी बाहर निकल आती उसकी योनि से गरम पानी बहुत तेजी से बाहर आ रहा था। मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देता जाता जिससे कि उसकी चूत की खुजली मिट जाती, मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था वह मुझे कहती मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करने में बड़ा मजा आ रहा है। वह मुझसे अपनी गोरी चूतड़ों को मिलाती तो मेरे अंदर का जोश और भी ज्यादा बढ़ जाता मै उसकी चूतडो पर प्रहार करता तो वह खुश हो जाती लेकिन उसकी योनि से गर्मी बाहर निकलने लगी और मैंने अपने वीर्य को उसके मुंह के अंदर डाल दिया। उसने वह सब अपने अंदर ले लिया मैं मुंबई वापस आ चुका हूं लेकिन जानवी अब भी मुझे बुलाती रहती है।