23 साल की सीधी साधी हाऊस वाइफ-4

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रूम का बेड हमारे बेड से बहुत बड़ा था. तो मैंने एक तरफ मेरी बेटी को सुला दिया और जैसे ही मैं चाचाजी की तरफ मुड़ी तो वो नजारा देखकर मेरे होश उड़ गए.
चचाजान अपने सारे कपड़े उतारे बिल्कुल नंगे अपना तना हुआ मूसल लंड लिए हुए खड़े थे. मेरी नजरें लगातार उनके लंड को घूरे जा रही थीं.. मेरी हालत खराब थी और मेरा हलक सूख रहा था.
फिर उनके एक इशारे पर मैं दौड़ती हुई जाकर उनकी बांहों में समा गई. हम दोनों एक दूसरे में सिमट रहे थे.
करीब 2 मिनट के बाद चाचाजी ने मेरे होंठों से होंठ मिलाए और हमने अपनी जीभें लड़ा का लम्बा किस किया. इसके बाद आज तो चाचाजी मेरी गरदन को जैसे खाए जा रहे थे. चाचाजी ने किस करते हुए ही मेरी नाइटी को निकाल दिया, जो मेरे बदन पर एकमात्र कपड़ा था.
अब मैं अपने चाचा ससुर के सामने पूरी नंगी खड़ी थी. चाचा जी मेरे पूरे बदन को चूम रहे थे. फिर चाचा जी ने मुझे अपनी गोद में उठाया और बेड पर डाल कर मेरे ऊपर आ गए. मैं उनकी प्यार और हवस भरी आंखों में देखकर शर्म से मरी जा रही थी क्योंकि मैं बिस्तर पर अपने चाचा ससुर के साथ नंगी पड़ी थी.

चाचाजी मेरे होंठ गाल गरदन कान हर जगह चुम्बनों की बौछार कर रहे थे- शाहीन मेरी जान.. आज तो मैं तुम्हें खा जाऊंगा, जब से तुम्हें देखा है, मैं तुम्हारे नाम की मुठ मार रहा हूँ..
मैं उनसे लिपटती हुई बोली- ओह्हह मेरी जान.. खा जाओ मुझे आह्ह्ह्हह.. मैं भी बस अब तुम्हारी हूँ. जैसे चाहो, जो चाहो.. वो करो, मैं भी आपको याद करके कई बार अपना पानी निकाल चुकी हूँ.. मेरी जान आज मेरे सपनों को हकीकत में बदल दो.. आह्ह्ह्हह!
चाचाजी मुझे पागलों की तरह चूमे जा रहे थे. मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी. चाचाजी ने मेरे मम्मों के निप्पलों को मुँह में लेकर चूसना काटना शुरू कर दिया.
“आह्ह्ह्हह हह आह्ह्ह्हेहेह इह्ह्ह्इइ..” की मादक आवाजों से पूरा कमरा गूँज रहा था. मैं दिल खोल कर पूरी आवाज़ के साथ चूचे चुसाई का मजा ले रही थी.
चाचाजी अपनी उंगलियां मेरी चुत पर सहला रहे थे. मैं अपने हाथ को उनके सर में डालकर चुत की तरफ प्रेशर कर रही थी.
चाचाजी ने मेरी इच्छा को फ़ौरन समझ लिया और नीचे चुत की तरफ चले गए और एक हल्की किस के साथ मेरी चुत को फुल लेन्थ में चाटना शुरू कर दिया.

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“ओह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह मम्म्म्म्म्म..”
चाचाजी मेरी चुत चाटते हुए कह रहे थे- ओह जान.. क्या चिकनी और मखमली चुत है तुम्हारी.. म्म्म्मं..
मैं- चाटो जान आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह और चाटो.. खा जाओ इसे आह्ह्ह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह्ह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह..
चाचाजी- इरफान नहीं चाटता??
मैं- नहीं.. उसे ये सब अच्छा नहीं लगता.. मेरी ये एकलौती चीज है जिस पर सिर्फ आपका ही हक है.
फिर चाचाजी घूमकर मेरे ऊपर आ गए. अब हम 69 पोजीशन में थे. चाचाजी का मोटा लंड मेरे होंठों को टच हो रहा था. मैंने उसे अपनी हथेली में लेकर सहलाते हुए मुँह में ले लिया, जिसकी एक्साइटमेन्ट से चाचाजी ने अपनी जीभ मेरी चुत में डाल दी.
“उम्म्म्म्म..” मेरी आंखें बड़ी हो गईं… मैं चाचाजी का पूरा लंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी. चाचाजी भी अपनी जीभ को मेरी चुत में अन्दर तक डाल रहे थे.

करीब पन्द्रह मिनट तक हम एक दूसरे को ऐसे ही मजा देते रहे. फिर चाचाजी उठे और मेरे ऊपर आ गए और मेरे होंठों को कसके मुँह में लेके चूसने लगे. उनका तना हुआ लंड मेरी जाँघों पे टहल रहा था. मैं उसे अपनी चुत में लेने के लिए तड़प रही थी. आज पहली बार इरफान के अलावा किसी और का लंड मेरी चुत की सैर करने जा रहा था, वो भी मेरे चाचा ससुर का.
मैंने दोनों पैर फैला कर चाचाजी का स्वागत किया. चाचाजी ने अपने मूसल लंड को मेरी चुत पर रख कर रगड़ा.
मैं- ओह जान अब मत तड़पाओ.. प्लीज़.
वैसे भी मेरी चुत काफी गीली हो चुकी थी तो चाचाजी के लिए रास्ता काफी आसान था. चाचाजी ने एक ही झटके में अपना 7 इंच लंबा लंड मेरी चुत में डाल दिया.
“ओह्ह्ह्ह ह्ह आह्ह्ह्ह ह्ह्ह..”
मेरे मुँह से जोर से चीख निकल पड़ी. मुझे बहुत दर्द हुआ, इरफान से 3 साल से सेक्स करने के बावजूद मेरी सील आज ही टूटी हो, ऐसा महसूस हो रहा था. सच में आज मेरी सुहागरात थी.

मेरी हालत देख कर चाचाजी कुछ पल के लिए रुक गए और मुझे लिप किस करने लगे. कुछ देर बाद मेरे ठीक होने पर चाचाजी ने अपना लंड धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया. कुछ ही देर में मेरा दर्द मजा में बदल गया और मैं फुल मस्ती में आ गई.. और कमर उठा उठा कर चाचाजी के हर धक्के को अपने अन्दर तक ले रही थी, जिससे चाचाजी का मजा दुगना हो रहा था.
चाचाजी का लंड मेरी बच्चादानी तक महसूस हो रहा था. मेरी ऐसी चुदाई पहले कभी नहीं हुई. इरफान कभी भी 10 मिनट से ज्यादा टिक नहीं पाते थे, पर चाचाजी आधे घंटे से मेरी चुत को चोद (फाड़) रहे थे. मेरी चुत इतनी देर में दो बार झड़ चुकी थी, पर चाचाजी रुकने का नाम नहीं ले रहे थे.
पूरा कमरा मेरी “आह्ह्ह आह्ह्ह..” की चीखों और पच पच पच की आवाज से भर गया था.
चाचाजी ने अपने धक्के और तेज कर दिए, जिससे मैं समझ गई कि वो भी अब झड़ने वाले हैं. मैंने उनको कसके अपनी बांहों में समेट लिया. चाचाजी ने मेरे होंठों को चूसते और काटते हुए चार छह धक्कों के बाद अपने गर्म लावा से मेरी चुत को भर दिया.
हम कुछ देर लिपकिस करते रहे, फिर धीरे से चाचाजी ने अपना लंड मेरी चुत से बाहर निकाल लिया.

“ओह्ह्ह्ह..” मेरी किलकारी निकल गई.
चाचाजी- मजा आया मेरी जान??
मैंने शरमाते हुए अपनी नजरें झुका लीं.
चाचाजी- नहीं ऐसे नहीं, सही सही बताओ मजा आया कि नहीं??
वह भी जानते थे कि मुझे कितना मजा आया था, पर वह मेरे मुँह से बुलवाना चाहते थे.
मैंने उनसे नजरें मिलाते हुए एक हल्की सी लिपकिस की.
मैं- बहुत मजा आया, आपने मुझे सच में आज औरत बना दिया, आज से मैं हमेशा के लिए आपकी हो गई.
ये कहते हुए हमने फिर लिपलॉक कर लिए. कुछ ही देर में चाचाजी का लंड मुझे चोदने के लिए फिर तैयार हो गया.

इस बार उन्होंने मुझे अपने ऊपर लेकर चोदा और सुबह पांच बजे तक चाचाजी ने मुझे 3 बार बेड पर चोदा, फिर बाथरूम में नहाते वक्त चाचाजी ने मुझे घोड़ी बना कर चोदा.
गजब का स्टेमिना था चाचाजी में.. मेरी तो हालत खराब कर के रख दी थी.
मैं सुबह 6 बजने से पहले में अपने रूम में आ गई, जहाँ मेरे पति अपनी पत्नी की बेवफाई से बेखबर सोए पड़े थे. मैं भी उनके पास जाकर सो गई.
सुबह दर्द के मारे मुझ से चला नहीं जा रहा था, सबके पूछने पर मैंने पेट में दुखने का बहाना बना दिया. चाचाजी मेरी हालत को देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे.
इसी तरह मैंने और चाचाजी ने 7 दिन की टूर में 2 रात चुदाई करते हुए साथ बिताए और घर आकर भी हम दो महीने से जब भी मौका मिलता है.. हम सेक्स का भरपूर मजा लेते हैं, जिससे मुझे आज पता चला ही कि मैं प्रेगनेन्ट हूँ. मेरे इस बच्चे के बाप मेरे चाचा ससुर हैं.