23 साल की सीधी साधी हाऊस वाइफ-3

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मैंने धीरे से “सिस्स्स्स्स उम्म्म्ममम अह्ह्ह्ह्ह..” करते हुए उनके सर को अपनी चुत में दबा लिया.
मैंने सामने की सीट पर अपने पैर ऊपर कर लिए, जिससे चाचाजी मेरी चुत को फूल लेन्थ चाटने लगे. मैं अपनी चुत चटाई का भरपूर आनन्द ले रही थी. तभी चाचाजी ने अपनी जीभ मेरी चुत में डाल दी, जिससे मेरी चुत का मजा और बढ़ गया.
चाचाजी अपनी जीभ को चुत में अन्दर बाहर कर रहे थे.
“आह्हहहहह आह्ह्ह्हहह अइइइ..”
करीब दस मिनट की जीभ चुदाई के बाद मैंने कन्ट्रोल खो दिया और चाचाजी के मुँह पे ही ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया. चाचाजी ने सारा वीर्य चाट चाट कर मेरी चुत साफ कर दी. मुझे बड़ी शर्म आ रही थी. मैं चाचाजी के बालों में प्यार से उंगलियां घुमा रही थी और चाचाजी मेरी चुत को चाट कर साफ कर रहे थे. मैं चाचाजी को लिपकिस करना चाहती थी, पर वो मुश्किल था.

पर चाचाजी कहाँ रुकने वाले थे. चाचाजी का हाथ मेरी गरदन में आया और अपनी तरफ झुका लिया और मेरे होंठों को लिपलॉक कर लिया.
कुछ देर तक लिपकिस करने के बाद चाचाजी ने मेरे कान के पास आके धीरे से कहा- शाहीन मेरी जान अब तुम्हारी बारी है.. मुझे खुश करने की.
ये कहते हुए चाचाजी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने तने हुए लंड पर रख दिया.
मुझे बहुत शर्म आ रही थी.
चाचाजी ने अपनी पेन्ट की जिप खोलकर अपने तने हुए लंड को बाहर निकाल कर मेरे हाथ में थमा दिया. मैं अंधेरे की वजह से उसे देख तो नहीं सकती थी, पर मेरे हाथ में होने से पता चलता था कि वह इरफान के लंड से काफी मोटा और लंबा था. मैं अपने हाथों से चाचाजी के लंड को सहला रही थी.
कुछ देर बाद चाचाजी ने मेरे कान में धीरे से कहा- मेरी जान चूसोगी नहीं इसे??

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मैं- नहीं नहीं…
चाचाजी- क्यों? तुम्हें अच्छा नहीं लगा?
मैं- मैंने कभी ऐसा नहीं किया.
चाचा जी- तो आज कर लो, तुम्हें बहुत मजा आएगा और मुझे भी.
यह कहते हुए चाचाजी खड़े से होते हुए अपनी सीट पर बैठ गए, जो आगे चाची ने भी देखा.
आगे से चाची बोलीं- हो गई कमर सीधी??
चाचाजी ने कहा- हाँ अब ठीक है.
फिर मुझे देख कर चाचाजी ने कहा- शाहीन अब तुम भी थोड़ी देर लेट जाओ.
मैंने सिर्फ “हाँ” कहा और लेट कर अपने ऊपर कम्बल डाल लिया, जो चाचाजी के पेट तक था. चाचाजी ने अपनी पेन्ट को नीचे की तरफ सरका दिया, जिससे उनका तना हुआ लंड मेरे मुँह के बिल्कुल करीब आ गया. मैंने उनके लंड को अपने हथेली में थाम लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी.

चाचाजी ने मेरे बालों में हाथ डाल के मेरे होंठों को अपने लंड पे चिपका लिया. चाचाजी के लंड से यूरीन और स्पर्म की मिलीजुली खुशबू आ रही थी, जो मुझे और कामुक बना रही थी. पर मेरे लिए पहला और बिल्कुल नया अनुभव था.
इरफान(मेरे शौहर) का भी कभी लंड मैंने मुँह में नहीं लिया था. मैंने कभी कभी ये करना चाहा तो उन्होंने मना कर दिया. लंड चुसवाने को इरफान एक गंदी हरकत मानते थे, पर आज उनके चाचा उनकी जवान बहू के मुँह में अपना लंड देने को बेताब थे.
मैंने धीरे धीरे चाचा जी के लंड को चूमना शुरू किया और अपना मुँह खोल के चाचाजी के लंड को अपने मुँह में ले लिया. ये बड़ा अजीब सफर था. आगे मेरे शौहर और पूरी फैमिली बैठी थी और पीछे में मेरे चाचा ससुर का लंड अपने मुँह से चोद रही थी.
जैसे जैसे मैं लंड चूसती गई मेरा इन्टरेस्ट बढ़ता गया. कुछ ही देर में मैं एक ब्लू फिल्म की मॉडल की तरह चाचाजी के लंड को अपने मुँह में लेके उन्हें भरपूर मजा दे रही थी. चाचा जी बस आँखें बंद कर के मोन कर रहे थे और मेरे बालों में हाथ डाल कर अपने लंड पर दबा रहे थे.

रीब पन्द्रह मिनट के बाद चाचाजी का कन्ट्रोल छूटा और चाचाजी ने मेरे मुँह में गर्म गर्म लावा छोड़ दिया. मैंने पहली बार वीर्य का टेस्ट किया था, जो मेरे पति का नहीं बल्कि चाचा ससुर का था. मैंने भी चाचाजी के लंड को चाट चाट कर साफ किया.
तभी चाचाजी ने थोड़ा झुक कर मेरे होंठों को अपने होंठों में लॉक कर लिया. मैंने भी उनका साथ देते हुए फ्रेन्च किस किया. चाचाजी की आँखों में मुझे संतुष्टि साफ नजर आ रही थी. मैं अब भी चाचाजी का लंड सहला रही थी. हम दोनों एक दूसरे को देखकर प्यारी सी स्माइल दे रहे थे. चाचाजी ने मेरे कान में धीरे से कहा.
चाचाजी- आई एम वेरी सॉरी!
मैं- क्यों??
चाचाजी- मैंने तुम्हें प्रोमिस किया था.. फिर भी ये सब किया.
मैंने बस शरमाते हुए उनके पेशानी पे किस किया, जिससे वह समझ गए कि मैं भी यही चाहती थी.
चाचाजी- शाहीन मेरी जान मेरी ख्वाइश कब पूरी करोगी?

मैं- कौन सी?
चाचाजी- जान, मैं तुम्हें अपनी दुल्हन बनाना चाहता हूँ और हमारी सुहागरात..
यह कहते हुए चचाजान चुप हो गए. मैं उनकी अधूरी बात को पूरी तरह समझकर शर्माते हुए उनसे चिपक गई. चाचाजी मेरे सर में हाथ घुमा रहे थे, जिससे मुझे कब नींद आ गई.. पता ही नहीं चला.
ऐसे ही हमारा ये सेक्स भरी छेड़छाड़ वाला सफर पूरा हुआ और हम शिमला पहुँच गए जहाँ हमें 3 दिन रुकना था. करीब 7 बजे होटल पहुँचे, जहाँ हमारा कमरा पहले से ही बुक था. हमने वहाँ 3 कमरे लिए थे.
सफर की थकान की वजह से हमने कुछ देर आराम करने का तय किया और दोपहर के खाने के बाद ही घूमने जाने का तय किया. रूम में जाते ही हम सब सो गए. करीब 12 बजे मेरी आंख खुली तो मैंने पहले मेरी बेटी को तैयार किया और मेरी सासू माँ के कमरे में जाकर उन्हें दे आई. फिर खुद तैयार होकर इरफान को जगाया, तभी चाचाजी आ गए.
चाचाजी- अरे शाहीन, अभी तक तैयार नहीं हो?

मैं- चाचा मैं तो रेडी हूँ.. बस इरफान बाकी है.
इरफान- बस चाचाजी, मैं अभी 15 मिनट में रेडी हो जाता हूँ.
वो तौलिया वगैरह लेकर बाथरूम में चले गए. उनके बाथरूम में जाते ही चाचाजी ने पीछे से मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे मम्मों को दबाते हुए मेरी गरदन को चूमना शुरू कर दिया. मैं भी मस्ती के साथ उनका साथ दे रही थी. मैं मन ही मन कह रही थी “शाहीन… भूल जा सब रिश्ते…”

करीब 2 मिनट बाद मैं घूम गई और चाचाजी के होंठों में होंठ डालती हुई उनकी बांहों में समा गई. चाचाजी ने मुझे बाथरूम की दीवार से चिपका कर खड़ा कर दिया और अब उनके बिना आवाज वाले चुम्बनों की बौछार से मेरे पूरे बदन पर मद हावी हो रहा था.
बड़ा अजीब मंजर था मेरे पति जिस बाथरूम में नहा रहे थे, उसी की दीवार से सटी उनकी जवान खूबसूरत पतिव्रता बीवी के पूरे बदन को उनके चाचाजी किसी कुल्फी की तरह चाट रहे थे.
“सीस्स्स्सस हह्ह्ह्ह सिस्स्स्स..” मेरे मुँह से मद्धम स्वर में मादक सिसकारियां निकल रही थीं. मेरा सारा मेकअप चाचाजी ने बिगाड़ कर रख दिया था. मैं उनको और अपने आपको संभालते हुए अपने आपसे अलग किया और धीरे से कहा- जान.. जान.. बस जान कोई आ जाएगा.
ये पहली बार था, जब मैंने चाचाजी को जान कह कर पुकारा था. उनके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और उन्होंने मुझे बांहों में भर लिया.
मैं- बस कुछ हमारी सुहागरात के लिये बचा कर रखो.
और हम दोनों हंस पड़े.
चाचाजी- जान मैंने पूरा प्लान बना लिया है.
मैं- कैसा प्लान?
चाचाजी- आज जब हम घूम कर वापस आएंगे तो रात को मैं इरफान को ड्रिंक कराने के लिए ले जाऊँगा, जहाँ मैं उसकी ड्रिंक में नशीली दवाई मिला दूँगा.. जिससे वह पूरी रात बेहोश रहेगा और हम..

ये कहते हुए चाचाजी रुक गए. मैं उनकी अधूरी बात को समझ गई थी.
मैंने डरते हुए कहा- मगर उनको कुछ होगा तो नहीं न..!
मैं अब भी इरफान से प्यार करती थी, सो मुझे उनकी फिक्र हो रही थी कि कहीं इस चक्कर में नशीली दवाई के साइड इफेक्ट से उन्हें कुछ हो न जाए. चाचाजी ने मुझे विश्वास दिलाया कि डरो मत कुछ नहीं होगा.
वैसे भी चाचाजी साइन्स से ग्रेजुऐट थे तो इन सब बातों में उनका ज्ञान अच्छा था.
चाचाजी- शाहीन तुम इरफान के सो जाने के बाद रूम नं 208 में आ जाना, जो मैंने अपनी सुहागरात के लिए बुक करवाया है.
मैंने शरमा के अपनी नजरें झुका लीं. चाचाजी ने मुझे लिप किस किया और अपने कमरे में चले गए. मैंने अपने आपको फिर से रेडी किया और हम घूमने निकल गए.
चाचाजी को जब भी मौका मिलता, वो मेरे प्राइवेट पार्टस को छेड़ देते. मुझे डर तो बहुत लगता था, पर मजा भी उतना ही आता था.
रात 10 बजे हम खाना खा कर होटल के रूम पर वापस पहुँचे.

चाचा जी- आप सब लोग आराम कीजिए, मैं और इरफान जरा घूम कर आते हैं.
चाचाजी ने इरफान को आंख मारी.
सासू माँ- जल्दी वापस आना.. ठंड बहुत है.
मैंने अंजान बनते हुए पूछा- कहां जा रहे हो इतनी रात को??
इरफान- बस यहीं आस पास जरा टहल कर आते हैं. तुम सो जाओ और सानिया को भी ठीक से सुला दो.
हम सब अपने अपने कमरों में आ गए. थकान की वजह से थोड़ी ही देर में सास ससुर और चाची दोनों के कमरों की लाइट्स बंद हो गईं, शायद वो सो गए थे.
पर एक्साइटमेंट के मारे मेरी नींद गायब थी. पहली बार मेरे पति के अलावा किसी के लंड से में चुदने वाली थी. मेरे मन में घबराहट और गुदगुदी दोनों हो रही थीं. मैं ट्रान्सपेरेन्ट नाइटी पहन के चाचा जी को चुदाई में पागल करने के लिए बिल्कुल तैयार थी. करीब 12 बजे मेरे रूम की डोरबेल बजी, मैंने डोर खोला तो सामने चाचाजी इरफान को संभाले हुए खड़े थे.

मुझे देखते ही चाचाजी की आँखों में चमक आ गई. मैं पहली बार चाचाजी के सामने ऐसे कपड़ों में खड़ी थी. मुझ भी थोड़ी शर्म आ रही थी.
मैंने इशारे से पूछा, तो चाचाजी ने मुझे आंख मारी, मैं समझ गई कि प्लान कामयाब है. मैंने भी इरफान को संभालते हुए उसकी पीठ में हाथ डाला, चाचाजी ने मेरा हाथ थाम लिया. हम दोनों ने अपनी उंगलियां एक दूसरे की उंगलियों में डाल दीं. हम एक दूसरे को सेक्सी नॉटी स्माइल देते हुए इरफान को बेड तक ले जा रहे थे. इरफान अभी भी पूरी तरह बेहोश नहीं हुए थे, हमने उन्हें बेड पर उल्टा ही लेटा दिया.
मैंने उनके जूते वगैरह निकाल कर कम्बल ओढ़ा दिया. मेरे फ्री होते ही चाचाजी ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरी गरदन होंठ गाल कान सब पे चुम्बनों की बौछार शुरू कर दी.

मैंने जैसे तैसे करके चाचाजी को अपने आप से अलग किया और धीरे से कान में कहा- मेरी जान सब्र करो.. प्लीज़ थोड़ी देर और रुको ना.
चाचाजी- ओहहह जान बहुत ही सेक्सी लग रही हो.. मेरी जान सब्र नहीं हो रहा है क्या करूँ अम्म्म्म्मम..
वो मेरे होंठों को चूस रहे थे, मैंने प्यार से उन्हें अलग किया.
चाचाजी धीरे से बोले- जान मैं देखकर आता हूँ कि सब सो गए हैं कि नहीं, तुम इरफान के सोते ही रूम नं 208 में आ जाना.
मैंने हाँ में सर हिला दिया. चाचा जी के जाने पर मैंने इरफान को ठीक तरीके से सीधा सुलाया. उधर मेरी बेटी भी सो चुकी थी. कुछ देर बाद इरफान के खर्राटों की आवाज़ आने लगी. मैं उनके पास बैठी उनसे मन ही मन कह रही थी कि सॉरी इरफान न चाहते हुए भी मैं तुम्हारे चाचा से प्यार करने लगी हूँ. मैं अब चाचाजी के बिना नहीं रह सकती. तुम्हारी जवान बीवी अब तुम्हारी नहीं रही, वो अब पराये मर्द के लंड से ही संतुष्ट होती है. वो तुम्हारे चाचा को ही चुत की भागीदार बनाए बैठी है.

अभी मैं ये सब सोच रही थी कि तभी मेरे मोबाइल पर मिस कॉल आया. रात का 1 बजा था, मैं समझ गई कि वो चाचाजी का ही है. मैंने देखा, तो मैं सही थी.
मैंने अपनी बेटी को गोद में उठाया और कमरे को बाहर से बंद करके रूम नं 208 की तरफ चल पड़ी. ज्यादा ठंड थी, इस वजह से होटल में काफी सन्नाटा था. मुझे बहुत डर लग रहा था कि कहीं कोई देख न ले.
रूम नं 208 की लाइट जल रही थी और डोर भी थोड़ा खुला था, तो मैं बिना दस्तक किए ही अन्दर चली गई.
वाआववव क्या रूम था वो!! बहुत ही खूबसूरत.. शायद वो होटल का हनीमून सूईट था… जो चाचाजी ने आते ही बुक करवा लिया था. मुझे देखते ही चाचाजी के चेहरे की रौनक बढ़ गई
चाचाजी- जान, सानिया को क्यों साथ लाईं??
मैं- अगर वो उठ जाती तो मेरे वहाँ न होने पर सब को जगा देती.
चाचाजी- ठीक है मेरी जान.. इसे बेड पर एक तरफ सुला दो.