23 साल की सीधी साधी हाऊस वाइफ-1

indian sex kahani, kamukta दोस्तो, मेरा नाम शाहीन शेख है. मैं 23 साल की सीधी साधी हाऊस वाइफ हूँ. मैं ज्यादा तो नहीं, पर खूबसूरत हूँ, अच्छी हाइट, बड़े चूचे और मजबूत शरीर की मालकिन हूँ. मेरे शौहर हमेशा मेरी खूबसूरती की तारीफ करते हैं.
मेरी शादी को 3 साल हो गए हैं. मेरे शौहर का नाम इरफान है, उम्र 24 साल. वो भी काफी हैंडसम हैं. वो एक कम्पनी में अकाउंटेंट हैं. हम लखनऊ में रहते हैं. मेरी और इरफान की लव मैरिज है. कॉलेज में हम दोस्त थे, फिर प्यार हुआ और मेरे पेरेन्टस ने मना कर दिया तो हमने कोर्ट मैरिज कर ली. मेरा पहला प्यार इरफान ही थे और मैंने अपनी लाइफ का पहला सेक्स हमारी सुहागरात को ही किया.
मेरी दो साल की बेटी है, जिसका नाम सानिया है. मेरे घर में मेरे शौहर के अलावा सास ससुर भी हैं. इरफान मुझे सेक्स में और मैरिड लाइफ में हर तरह की खुशी देते हैं. मैं भी बहुत खुश थी अपनी मैरिड लाइफ से.

मगर कुछ महीनों में सब कुछ बदल गया जिसका नतीजा मुझे आज ही पता चला है कि मैं फिर से प्रेग्नेंट हूँ. मगर मेरे इस बच्चे का बाप इरफान नहीं कोई और है.
मेरे ससुर जी की एक छोटी बहन (शौहर की बुआ) और एक छोटा भाई (चाचा ससुर) हैं.
बुआजी अपने ससुराल में हैं और चाचा जी अपनी बीवी बच्चों के साथ हमारे घर के करीब में ही रहते हैं. चाचाजान का नाम आसिफ है, वो करीब 36 साल के हैं. वो काफी खुश मिजाज और फ्रेन्डली आदमी हैं. उम्र में ज्यादा फर्क ना होने की वजह से मैं और इरफान दोनों ही चचा जान से काफी फ्रेंक थे.
उनकी वाइफ यानि मेरी चाची सास भी बहुत खूबसूरत और अच्छे स्वभाव की हैं. पर वो नेचर की बहुत सीरीयस हैं. वो ज्यादा मजाक नहीं करती. उनका एक 8 साल का समीर नाम का लड़का है. चचा जान बहुत मजाकिया किस्म के आदमी हैं इसलिये मेरी उनसे बहुत बनती थी.
मेरी और इरफान की कोर्ट मैरिज करवाने में सबसे बड़ा सपोर्ट भी चचा जान का ही था इसलिए मैं उनको काफी मानती थी. मैं उनकी हैंडसम पर्सनलिटी अच्छे पहनावे और स्टाइल से काफी इम्प्रेस भी थी. मगर मेरे मन में कभी कोई गलत ख्याल नहीं आया था. हम एक दूसरे से इतने घुल मिल गए थे कि अपनी पर्सनल बातें भी शेयर कर लेते थे. कभी कभी इरफान से किसी बात पे झगड़ा हो जाता तो वो ही मुझे समझा के मनवा लेते. कभी मैं ज्यादा दुखी होती तो उनके कंधे पे सर रख कर रो लेती और वो मुझे प्यार से समझा कर चुप करा देते.

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यह बात आज से 3 महीने पहले की है. एक दिन सुबह मेरा और इरफान का किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया, बात इतनी बढ़ गई कि मुझे इरफान ने अनाप शनाप बातें सुनाईं और एक चांटा भी जड़ दिया.
फिर वो ऑफिस चले गए.
मुझे बहुत रोना आ रहा था, मेरी सास ने मुझे समझाने की काफी कोशिश की मगर मेरे आंसू नहीं रुक रहे थे. सासू जी ने मेरे चाचा ससुर को फोन लगाया और सारी बात बताई.
करीब आधे घन्टे के बाद 10 बजे चाचा जी घर पर आए. मैं अपने कमरे में बैठी रो रही थी और सासू माँ मेरी बेटी को लेकर हॉल में थीं. चाचा जी ने आकर सासू माँ से थोड़ी बातें की, मैं कमरे में बैठी उन दोनों की बातें सुन रही थी और मेरी आँखों से आंसू बहे जा रहे थे.
सासू माँ- आसिफ, अब तू ही समझा शाहीन को, मैं तो कब से मना रही हूँ.. पर मेरी नहीं सुनती और बस रोए जा रही है.
चचा जान – भाभी, कहाँ है शाहीन?
सासू माँ- अपने कमरे में बैठी रो रही है.. तू उसे समझा मैं सानिया (मेरी बेटी) को लेकर बाजार हो आती हूँ.
सासू माँ मेरी बेटी को लेकर बाजार चली गईं और चाचा जी मुझे मनाने के लिए मेरे कमरे में आ गए.

मैंने अपने आपको ठीक किया, वो मेरे पास आकर बैठे और कुछ बातें की. फिर बातों ही बातों में कुछ ऐसी मजाकिया बात की कि मेरे मुँह से हंसी निकल पड़ी मगर मेरे गाल पे आंसू की धारा बह रही थी.
चचा जान – शुक्र है, चलो चाँद जैसे चेहरे पे मुस्कुराहट तो आई.
मैंने हंसते हुए कहा- क्या चाचा जी, आप भी तारीफ करना तो कोई आप से सीखे.
चचा जान ने मेरे कंधों को पकड़ के मुझे खड़ा किया, जिस से मेरा दुपट्टा पलंग पे गिर गया.. मेरी आँखों से निकली हुई आंसू की धारा मेरे गाल से बहती हुई गले तक आ रही थी.. जिसे चाचा जी बड़ी मादक नजरों से देख रहे थे. मैं भी न जाने क्यों उनकी मदहोश नजरों का शिकार बनती जा रही थी. थोड़ी शरमाहट महसूस होते ही मैंने नजरें झुका लीं, जो चचा जान के लिए एक तरह का इनविटेशन था.
वो मेरे थोड़े और करीब आए और बड़ी कामुकता से अपनी उंगलियों से मेरे गाल और गले पे बनी आंसू की धारा को साफ करने लगे, जिससे मेरे बदन में अजीब सी कम्पन हो रही थी.

यह पहली बार था कि मेरे शौहर के अलावा कोई और मुझे इस तरह छू रहा था. मैंने नजरें उठा कर देखा तो चाचा जी की नजरों में मुझे हवस साफ नजर आ रही थी. हम एक दूसरे को बिना पलक झपकाए देख रहे थे. मेरे पूरे शरीर में अजीब सी सरसराहट हो रही थी. मैं इतनी मदहोश थी मानो मैं उनकी बांहों में समाने के लिए तैयार थी. मेरे दिल की धड़कनें बहुत तेज हो गई थीं, मेरे होंठ कांप रहे थे.
चाचा जी मेरे इतने करीब आ चुके थे कि हम दोनों की साँसों की गरमाहट एक दूसरे में समा रही थी.
आखिरकार मैंने अपनी आंखें बंद करके चाचा जी को ग्रीन सिगनल दिया, जिसे समझते हुए चाचा जी ने अपने दोनों हाथों को मेरे बालों में डालते हुए मेरे कांपते हुए होंठों पे अपने होंठ रख दिए और चूसना शुरू कर दिया.

मैं भी पूरा साथ दे रही थी, हम एक दूसरे के होंठों को चूसे जा रहे थे, मैंने दोनों हाथ चाचा जी की पीठ पे सहलाते हुए उनसे चिपक गई. मेरे चूचे चाचा जी के सीने में समा गए. वो अपनी जीभ को मेरे मुँह में डालते हुए डीप स्मूच कर रहे थे. मैं भी अपनी जीभ को चाचा जी के मुँह में डाल कर डीप स्मूच का पूरा आनन्द ले रही थी.
उनका एक हाथ मेरी पीठ को सहला रहा था और दूसरे हाथ मेरे चूतड़ों को दबा कर मुझे उनके लंड की तरफ खींच रहा था. करीब दो मिनट के स्मूच के बाद चचा जान के होंठ मेरे गालों को चूमते हुए मेरी गरदन पे जा पहुँचे. चचा जान मेरी गरदन को दोनों तरफ से बेतहाशा चाट रहे थे, जिससे चचा जान की लार से मेरी गरदन पूरी गीली हो चुकी थी. मेरे मुँह से मदहोशी भरी सिसकारियां निकल रही थीं. चचा जान मेरे होंठ, गाल, कान और गरदन पर चुम्बनों की ऐसी बौछार कर रहे थे मानो ऐसा लगता था कि वो काफी समय से मेरे लिए तड़प रहे थे.
मैं भी अब इतनी मदहोश हो चुकी थी कि पूरा जोर लगा कर उनको अपने अन्दर खींच रही थी.
करीब पांच मिनट तक यही चलता रहा, फिर अचानक मुझे कुछ गिल्टी फील हुआ और मैंने चचा जान को धक्का देकर अपने से दूर कर दिया.
मैं- चचा जान ये गलत है.. हम ये सब नहीं कर सकते.
चचा जान कुछ बोले बिना मुझे देखे जा रहे थे और मैं उनसे नजरें नहीं मिला पा रही थी.. तो मैं दीवार की तरफ जाकर घूम कर खड़ी हो गई.
मैं- चचा जान में आपके घर की बहू हूँ.. ये ठीक नहीं है.
चाचा- क्यों तुम्हें मैं अच्छा नहीं लगता??

मैं- वो बात नहीं है, पर मैं इरफान से प्यार करती हूँ और मैं उसे धोखा नहीं देना चाहती.
चचा जान ने मेरे करीब आकर पीछे से मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे मम्मों को दबाते हुए फिर से मेरी गरदन को चूमना शुरू कर दिया. मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई, पता नहीं क्यों आज मेरा शरीर मेरा साथ नहीं दे रहा था और चचा जान की हर हरकत का मजा लेना चाहता था. मेरी साँसें तेज चल रही थीं. मेरे दोनों चूचे चचा जान के हाथों में खेल रहे थे और उनके गीले होंठ मेरी मखमली गरदन को मसाज दे रहे थे. चचा जान का लंड मेरे चूतड़ों के बीच जगह बना रहा था.
मैं विरोध तो नहीं कर रही थी, पर मेरे मुँह से ‘नहीं चचा जान .. प्लीज़.. ये गलत है.. मैं आपके भतीजे की बीवी हूँ..’ जैसे शब्द निकल रहे थे.
चचा जान का एक हाथ मेरे पेट को सहलाते हुए मेरी सलवार तक पहुंचा. मैं कुछ समझती उससे पहले तो मेरा नाड़ा खुल चुका था और मेरी सलवार जमीन पे थी. मैंने चचा जान की तरफ देख कर मना करना चाहा, पर मैं कुछ कहती उससे पहले चचा जान ने मेरे होंठों को अपने होंठों में भर के लिप लॉक कर लिया.

अब चचा जान उंगलियों से मेरी पेंटी के ऊपर से चुत को सहला रहे थे. फिर उन्होंने मेरी पेंटी में हाथ डाल कर मेरी चुत पे अपनी कामुक उंगली चला दी और धीरे धीरे चचा जान ने एक उंगली मेरी रस से तरबतर हुई गीली चुत में डाल दी.
मैं एकदम से उछल पड़ी और चचा जान के बालों में हाथ डाल के उनके होंठों को जोर से काटने लगी. चचा जान मेरे होंठ गाल कान और गरदन पे बेतहाशा चूम रहे थे और अपनी दो उंगलियां मेरी रस भरी गीली चुत में अन्दर बाहर कर रहे थे.
मैं कामुक सिसकारियां ले रही थी- सिस्स्स्सस अम्म्म्मम… उम्म्ह… अहह… हय… याह…
मेरा पूरा तन और मन अब वासना की आग में डूब चुका था और मैं अपनी सारी मर्यादा भूल चुकी थी. मैं भूल चुकी थी कि मैं शादीशुदा हूँ और अपने शौहर से प्यार करती हूँ, एक बेटी की माँ हूँ, किसी के घर की इज्ज़त हूँ.. सब कुछ भुलकर में अब बस चाचा ससुर की कामुक फिंगर सेक्स का भरपूर आनन्द ले रही थी.
चचा जान ने अपनी स्पीड बढ़ा दी.
“आह्ह्ह्ह हहा अम्म्म्म्मम…”
मैं बहुत ही उत्तेजित हो गई और किसी भी वक्त झड़ने वाली थी. करीब 3-4 मिनट के फिंगर सेक्स के बाद मेरी चुत से ढेर सारा वीर्य निकला और मेरी जाँघों पर बहने लगा. मेरा शरीर अब निढाल हो गया था. चचा जान अभी भी मेरे कोमल होंठों का रस पी रहे थे. उन्होंने फिर मुझे अपनी गोद में उठाया और बेड की तरफ ले जाने लगे. मैं भी अब तन मन से चुदाई के लिए तैयार थी. मेरे बेड पे गिरते ही चचा जान मेरे ऊपर आ गए और हम एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे. मैं मादक सिसकारियां लेती हुई अपना चेहरा इधर उधर घुमा रही थी और चचा जान मेरी गरदन को चूम रहे थे.

फिर चचा जान ने मेरे टॉप को मेरे कंधों तक ऊपर कर दिया जिससे मेरे चूचे बाहर आ गए. चचा जान ने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को मसलना शुरू कर दिया और अपनी गरम जीभ मेरे निप्पल पे रख दी.
“सिस्स्स्स्स… आहम्म्म्मम.. धीरेरेरे.. प्लीज़…” करते हुए मैं उनके बालों में उंगलियां फिरा रही थी. मेरे दोनों मम्मों को चूस चूस और काटकर चचा जान ने पूरे लाल कर दिया था.
करीब 5 मिनट की मम्मों की चुसाई के बाद चाचा जी ने धीरे से नीचे मेरी नेवल के अन्दर जीभ डालते हुए दोनों हाथों से मेरी पेंटी उतार दी.. इसमें थोड़ा मैंने भी उनका साथ दिया. अब मेरी क्लीन शेव मखमली चूत बिल्कुल नंगी चाचा जी के सामने थी. चचा जान जी ने पहले मेरी चूत के आस पास हल्के से चुम्बन किये और फिर अपनी गर्म जीभ मेरी चुत पे रख दी.
“आह्ह्ह हहह…” मेरे मुँह से जोर की चीख निकल गई.
यह मेरे लिये पहला और बिल्कुल नया अनुभव था. इरफान (मेरे शौहर) ने भी कभी मेरी चुत नहीं चाटी थी. मैं तो जैसे सातवें आसमान पे थी. इतना मजा आ रहा था कि मैं शब्दों में बता नहीं सकती.
चचा जान मेरी चुत की फुल लेन्थ को चाट रहे थे. मैं अपने दोनों हाथ चचा जान के सर में डाल कर अपनी चुत में जोर से दबा रही थी. हम दोनों इतने मदहोश हो चुके थे कि रिश्ते नाते शर्म हया सब कुछ भूल कर उस पल का आनन्द ले रहे थे.
तभी अचानक मेरे फोन की रिंग बजी.. जो पलंग पर मेरे पास ही पड़ा था. मैंने फोन में देखा तो वो इरफान का कॉल था. मेरे तो जैसे होश ही उड़ गए, मेरे हाथ पैर कांपने लगे, मैं डर गई थी कि इरफान को कुछ पता तो नहीं चल गया.